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गुजरात: पेप्सिको इंडिया ने आलू उगाने के लिए चार किसानों के ख़िलाफ़ कोर्ट में याचिका दायर की

अमेरिकी कंपनी पेप्सिको ने अदालत में दावा किया कि अपने उत्पाद लेज़ चिप्स बनाने के लिए आलू की यह किस्म उगाने का अधिकार सिर्फ़ उसके पास है. अदालत ने चारों किसानों पर आलू की ख़ास किस्म उगाने पर रोक लगाई.

(फोटो साभार: पेप्सिको इंडिया)

(फोटो साभार: पेप्सिको इंडिया)

अहमदाबाद: खाद्य और पेय पदार्थ बनाने वाली अमेरिकी कंपनी पेप्सिको इंडिया ने गुजरात के चार किसानों के ख़िलाफ़ आलू के एक ख़ास किस्म की खेती कराने को लेकर शिकायत दर्ज कराई है.

यह मामला पिछले हफ़्ते का है. कंपनी का दावा है कि ये किसान अवैध तौर पर आलू की इस ख़ास किस्म को उगा और बेच रहे हैं, जिसे उगाने के लिए कंपनी ने विशेष तौर पर अधिकार प्राप्त कर रखा है.

कंपनी का दावा है कि उसके उत्पाद लेज़ चिप्स बनाने के लिए इस ख़ास किस्म के आलू को उगाने का अधिकार सिर्फ़ उसके पास है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, व्यावसायिक अदालत प्लांट वैराइटी रजिस्ट्री ने छबीलभाई पटेल, विनोद पटेल, बिपिन पटेल और हरिभाई पटेल नाम के किसानों पर 26 अप्रैल तक के लिए आलू की इस ख़ास किस्म को उगाने और बेचने पर रोक लगा दी है.

अदालत ने तीनों किसानों से कंपनी के अधिकारों का उल्लंघन करने को लेकर जवाब भी मांगा है.

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के आग्रह पर जज मूलचंद त्यागी ने अधिवक्ता पारस सुखवानी को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर विवाद की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है.

पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने अदालत को बताया है कि उसने अपने लेज़ ब्रांड से चिप्स बनाने के लिए आलू की ख़ास किस्म एफएल 2027 का रजिस्ट्रेशन करा रखा है. यह किस्म एफएल 1867 और विस्चिप किस्म के आलू की संकर प्रजाति है.

कंपनी ने बताया कि पादप अधिकार और किसान अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत वह आलू के एफएल 2027 किस्म उगाने की आधिकारिक उत्पादक है.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस किस्म के आलू का व्यावसायिक इस्तेमाल 2009 में शुरू हुआ. इस किस्म का व्यापार ट्रेडमार्क एफसी5 के तहत होता है. बाईबैक सिस्टम के तहत इस किस्म को उगाने का लाइसेंस पंजाब के कुछ किसानों को दिया गया है. गुजरात के कुछ किसानों द्वारा बिना लाइसेंस इस किस्म का आलू उगाना वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है.

पेप्सिको इंडिया ने अदालत को यह भी बताया कि इन किसानों द्वारा आलू की यह ख़ास किस्म उगाने का पता जनवरी में चला. कंपनी ने कहा कि उसने आलू के डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र (आईसीएआर) और शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान को भेजा था.

कंपनी ने दावा कि रिपोर्ट में पता चला है कि ये किसान उसके द्वारा रजिस्टर कराए गए आलू की किस्म की खेती कर रहे हैं. कंपनी ने भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान की ओर से दी गई रिपोर्ट भी अदालत को सौंपी है.

इस पर अदालत ने कहा, ‘अगर किसानों को आलू की इस किस्म को उगाने से रोका नहीं गया तो कंपनी को भारी नुकसान उठाना होगा और यह न्याय की हार होगी.’

रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर किसानों द्वारा उगाए गए आलू के सैंपल को जांच के लिए सरकारी प्रयोगशाला और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान को भेजने को कहा है. अदालत ने कहा कि अगर कोर्ट कमिश्नर नहीं नियुक्त किया गया होता तो प्रतिवादी आलू के स्टॉक को ख़त्म कर सबूत मिटा सकते थे.

अदालत ने पुलिस से कोर्ट कमिश्नर को सुरक्षा मुहैया कराने को कहा है, जो जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराएंगे.