ऑक्सीजन कांड: क्या डॉ. कफ़ील को घेरने के चक्कर में योगी सरकार ख़ुद घिरती जा रही है?

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुए ऑक्सीजन कांड में आरोपी डॉ. कफ़ील ख़ान के ख़िलाफ़ की जा रही जांच की रिपोर्ट बीते अप्रैल में मिलने के बाद सरकार अब तक कोई निर्णय नहीं ले सकी है. इसके अलावा बहराइच मामले में डॉ. कफ़ील ख़ान के ख़िलाफ़ जांच के लिए इसी महीने अधिकारी नामित किया गया है. यह दिखाता है कि डॉ. कफ़ील पर लगे आरोपों की तेज़ी से जांच कराने में ख़ुद सरकार को कोई रुचि नहीं है.

क्या गोरखपुर ऑक्सीजन कांड में डॉ. कफ़ील ख़ान को बलि का बकरा बनाया गया?

साल 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुए ऑक्सीजन कांड में आरोपी डॉ. कफ़ील ख़ान से संबंधित जांच रिपोर्ट आ गई है. रिपोर्ट के अनुसार, उन पर ऑक्सीजन की कमी की सूचना अधिकारियों को न देने और कर्तव्यों का पालन न करने के आरोप साबित नहीं हो पाए हैं.

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के छह में से चार एनस्थीसिया डॉक्टरों का इस्तीफा

मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर चारों डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया. ट्रामा सेंटर, इमरजेंसी, सर्जरी और आईसीयू सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित.

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में अक्टूबर के 15 दिनों में 231 बच्चों की मौत

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं का दौर जारी है. अगस्त महीने में बच्चों की मौतों को स्वभाविक बताने वाले यूपी सरकार के मंत्री अब इस बारे में चुप्पी साध गए हैं.

थाने में जन्माष्टमी मनाते मुख्यमंत्री और गोरखपुर में दम तोड़ते ‘गोपाल’

जन्माष्टमी पर योगी आदित्यनाथ के बयान ने सोचने के लिए मजबूर कर दिया. कंस की याद आई जिसने अपनी बहन देवकी की सभी संतानों को मार डाला था.

मीडिया बोल, एपिसोड 10: गोरखपुर में बच्चों की मौत और लोक स्वास्थ्य का सवाल

मीडिया बोल की 10वीं कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, टीवी पत्रकार अरफ़ा ख़ानम शेरवानी और द वायर हिंदी के कृष्णकांत के साथ गोरखपुर में बच्चों की मौत के मीडिया कवरेज पर चर्चा कर रहे हैं.

गोरखपुर में बच्चों को ऑक्सीजन की कमी ने नहीं, सरकारों ने मार डाला

जिस गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पर इंसेफलाइटिस पीड़ित बच्चों के इलाज की ज़िम्मेदारी है उसकी स्थिति देखकर कहा जा सकता है कि बच्चों की मौत से सरकारों को कोई फर्क नहीं पड़ता.