आसू ने मोदी, शाह और सोनोवाल पर लोगों को भ्रमित करने का आरोप लगाया

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के प्रमुख सलाहकार समज्जुल भट्टाचार्य ने विवादित नागरिकता कानून के खिलाफ महिला रैली को संबोधित करते हुए दावा किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल असम के लोगों को विशिष्ट फार्मूले से मूल लोगों को बचाने और साथ ही बांग्लादेशियों को सीएए के जरिए बसाने की नीति से धोखा दे रहे हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और गृहमंत्री अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के प्रमुख सलाहकार समज्जुल भट्टाचार्य ने विवादित नागरिकता कानून के खिलाफ महिला रैली को संबोधित करते हुए दावा किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल असम के लोगों को विशिष्ट फार्मूले से मूल लोगों को बचाने और साथ ही बांग्लादेशियों को सीएए के जरिए बसाने की नीति से धोखा दे रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और गृहमंत्री अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और गृहमंत्री अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल पर आरोप लगाया कि वे विवादित नागरिकता कानून के पीछे यहां बसे बांग्लादेशियों से उनकी पहचान, भाषा और जमीन को सुरक्षित रखने की दलील देकर लेकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं.

आसू के प्रमुख सलाहकार समज्जुल भट्टाचार्य ने सीएए के खिलाफ महिला रैली को संबोधित करते हुए दावा किया तीनों नेता असम के लोगों को विशिष्ट फार्मूले से मूल लोगों को बचाने और साथ ही बांग्लादेशियों को सीएए के जरिये बसाने की नीति से धोखा दे रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘हमें उनका (भाजपा) विलक्षण फार्मूला समझ नहीं आ रहा. एक ओर वह कहते हैं कि असमी लोगों की भाषा, पहचान और जमीन सुरक्षित है, दूसरी ओर सीएए के जरिए बांग्लादेशियों को लाएंगे जो मूल निवासियों के लिए खतरा हैं.’

आसू अध्यक्ष दीपांकन कुमार नाथ ने कहा कि मोदी सरकार सीएए के जरिये दिसंबर 2014 तक राज्य में आए बांग्लादेशियों को रखने की बात कर लोगों को भ्रमित कर रही हैं और गलतफहमी पैदा कर रही है जबकि 1985 में असम समझौते के तहत 26 मार्च 1971 के बाद आए बांग्लादेशियों को बाहर रखने की व्यवस्था है.

उन्होंने कहा, ‘असम समझौते के तहत हमने देश की ओर से अपने छोटे से राज्य पर अवैध विदेशियों के बोझ को सहा, लेकिन अब सीएए के जरिये दिसंबर 2014 तक के बोझ को सह नहीं सकते.’

नाथ ने कहा, ‘हमने अब तक असम में सभी अवैध अप्रवासियों को सभी सुविधाएं दी हैं, लेकिन हम उन्हें अपने राज्य में चुनाव लड़ने नहीं देंगे.’

संशोधित नागरिकता कानून से असम में बहुत कम बांग्लादेशियों को लाभ होने के सोनोवाल के दावे का संदर्भ देते भट्टाचार्य ने कहा, ‘ अगर यह संख्या बहुत कम है तो वह (सोनोवाल) मोदी और शाह से कहें कि उन्हें असम से ले जाकर गुजरात में बसा दें. अगर संख्या कम है तो गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से केवल एक ट्रेन से उन्हें ले जाया जा सकता है.’

आसू के महासचिव लुरिंगज्योति गोगोई ने रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि मोदी सरकार सीएए ‘ सांप्रदायिक एजेंडे’ के लिए लाई है.

उन्होंने कहा, ‘यह कानून विध्वंसक है क्योंकि बड़ी संख्या में बांग्लादेशी असम में बस जाएंगे और जनसांख्यिकी बदल जाएगी, जिससे असमी लोगों का अस्तित्व प्रभावित होगा, इसके अलावा असमी भाषा के स्थान पर बंगाली का प्रभुत्व हो जाएगा.

गोगोई ने कहा, ‘बांग्लादेशियों ने हमारी जमीन में घुसपैठ की, उन्होंने हमारी नौकरियां और राजनीतिक अधिकार छीन लिया. हम एक भी बांग्लादेशी को स्वीकार नहीं करेंगे, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान.’