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दाराब फ़ारूक़ी

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गुजरात चुनाव सिर पर है और विकास अवकाश पर है

मेरे किसान भाइयों! तुम्हें तो अब ख़ुदकुशी भी करने की ज़रूरत नहीं है. सरकार आजकल तुम्हें ख़ुद गोली मार देती है. चलो इस बहाने ज़हर का ख़र्चा भी ख़त्म हुआ.

Jay Amit Shah3

गरीबी के पीछे टेक्निकल रीज़न हो या न हो पर कुछ की अमीरी के पीछे टेक्निकल रीज़न ज़रूर है

आपके हाथ की लकीरों में ही भारत की क़िस्मत की लकीर है. और जिस दिन भारत की क़िस्मत चमक गई, उस दिन हम सब भारतीयों की क़िस्मत एक साथ चमक जाएगी.

Mumbai: A view of the Elphinstone railway stations foot over bridge where a stampede took place, in Mumbai on Friday. PTI Photo by Shashank Parade (PTI9 29 2017 000133B)

सवा सौ करोड़ लोगों में 10-20 करोड़ की अगर ‘अमौत’ हो भी गई तो क्या ​फ़र्क़ पड़ता है?

भारत में हादसों का क्लास सिस्टम है. सैकड़ों बच्चे ऑक्सीजन की कमी से मर जाते हैं, सैकड़ों ट्रेन के डिब्बे पलटने से मर जाते हैं, बाढ़ में हज़ारों का मरना तो आम बात ही है.

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वो कौन लोग हैं जो एक निहत्थी महिला की हत्या का जश्न मना रहे हैं?

हमने बचपन से सुना था कि किसी की मौत के बारे में बुरा मत बोलो क्योंकि मरा आदमी अपनी सफाई नहीं दे सकता. पर ये लोग तो जैसे मरने का इंतज़ार कर रहे थे. ये कहां पले-बढ़े हैं, ये कहां से आते हैं?