राजनीति

कांग्रेस नेता सैफ़ुद्दीन सोज़ की नज़रबंदी पर केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने सैफ़ुद्दीन सोज़ की नज़रबंदी को चुनौती देने वाली उनकी पत्नी की याचिका पर सुनवाई की. केंद्र सरकार द्वारा पांच अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद से ही सैफ़ुद्दीन सोज़ अपने घर में नज़रबंद हैं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफ़ुद्दीन सोज़. (फोटो साभार: फेसबुक)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफ़ुद्दीन सोज़. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफ़ुद्दीन सोज़ की नजरबंदी मामले में केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया है.

केंद्र सरकार द्वारा पांच अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद से ही सैफ़ुद्दीन सोज़ अपने घर में नजरबंद हैं.

सैफ़ुद्दीन सोज़ की पत्नी मुमताजुन्निसा ने अपने पति की नजरबंदी को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है.

मुमताजुन्निसा ने इस याचिका में अपने पति सैफ़ुद्दीन सोज़ को घर में ही नजरबंद रखने के आदेश को निरस्त करने और उन्हें (सोज़) अदालत में पेश करने का आदेश देने का अनुरोध किया है.

जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुमताजुन्निसा की याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के दौरान केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किए.

केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर प्रशासन को जुलाई के दूसरे सप्ताह तक नोटिस का जवाब देने को कहा गया है.

कांग्रेस के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सोज़ की नजरबंदी अवैध है और बिना की दस्तावेजी कार्रवाई के ही उन्हें नजरबंद किया गया है.

सिंघवी ने कहा, ‘सोज़ कानून का पालन करने वाले शांतिपूर्ण भारतीय नागरिक हैं. उन्होंने शांति का कोई उल्लंघन नहीं किया है, न ही सार्वजनिक शांति भंग की है. हालांकि फिर भी सोज़ को हिरासत में लिया गया है और वह अगस्त 2019 से ही घर में नजरबंद हैं.’

याचिका में कहा गया है कि नजरबंदी के बाद से अभी तक उन्हें इसके कारणों की जानकारी नहीं दी गई और यही वजह है कि वे जम्मू कश्मीर जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत इस गिरफ्तारी को चुनौती देने में असमर्थ रहे हैं.

याचिका में कहा गया है कि सैफ़ुद्दीन सोज़ की नजरबंदी और गिरफ्तारी के कारणों की आज तक जानकारी नहीं दी गई, जिससे उनकी नजरबंदी न केवल गैरकानूनी, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक है, बल्कि बेहद निराशाजनक भी हैं.

बता दें कि केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने संबंधी संविधान के अनुच्छेद 370 के अनेक प्रावधानों को पांच अगस्त को समाप्त कर दिया था. इसके साथ ही जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उनके बेटे एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सहित अनेक नेताओं को घरों में ही नजरबंद कर दिया गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)