Freedom Of Press

(सिद्धार्थ वरदराजन, द वायर का लोगो और इस्मत आरा)

उत्तर प्रदेशः अदालत ने द वायर के संपादक और रिपोर्टर की गिरफ़्तारी पर रोक लगाई

26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड के दौरान जान गंवाने वाले एक प्रदर्शनकारी के परिवार के दावों को लेकर द वायर की इस्मत आरा ने एक रिपोर्ट लिखी थी, जिसे ट्विटर पर साझा करने के बाद द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के ख़िलाफ़ रामपुर में एफ़आईआर दर्ज की गई थी.

(सिद्धार्थ वरदराजन, द वायर का लोगो और इस्मत आरा)

यूपी: सिद्धार्थ वरदराजन के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर में द वायर और रिपोर्टर का नाम भी शामिल

26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड के दौरान जान गंवाने वाले एक प्रदर्शनकारी के परिवार के दावों को लेकर द वायर की इस्मत आरा ने एक रिपोर्ट लिखी थी, जिसे ट्विटर पर साझा करने के बाद द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के ख़िलाफ़ रामपुर में एफआईआर दर्ज की गई थी.

(फोटो: द वायर)

पत्रकारों को निशाना बनाकर हमलों के मामले 2020 में बढ़े: रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स

रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स के रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जान गंवाने वाले पत्रकारों में से 68 प्रतिशत की जान संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों के बाहर गई. साल 2020 में पत्रकारों को निशाना बनाकर उनकी हत्या करने के मामलों में वृद्धि हुई और ये 84 प्रतिशत हो गए हैं.

(फोटो: पीटीआई)

अर्णब गोस्वामी बनाम अन्य: क्या सुप्रीम कोर्ट की नज़र में सभी नागरिक समान नहीं हैं?

हाल ही में रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को ज़मानत देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट एवं ज़िला न्यायालयों को निर्देश दिया कि वे बेल देने पर जोर दें, न कि जेल भेजने में. सवाल ये है कि क्या ख़ुद शीर्ष अदालत हर एक नागरिक पर ये सिद्धांत लागू करता है या फिर रसूख वाले और सत्ता के क़रीबी लोगों को ही इसका लाभ मिल पा रहा है?

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब की अंतरिम ज़मानत अवधि बढ़ाई, कहा बेल याचिकाओं पर विचार करें कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने अर्णब गोस्वामी मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट एवं ज़िला अदालतों को निर्देश दिया है कि लंबित ज़मानत याचिकाओं की समस्या का समाधान करने के लिए तत्काल क़दम उठाएं और इस संबंध में अपने फैसलों में जीवन एवं स्वतंत्रता के अधिकार को पर्याप्त महत्व दें.

Vendors arrange different vernacular newspaper before delivering it to customers during the nationwide lockdown in Guwahati. PTI Photo

विदेशी प्रकाशनों की ख़बरें प्रकाशित करने से पहले सत्यापित करें अख़बार: भारतीय प्रेस परिषद

25 नवंबर को जारी एक मीडिया एडवाइज़री में भारतीय प्रेस परिषद ने कहा कि स्रोत दिए जाने के बावजूद भारतीय अखबारों में प्रकाशित विदेशी अख़बारों के कंटेंट के लिए रिपोर्टर, संपादक और प्रकाशक को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.

(फोटो साभार: huffingtonpost.in)

सरकार की डिजिटल मीडिया के लिए नई एफ़डीआई नीति के बाद हफ़पोस्ट ने भारत में काम बंद किया

अमेरिका स्थित डिजिटल मीडिया कंपनी हफ़पोस्ट के भारतीय डिजिटल प्रकाशन हफ़पोस्ट इंडिया ने छह साल के बाद मंगलवार को भारत में अपना काम बंद कर दिया. इसके साथ ही उनमें कार्यरत 12 पत्रकारों की नौकरी भी चली गई.

शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक. (फोटो: फेसबुक/@sarnaikpratap)

अर्णब के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने वाले शिवसेना विधायक के यहां ईडी के छापे

शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्य सरकार के अन्य मंत्रियों के ख़िलाफ़ टिप्पणी के लिए रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया था. सरनाईक ने अभिनेत्री कंगना रनौत के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई के लिए भी विधानसभा में एक प्रस्ताव लाए जाने की मांग की थी.

online media

केंद्र ने डिजिटल मीडिया कंपनियों को एक महीने के भीतर एफ़डीआई नियमों का अनुपालन करने को कहा

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने विभिन्न न्यूज़ पोर्टल, वेबसाइट और न्यूज़ एजेंसियों को जारी किए गए नोटिस में कहा कि उन्हें एक महीने के भीतर निदेशकों व शेयरधारकों का नाम तथा पता के साथ कंपनी और उसकी शेयरधारिता की जानकारी देनी होगी.

(फोटो: द वायर)

मोदी सरकार प्रेस की आज़ादी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध, इसकी आवाज़ कुचलने वालों के ख़िलाफ़: अमित शाह

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत शीर्ष नेताओं ने स्वतंत्र प्रेस को ‘लोकतंत्र की आत्मा’ बताया और कहा कि प्रेस की आज़ादी पर किसी भी प्रकार का हमला राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदेह है और हर किसी को इसका विरोध करना चाहिए.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

ऑनलाइन सामग्री पर रोक लगाने संबंधी निर्देशों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त

लेखकों और निर्देशकों के एक तबके ने कहा है कि ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाए जाने के निर्णय से वैश्विक स्तर पर भारतीय कंटेंट क्रियेटरों को नुकसान हो सकता है. इससे निर्माताओं और यहां तक कि दर्शकों की रचनात्मक एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है.

दुष्यंत दवे. (फोटो साभार: मंथन संवाद)

वकील दुष्यंत दवे ने पत्र लिखकर पूछा, अर्णब गोस्वामी की याचिका पर तत्काल सुनवाई क्यों?

दुष्यंत दवे के इस पत्र पत्र अर्णब गोस्वामी की पत्नी ने भी पत्र लिखकर आरोप लगाया कि वह उन्हें निशाना बना रहे हैं. उन्होंने पत्रकार विनोद दुआ और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के मामलों का ज़िक्र करते हुए कहा कि ये मामले तत्काल सूचीबद्ध किए गए थे, लेकिन दुष्यंत दवे ने इन पर कोई टिप्पणी नहीं की थी.

अर्णब गोस्वामी. (फोटो: पीटीआई)

आत्महत्या के लिए उकसाने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब गोस्वामी को अंतरिम ज़मानत दी

इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि हम व्यक्तिगत आज़ादी को ध्वस्त करने के रास्ते पर हैं. इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने दो लोगों की आत्महत्या से जुड़े इस मामले में रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को ज़मानत देने से इनकार कर दिया था.

(फोटो: रॉयटर्स)

ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत लाए गए

ऑनलाइन समाचार पोर्टलों और कंटेंट प्रोवाइडरों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने के लिए केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी किया है. दिलचस्प यह है कि ऑनलाइन मंचों पर उपलब्ध समाचार व समसामयिक विषयों से संबंधित सामग्रियों को ‘प्रेस’ उपश्रेणी के तहत न रखकर ‘फिल्म’ उपश्रेणी के तहत रखा गया है.

अर्णब गोस्वामी को ले जाते पुलिसकर्मी. (फोटो साभार: रिपब्लिक/वीडियोग्रैब)

अर्णब गोस्वामी को राहत नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- ज़मानत के लिए निचली अदालत में जाएं

रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को 2018 में हुई एक इंटीरियर डिज़ाइनर की आत्महत्या से जुड़े मामले में चार नवंबर को उनके घर से गिरफ़्तार किया गया था, जिसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उन्हें और दो अन्य आरोपियों को 18 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.