NCR

(फोटो: रॉयटर्स)

धुंध में डूबे एक शहर के नाम…

अंग्रेज़ी के कवि पीबी शैली की एक कविता में उनका नायक मरने के बाद जब नर्क पहुंचता है तो पाता है कि नर्क तो बिल्कुल लंदन जैसा है. जो कुछ भी लंदन में मिल सकता है वह सब वहां है. उसकी पहचान, उसकी बेतहाशा आबादी और धुआं… राजधानी है इसलिए वहां राजा है, न्यायालय है और जैसा कि राजधानियों में होता है ख़याली पुलाव के रूप में क्रांति की बातें हैं. एक सदी पहले लिखी गई इस कविता का यह शहर अब हमारे देश की राजधानी में तब्दील हो गया है.

New Delhi: A boy wearing pollution mask burns crackers during Diwali celebrations, in New Delhi, Wednesday, Nov. 07, 2018. According to the officials, Delhi recorded its worst air quality of the year the morning after Diwali as the pollution level entered 'severe-plus emergency' category due to the rampant bursting of toxic firecrackers. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI11_8_2018_000023B)

दिवाली पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश धुआं-धुआं, प्रदूषण अत्यंत गंभीर और आपातकालीन श्रेणी में पहुंचा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने के संबंध में दिल्ली पुलिस ने 562 एफआईआर दर्ज किए और 323 लोगों को गिरफ़्तार किया. आग लगने से दो लोगों की मौत. कोर्ट ने रात आठ से 10 बजे के बीच पटाखे जलाने का आदेश दिया था.

Delhi-World Trade Centre Photo NBCC

दिल्ली के पुनर्विकास के लिए मिली पर्यावरणीय अनुमतियां कई सवाल खड़े करती हैं

परियोजना को मिली स्वीकृतियां स्पष्ट दिखाती हैं कि इसके लिए गुड गवर्नेंस के कई सिद्धांतों से समझौता किया गया है.

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दिल्ली में हरे पेड़ों की कटाई का हल नए पौधे लगाना नहीं है

हरे पेड़ों को काटने के एवज में नए पेड़ लगाना ऐसी एजेंसियों का पसंदीदा हथियार है, जो समाज और पर्यावरण को बड़े पैमाने पर नुकसान की कीमत पर भी विकास को बढ़ावा देना चाहती हैं. उनका मानना है कि पारिस्थितिकी बदलना शहरी विकास के वर्तमान तरीकों को बदलने से ज़्यादा आसान है.