देश में आशा कार्यकर्ताओं पर हमले जारी, गुजरात में आरोपी गिरफ़्तार

गुजरात के मेहसाणा ज़िले में कोरोना वायरस के लक्षणों को जांचने गई एक आशा कार्यकर्ता से बदसलूकी की गई, वहीं हरियाणा के फरीदाबाद में एनआरसी के लिए डेटा इकट्ठा करने का आरोप लगाते हुए आशा कार्यकर्ताओं की एक टीम के साथ मारपीट की गई.

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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन. (फाइल फोटो: पीटीआई)

गुजरात के मेहसाणा ज़िले में कोरोना वायरस के लक्षणों को जांचने गई एक आशा कार्यकर्ता से बदसलूकी की गई, वहीं हरियाणा के फरीदाबाद में एनआरसी के लिए डेटा इकट्ठा करने का आरोप लगाते हुए आशा कार्यकर्ताओं की एक टीम के साथ मारपीट की गई.

(फोटो: पीटीआई)
(फोटो: पीटीआई)

कोरोना संक्रमण के बीच काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की घटनाएं इस बारे में नया और कड़ा कानून बनने के बावजूद रुकी नहीं हैं.

गुजरात के मेहसाणा जिले में कथित तौर पर आशा कार्यकर्ता पर हमला करने के आरोप में एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी कमलेश पटेल को महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश 2020 के तहत गिरफ्तार किया गया है.

केंद्र सरकार ने बुधवार को इस अध्यादेश को मंजूरी दी थी. यह अध्यादेश कोरोना वायरस की रोकथाम में लगे स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की घटनाओं को रोकने के लिए लागू किया गया है.

मेहसाणा में यह घटना उस समय हुई, जब आशा कार्यकर्ता बलोल गांव में लोगों में कोरोनावायरस के लक्षणों की जांच की ड्यूटी पर थीं.

मेहसाणा के पुलिस अधीक्षक मनीष सिंह ने बताया, ‘आरोपी ने आशा कार्यकर्ता को रास्ते में रोक लिया और उससे पूछा कि उसे दवा क्यों नहीं दी गई. इस पर आशा कार्यकर्ता ने उससे जानना चाहा कि क्या उसे कोई बीमारी थी. इस पर भी आरोपी उससे झगड़ता रहा और उसे जबरन अपनी कार में धकेलने की कोशिश करता रहा.’

उन्होंने आगे बताया, ‘आरोपी ने कथित तौर पर पीड़िता के लिए जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया. उस पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है.’

जिले के संथाल पुलिस थाने ने आईपीसी की धारा 354 और अन्य संबद्ध धाराओं, आपदा प्रबंधन अधिनियिम और हाल ही में संशोधित महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश 2020 के तहत मामला दर्ज किया है.

वहीं, फरीदाबाद में कोरोना संक्रमण से जुड़े एक डोर टू डोर सर्वे के दौरान भी एक आशा कार्यकर्ता के साथ मारपीट का मामला सामने आया.

एक व्यक्ति और उनके तीन बेटों द्वारा आशा कार्यकर्ता साजिदा और उनके पति से मारपीट की गई. इस दौरान दंपति के साथ मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने पास के एक घर में छिपकर जान बचाई.

यह घटना गुरुवार को फरीदाबाद के लुहिंगा कलां गांव में दोपहर लगभग एक बजे हुई. पुलिस का कहना है कि आरोपी जान मोहम्मद और उनके बेटे घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो गए.

आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत पुनहाना पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है.

जांचकर्ता अधिकारी एएसआई देवी सिंह का कहना है, ‘हम आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए जांच कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि हम उन्हें एक से दो दिन में पकड़ लेंगे.’

साजिदा ने बताया कि आरोपियों ने उन पर और उनके साथियों पर राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के लिए डेटा इकट्ठा करने का आरोप लगाते हुए डंडों से मारपीट करनी शुरू कर दी.

साजिदा ने कहा, ‘इस सर्वे के लिए तीन लोगों की टीम बनाई गई थी. वार्ड पंच, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता. मैं अपनी टीम के साथ वहां गई थी.’

उनका कहना है, ‘ इस बीच एक परिवार के सदस्यों ने हमें जानकारी देने से इनकार कर दिया. पहले उन्होंने हमसे बहस की और फिर हमारे कागज छीन लिए. उन्होंने हमसे मारपीट की. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एक पड़ोसी के घर में छिप गई…  उन्होंने मुझे और मेरे पति को पीटा।’

साजिदा ने कहा, ‘उस इलाके में मेरे ससुर का एक होटल है. वह शोर सुनकर मौके पर पहुंचे लेकिन इन लोगों ने उनसे भी मारपीट की. हम बड़ी मुश्किल से वहां से बचकर निकले और एक शख्स के घर में पनाह ली. मैंने अपने सुपरवाइजर को इसकी जानकारी दी, जिन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी.’

फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर केके राव ने बताया है कि जो भी शख्स आशा कार्यकर्ताओं से दुर्व्यवहार करता पाया जाएगा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.