Maratha

Karad: Protestors from the Maratha community take part in a rally demanding reservation, in Karad, Maharashtra on Tuesday. Maratha outfits have called for a bandh in Maharashtra today, a day after a man demanding reservation for the community jumped to his death in a river in Aurangabad district. (PTI Photo)(PTI7_24_2018_000094B)

मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र बंद

आरक्षण की मांग को लेकर मराठा मोर्चा ने गुरुवार को एक बार फिर से महाराष्‍ट्र बंद का आह्वान किया है. बंद के चलते मुंबई, ठाणे, पुणे में स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी कर दी गई है.

Nanded: A protester is carried away after being injured during a protest rally demanding reservation for Marathis, in Nanded on Tuesday, July 24, 2018. Maratha outfits have called for a bandh in Maharashtra a day after of a protestor demanding reservation for the community jumped off a bridge over Godavari river and died, in Aurangabad. (PTI Photo) (Story no BOM12)(PTI7_24_2018_000217B)

मराठा आरक्षण आंदोलन में एक और प्रदर्शनकारी की मौत, सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समुदायों की ओर से बुलाए गए बंद में बुधवार को हुई हिंसा में घायल एक व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उसने दम तोड़ दिया है.

Nanded: A protester is carried away after being injured during a protest rally demanding reservation for Marathis, in Nanded on Tuesday, July 24, 2018. Maratha outfits have called for a bandh in Maharashtra a day after of a protestor demanding reservation for the community jumped off a bridge over Godavari river and died, in Aurangabad. (PTI Photo) (Story no BOM12)(PTI7_24_2018_000217B)

एक व्यक्ति की आत्महत्या के बाद मराठा आंदोलन हुआ हिंसक, एक कॉन्स्टेबल की मौत

महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर मंगलवार को दो अन्य युवकों ने भी जान देने की कोशिश की. बुधवार को मुंबई बंद रखने का आह्वान. औरंगाबाद के ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद.

anglo-maratha War Wikipedia

भीमा-कोरेगांव युद्ध को याद करने वाले किस आधार पर ‘देशद्रोही’ सिद्ध किए जा रहे हैं?

जो लोग भीमा-कोरेगांव युद्ध की याद में आयोजित समारोह के आयोजकों को राष्ट्रद्रोही सिद्ध कर रहे हैं वो यह क्यों छुपा ले जाते हैं कि न जाने कितनी बार मराठों ने भी अंग्रेज़ों के साथ मिलकर अन्य राज्यों के ख़िलाफ़ लड़ाइयां लड़ी हैं.

भीमा-कोरेगांव में बना विजय स्तंभ. भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने जीत दर्ज की थी. इसकी याद में कंपनी ने विजय स्तंभ का निर्माण कराया था, जो दलितों का प्रतीक बन गया. कुछ विचारक और चिंतक इस लड़ाई को पिछड़ी जातियों के उस समय की उच्च जातियों पर जीत के रूप में देखते हैं. हर साल 1 जनवरी को हजारों दलित लोग श्रद्धाजंलि देने यहां आते हैं. (फोटो साभार: विकीपीडिया)

भीमा-कोरेगांव युद्ध को सिर्फ़ जाति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए

जब आंबेडकर ने भीमा कोरेगांव युद्ध को पेशवाओं के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ महारों के संघर्ष के रूप में पेश किया, तब वे असल में एक मिथक रच रहे थे.