पत्रकारों के 90 फीसदी हत्यारों को दोषी क़रार नहीं दिया गया: यूनेस्को

यूनेस्को ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दो वर्ष में 55 फीसदी पत्रकारों की हत्या संघर्ष रहित क्षेत्रों में हुई जो राजनीति, अपराध और भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों को निशाना बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को दिखाता है.

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(फोटो: द वायर)

यूनेस्को ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दो वर्ष में 55 फीसदी पत्रकारों की हत्या संघर्ष रहित क्षेत्रों में हुई जो राजनीति, अपराध और भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों को निशाना बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को दिखाता है.

(फोटो: द वायर)
प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: द वायर)

लंदन: पिछले दो वर्ष में 55 फीसदी पत्रकारों की हत्या संघर्ष रहित क्षेत्रों में हुई जो राजनीति, अपराध और भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों को निशाना बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को दिखाता है. यूनेस्को ने एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है.

यूनेस्को ने बताया कि 2006 से 2018 तक दुनिया भर में 1,109 पत्रकारों की हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों में से करीब 90 फीसदी को दोषी करार नहीं दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों (2017-2018) में 55 फीसदी पत्रकारों की मौत संघर्ष रहित क्षेत्रों में हुई.

यह रिपोर्ट पत्रकारों की हत्याओं की प्रवृत्ति में आये बदलाव को दिखाती है जिन्हें अक्सर राजनीति, अपराध और भ्रष्टाचार पर उनकी रिपोर्टिंग के लिए निशाना बनाया जाता है.

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आयी है जब दो नवंबर को पत्रकारों के खिलाफ अपराधों के लिए दंडमुक्ति को खत्म करने का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों के लिए काम करने के लिहाज से अरब देश सबसे खतरनाक हैं जहां 30 फीसदी हत्याएं हुई. इसके बाद लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र (26 फीसदी) और एशिया तथा प्रशांत देश (24 फीसदी) आते हैं.

यूनेस्को ने पिछले साल इतनी ही अवधि के मुकाबले 2019 में पत्रकारों की कम हत्याएं दर्ज की हैं.