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2016 में लापता हुए विमान में बेटा खोने वाले शख़्स ने फिर की एएन-32 विमान बदलने की मांग

जुलाई 2016 में लापता हुए एएन-32 विमान में 27 वर्षीय कुणाल बारपट्टे फ्लाइट नेविगेटर थे. हाल ही में अरुणाचल प्रदेश से एएन-32 विमान लापता होने के बाद कुणाल के पिता राजेंद्र बारपट्टे ने कहा कि इन पुराने पड़ गए विमानों को बदल दिया जाना चाहिए क्योंकि वे उन लोगों के जीवन को ख़तरे में डाल रहे हैं जो उन्हें उड़ाते हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

पुणे: भारतीय वायु सेना के एक एएन-32 परिवहन विमान के लापता होने से 62 वर्षीय राजेंद्र बारपट्टे की दुखद यादें फिर ताजा हो गईं. बारपट्टे के पुत्र वायुसेना के अधिकारी थे और करीब तीन साल पहले ऐसे ही एक विमान में सवार थे जो लापता हो गया था. उस विमान में कुल 29 लोग सवार थे.

बारपट्टे ने कहा कि इन पुराने पड़ गए विमानों को बदल दिया जाना चाहिए क्योंकि वे उन लोगों के जीवन को खतरे में डाल रहे हैं जो उन्हें उड़ाते हैं.

जुलाई, 2016 में एक एएन -32 विमान चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर के लिए रवाना होने के बाद बंगाल की खाड़ी में लापता हो गया. बारपट्टे के 27 वर्षीय पुत्र कुणाल उस विमान में फ्लाइट नेविगेटर थे. कई विमानों द्वारा उस विमान की तलाश के लिए अभियान चलाने के बावजूद खोजा नहीं जा सका.

उन्होंने कहा कि महीनों बाद वायुसेना की कोर्ट ऑफ इनक्वायरी ने निष्कर्ष निकाला कि विमान में सवार लोगों के बचने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा, ‘पिछले 35 वर्षों से हम उसी विमान का उपयोग कर रहे हैं….’

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, घटना के बाद राजेंद्र बारपट्टे ने भारतीय वायुसेना को पत्र लिखा था कि भविष्य में ऐसे हादसे दोहराए जाने की संभावनाएं हैं. वहीं अपने पत्र में बारपट्टे ने विमान के बारे में तकनीकी जानकारियों की मांग थी जो कि उन्हें मुहैया नहीं कराई गईं.

राजेंद्र बारपट्टे सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट (सीआईआरटी) के रिटायर्ड वैज्ञानिक हैं. हाल ही में लापता हुए विमान के बारे में बात करते हुए बारपट्टे ने कहा कि साल 2016 के हादसे से बाद उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री से विमानों को बदलने को कहा था क्योंकि पिछले 35 सालों से उनका इस्तेमाल हो रहा था और वे पुराने हो चुके थे.

यह भी पढ़ें: साल 2016 में भी वायुसेना का एएन-32 विमान लापता हुआ था, जिसका आज तक कुछ पता न चल सका

बारपट्टे ने कहा, ‘पर्रिकर के साथ मुलाकात में मैंने उनसे पूछा कि हमारे रक्षा बल इन विमानों को उड़ाकर युवा अधिकारियों की जान जोखिम में क्यों डाल रहे हैं. उस समय की मेरी सबसे बुरी आशंका अब सच हो सकती है. अब मेरी मांग है कि रक्षा मंत्रालय सोमवार की घटना से सबक ले और सभी विमानों को नए विमानों से बदलकर जवानों की जान बचाए.’

बता दें कि बीते सोमवार को एक एएन-32 विमान अरुणाचल प्रदेश के मेचुका के पास लापता हो गया था. विमान ने असम के जोरहाट से चीन की सीमा के पास मेचुका (अरुणाचल प्रदेश) के लिए उड़ान भरी थी.

सोमवार की दोपहर को उड़ान भरने के करीब 33 मिनट बाद विमान लापता हो गया, जिसमें 13 लोग सवार थे. एएन-32 विमान का पता लगाने के लिए विमानों और हेलीकॉप्टरों के एक बेड़े को लगाया गया है.

यह पहला मामला नहीं है जब एएन-32 विमान लापता या दुर्घटनाग्रस्त हुआ हो. इससे पहले भी ये विमान कई बार हादसों का शिकार हुआ है और कई अन्य घटनाओं में यह विमान लापता भी है, जिसका आज तक कुछ पता नहीं चल सका है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)