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कश्मीर में पाबंदियों के बीच पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए रोज़ी-रोटी का संकट

कुछ होटल व्यवसायी स्टाफ कम करने पर विचार कर रहे हैं. वहीं कुछ ट्रैवल एजेंसियों ने अपने स्टाफ के वेतन में कटौती की है. पाबंदियों के चलते होटल व्यवसायी, टूर एंड ट्रैवल एजेंट ही नहीं बल्कि हाउसबोट के मालिक, शिकारा चलाने वाले, टैक्सी ऑपरेटर और टूरिस्ट गाइड भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

A boatman walks past the parked 'Shikaras' or boats for tourists on the banks of Dal Lake in Srinagar August 4, 2019. REUTERS/Danish Ismail

डल झील में खड़े शिकारे. (फोटो: रॉयटर्स)

सोनमर्ग: जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने के बाद पर्यटन व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित है. इस वजह से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

कश्मीर पांच अगस्त के बाद करीब एक महीने से अप्रत्याशित पाबंदियों से जूझ रहा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित है. बाजार बंद हैं तथा सार्वजनिक परिवहन के साधन सड़कों से नदारद हैं.

बीते पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने से कुछ दिन पहले राज्य सरकार ने सभी सैलानियों से घाटी छोड़ देने को कहा था.

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जब सैलानियों को घाटी छोड़ने के लिए कहा गया तब करीब 20 से 25 हजार सैलानी घाटी में मौजूद थे. तब से घाटी में कोई सैलानी नहीं है.

पर्यटन को कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है.

श्रीनगर के एक प्रतिष्ठित होटल कारोबारी ने बताया कि अगर मौजूदा स्थिति लंबी खिंचती है तो नौकरियों में कटौती करनी पड़ेगी. उन्होंने कहा, ‘अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो हमारे पास कोई और विकल्प नहीं होगा. हम यह नहीं करना चाहते हैं.’

नुकसान सिर्फ होटल कारोबारियों को नहीं हो रहा है बल्कि टूर ट्रैवल्स एजेंट, हाउसबोट के मालिक, शिकारावाला, टैक्सी ऑपरेटर और टूरिस्ट गाइडों को भी नुकसान हो रहा है.

कुछ ट्रैवल एजेंसियों ने नौकरियों में कटौती करने से बचने के लिए अपने स्टाफ के वेतन में कटौती की है.

एक ट्रैवल एजेंसी के मालिक ने बताया, ‘हमारे पास कारोबार फिर से चलने तक या तो अपने कर्मचारियों को निकालने या उनकी तनख्वाह कम करने का विकल्प है. हमारी एजेंसी में हमने अपने स्टाफ की तनख्वाह को 30 फीसदी तक कम करने का सामूहिक फैसला किया है.’

एक हाउसबोट के मालिक अहमद ने बताया, ‘हमने बैंकों से कर्ज़ लिया हुआ है और हमें मासिक किस्त देनी होती है. हम कहां से पैसे का इंतजाम करें?’

एक ट्रैवल एजेंट ने कहा कि यह मौसम पर्यटन के लिहाज से सबसे ज्यादा बेहतर होता है और अब सर्दियां आ रही हैं, जो पर्यटन के लिए रुखा मौसम माना जाता है. मौजूदा हालात को देखते हुए इसमें मार्च तक किसी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं है.

लद्दाख क्षेत्र का द्वार माने जाने वाला सोनमर्ग आम तौर पर सैलानियों से भरा रहता है, लेकिन मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के इस इलाके के होटल, रेस्तरां और दुकानें बंद पड़ी हैं.

दूसरी ओर, श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील, जहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती थी, वहां अब शांति छाई हुई हैं. इन दिनों झील के किनारे सिर्फ कुछ स्थानीय लोग ही मछली पकड़ते नजर आते हैं.

एक होटल के प्रबंधक ने बताया कि हमारा कारोबार सिर्फ कुछ स्थानीय लोगों से ही चल रहा है.

उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ हफ्तों से हमने किसी सैलानी को नहीं देखा है. सरकार के परामर्श के बाद भी कुछ पर्यटक यहां रुके हुए थे और उनके जाने के बाद यहां कोई सैलानी नहीं आया. यहां सिर्फ एक-दो रातों के लिए स्थानीय लोग आ रहे हैं.’

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून में कश्मीर में 1.74 लाख सैलानी आए थे जबकि जुलाई में 3,403 विदेशी समेत 1.52 लाख पर्यटक कश्मीर घूमने आए थे.

बहरहाल, पर्यटन विभाग ने कहा कि अगस्त में आने वाले सैलानियों का ब्योरा महकमे के पास नहीं है.

कश्मीर में पर्यटन के निदेशक निसार अहमद वानी ने कहा, ‘हमारे पास किसी भी सैलानी के आने की कोई रिपोर्ट नहीं है. कुछ शायद आए हों, लेकिन हमारे पास रिकॉर्ड नहीं है.’

एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि पर्यटन विभाग के बाद घरेलू पर्यटकों की संख्या की जानकारी नहीं, जबकि तकरीबन 800 विदेशी सैलानियों ने अगस्त में जम्मू कश्मीर का दौरा किया है.

अधिकारी ने कहा, ‘राज्य की सीआईडी विदेशी सैलानियों का पंजीकरण करती है. इसलिए उनका औपचारिक आंकड़ा उपलब्ध होता है. लेकिन सैलानियों पर प्रतिबंध के चलते घरेलू पर्यटकों के आने का आंकड़ा आधिकारिक तौर पर नहीं लिया गया है.’

एक ट्रैवल एजेंट ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘पाबंदियों के चलते पर्यटक न के बराबर है और व्यापार बैठ गया है. इंटरनेट पर प्रतिबंध के चलते समस्या और बढ़ गई है. हम कम्यूनिकेट नहीं कर पा रहे हैं. हम ये भी नहीं जान पाए थे कि कितनी बुकिंग कन्फर्म हुई हैं, उससे पहले ही ये सब हो गया.’

कश्मीर में पंजीकृत तीन हजार ट्रैवल एजेंटों में से एक ने कहा, ‘फरवरी में पुलवामा में हुए आतंकी हमले और उसके बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच उपजे तनाव की वजह से इस साल राज्य में पर्यटन का सीज़न देरी से शुरू हुआ.’

उन्होंने कहा, ‘मई और जून में व्यापार बढ़ता है. अमरनाथ यात्रा के बाद हमें उम्मीद थी कि व्यापार अच्छा जाएगा क्योंकि जुलाई में बुकिंग बढ़ गई थी. हालांकि वर्तमान परिस्थितियों ने पर्यटन उद्योग को बुरी तरह प्रभावित कर खत्म कर दिया. इस स्थिति से वापस खड़ा हो पाना बहुत मुश्किल नजर आ रहा है.’

इस परिस्थितियों में सिर्फ होटल व्यवसायी, टूर एंड ट्रैवल एजेंट ही नहीं हाउसबोट के मालिक, शिकारा चलाने वाले, टैक्सी ऑपरेटर और टूरिस्ट गाइड भी प्रभावित हैं.

पर्यटन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ‘गुलमर्ग, सोनमर्ग या पहलगाम में तकरीबन 11 हजार पंजीकृत खच्चर वाले हैं. हमारे पास तकरीबन 5000 शिकारा चलाने वाले हैं, 2100 स्लेज (बर्फ पर चलने वाली गाड़ी) वाले और 1300 से ज्यादा टूरिस्ट गाइड हैं. अब इन लोगों के पास कोई काम नहीं बचा है.’

गौरतलब है कि 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था. उसके बाद से वहां परिवहन, फोन सेवा, मोबाइल इंटरनेट सहित सभी संचार माध्यम को बंद कर दिया गया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)