भारत पेट्रोलियम के निजीकरण का रास्ता साफ, रिलायंस लगा सकती है बोली

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी भारत पेट्रोलियम के राष्ट्रीकरण संबंधी कानून को 2016 में रद्द कर दिया था. ऐसे में भारत पेट्रोलियम को निजी या विदेशी कंपनियों को बेचने के लिए सरकार को संसद की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी.

(फोटो: रॉयटर्स)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी भारत पेट्रोलियम के राष्ट्रीकरण संबंधी कानून को 2016 में रद्द कर दिया था. ऐसे में भारत पेट्रोलियम को निजी या विदेशी कंपनियों को बेचने के लिए सरकार को संसद की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी.

(फोटो: रॉयटर्स)
(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) के प्रस्तावित पूर्ण निजीकरण का रास्ता साफ हो चुका है.

सरकार ने बीपीसीएल के राष्ट्रीकरण संबंधी कानून को 2016 में रद्द कर दिया था. ऐसे में बीपीसीएल को निजी या विदेशी कंपनियों को बेचने के लिए सरकार को संसद की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी. हालांकि, पहले कहा जा रहा था कि बीपीसीएल का निजीकरण करने को संसद की मंजूरी लेनी होगी.

निरसन एवं संशोधन कानून, 2016 के तहत 187 बेकार और पुराने कानूनों को समाप्त किया गया है. इसमें 1976 कानून भी शामिल है, जिसके जरिए पूर्ववर्ती बुरमाह शेल का राष्ट्रीयकरण किया गया था.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस कानून को समाप्त कर दिया गया है. ऐसे में बीपीसीएल की रणनीतिक बिक्री के लिए संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी.

सरकार घरेलू ईंधन खुदरा कारोबार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाना चाहती है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सके. इसी के मद्देनजर सरकार बीपीसीएल में अपनी समूची 53.3 प्रतिशत हिस्सेदारी रणनीतिक भागीदार को बेचने की तैयारी कर रही है.

बीपीसीएल के निजीकरण से घरेलू ईंधन खुदरा बिक्री कारोबार में काफी उथल-पुथल आ सकती है. वर्षों से इस क्षेत्र पर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का दबदबा है. इसके अलावा बीपीसीएल के निजीकरण से सरकार को 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य में से कम से कम एक-तिहाई प्राप्त करने में मदद मिलेगी.

चार अक्टूबर को बाजार बंद होने के समय बीपीसीएल का बाजार पूंजीकरण 1.11 लाख करोड़ रुपये था. बीपीसीएल में हिस्सेदारी बेचकर सरकार को 60,000 करोड़ रुपये तक प्राप्त हो सकते हैं. इसमें नियंत्रण तथा ईंधन बाजार प्रवेश प्रीमियम भी शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर, 2003 में व्यवस्था दी थी कि बीपीसीएल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) का निजीकरण संसद द्वारा कानून के संशोधन के जरिये ही किया जा सकता है. संसद में पूर्व में कानून पारित कर इन दोनों कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया गया था.

अधिकारियों ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट की इस शर्त को पूरा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि राष्ट्रपति ने निरसन एवं संशोधन कानून, 2016 को मंजूरी दे दी है और इस बारे में अधिसूचना जारी की जा चुकी है.

वहीं, एक जापानी स्टॉकब्रोकर नोमुरा रिसर्च के अनुसार, मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) बीपीसीएल में सरकार की 53.3 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए बोली लगा सकते हैं.

निवेशकों को भेजे गए नोट में नोमुरा ने कहा कि उन्हें लगता है कि सरकार का यह कदम केवल औपचारिकता पूरी करने की कवायद भर है. नोमुरा ने कहा कि रिलायंस रिफाइनिंग या केमिकल में भले ही अपनी हिस्से कम करना चाहती हो लेकिन वह बीपीसीएल में अपनी हिस्सेदारी खरीदने के लिए बोली लगा सकती है.

नोमुरा के नोट के अनुसार, बीपीसीएल की हिस्सेदारी खरीदने के बाद रिलायंस को 25 फीसदी बाजार हिस्सेदारी हासिल हो जाएगी. इसमें 3.4 करोड़ टन की अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता के साथ उसे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी पर अधिकार भी मिल जाएगा. इसके साथ ही कंपनी के करीब 15 हजार पेट्रोल पंपों के साथ ही रिलायंस को अपना कारोबार बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

pkv games bandarqq dominoqq pkv games parlay judi bola bandarqq pkv games slot77 poker qq dominoqq slot depo 5k slot depo 10k bonus new member judi bola euro ayahqq bandarqq poker qq pkv games poker qq dominoqq bandarqq bandarqq dominoqq pkv games poker qq slot77 sakong pkv games bandarqq gaple dominoqq slot77 slot depo 5k pkv games bandarqq dominoqq depo 25 bonus 25 bandarqq dominoqq pkv games slot depo 10k depo 50 bonus 50 pkv games bandarqq dominoqq slot77 pkv games bandarqq dominoqq slot bonus 100 slot depo 5k pkv games poker qq bandarqq dominoqq depo 50 bonus 50 pkv games bandarqq dominoqq