राजनीति

उत्तर प्रदेश: भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल समेत 10 को आजीवन कारावास, विधायक कोर्ट से फ़रार

अशोक सिंह चंदेल उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से भाजपा विधायक हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 22 साल पुराने एक गोलीकांड की सुनवाई करते हुए यह सज़ा सुनाई है. घटना में हमीरपुर के एक अन्य भाजपा नेता के परिवार के पांच सदस्यों की जान चली गई थी.

भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल. (फोटो साभार: फेसबुक)

भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल. (फोटो साभार: फेसबुक)

इलाहाबाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के हमीरपुर ज़िले में 22 वर्ष पुराने गोली चलाने के एक मामले में भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल और अन्य नौ लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा शुक्रवार को सुनाई.

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, सज़ा की घोषणा होते ही विधायक अशोक सिंह चंदेल कोर्ट परिसर से फ़रार हो गए.

इस घटना में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की जान चली गई थी. राज्य सरकार और शिकायतकर्ता और भाजपा नेता राजीव शुक्ला की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने हमीरपुर के अपर सत्र न्यायाधीश के 15 जुलाई, 2002 के निर्णय को पलट दिया जिसमें चंदेल सहित सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया गया था.

राज्य सरकार और शिकायतकर्ता राजीव शुक्ला ने ज़िला और सत्र न्यायाधीश के निर्णय को चुनौती दी थी.

उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी, 1997 को भाजपा नेता राजीव शुक्ला और अशोक सिंह चंदेल के बीच हमीरपुर के सुभाष नगर में मामूली कहासुनी हो गई थी, जो बड़े झगड़े में बदल गई और गोलीबारी हुई जिसमें शुक्ला के दो बड़े भाई राकेश शुक्ला, राजेश शुक्ला और नौ वर्षीय भतीजे अंबुज, वेद नायक और श्रीकांत पांडेय की मौत हो गई थी.

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, घटना के चश्मदीद राजीव शुक्ल ने रात को 9:10 बजे विधायक अशोक सिंह चंदेल व अन्य को नामज़द करते हुए थाने में हत्या और हत्या के प्रयास का मुक़दमा दर्ज कराया था.

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने विवेचना के बाद अशोक सिंह चंदेल, रघुवीर सिंह, डब्बू सिंह, उत्तम सिंह, प्रदीप सिंह, नसीम, श्याम सिंह, साहब सिंह, झंडू और भान सिंह के ख़िलाफ़ विभिन्न धाराओं में तथा शस्त्र अधिनियम के तहत चार्जशीट दाख़िल की थी.

इस घटना में दो बच्चों समेत और पांच लोग गोली लगने से घायल हुए थे जिसके लिए अशोक सिंह चंदेल एवं अन्य नौ लोगों के ख़िलाफ़ नामज़द रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. इस मामले की जांच के बाद पुलिस ने चंदेल एवं अन्य नौ लोगों के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दाख़िल किया था.

लंबे मुकदमे के दौरान 17 जुलाई, 2002 को अपर ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा चंदेल समेत सभी 10 लोगों को इस आधार पर बरी कर दिया गया था कि गवाहों के बयान संदेहपूर्ण हैं.

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, सामूहिक हत्या के बहुचर्चित मुक़दमे की सुनवाई तत्कालीन सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार की अदालत में हुआ था. आरोपितों को दोषमुक्त देने वाले इस जज को पहले ही बर्ख़ास्त किया जा चुका है.

इस निर्णय को राजीव द्वारा उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई.

हमीरपुर से एक बार सांसद और चार बार विधायक रहे अशोक सिंह चंदेल ने अपना राजनीतिक करिअर 1989 में एक निर्दलीय विधायक के तौर पर शुरू किया था. उन्हें बसपा के टिकट पर 1999 में हमीरपुर से सांसद चुना गया. वर्तमान में वह भाजपा के विधायक है.

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, विधायक अशोक सिंह चंदेल कानपुर के किदवई नगर में कारोबारी रणधीर गुप्ता की दिनदहाड़े हत्या के मामले में भी आरोपी हैं. उनके ऊपर सीओ के साथ दबंगई दिखाने का एक मामला भी थाने में दर्ज है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)