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16 दिन में पेट्रोल के दाम में 8.30 और डीज़ल के दाम में 9.46 रुपये प्रति ​लीटर की वृद्धि

इस वृद्धि से डीज़ल के दाम जहां नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं, वहीं पेट्रोल के दाम भी दो साल की ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं. तेल कंपनियों ने अप्रैल, 2002 में पेट्रोल-डीज़ल के दाम में हर पखवाड़े बदलाव करने की शुरुआत की थी. उसके बाद से किसी पखवाड़े में दाम में यह सबसे बड़ी वृद्धि है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: तेल कंपनियों ने सोमवार को लगातार 16वें दिन पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ा दिए. पेट्रोल के दाम में सोमवार को 33 पैसे और डीजल के दाम में 58 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई. इस वृद्धि के बाद खुदरा दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए.

ताजा वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल का दाम 79.23 रुपये से बढ़कर 79.56 रुपये और डीजल का दाम 78.27 रुपये से बढ़कर 78.55 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया.

तेल विपणन कंपनियों की जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है. तेल कंपनियां देशभर में एक साथ दाम बढ़ाती हैं, लेकिन राज्यों में इन पर अलग दर से लगने वाले बिक्री कर अथवा मूल्य वर्धित कर (वैट) की वजह से खुदरा दाम अलग-अलग होते हैं.

पिछले 16 दिनों से दोनों ईंधनों के खुदरा दाम में लगातार वृद्धि की जा रही है. इस दौरान पेट्रोल के दाम कुल मिलाकर 8.30 रुपये और डीजल के दाम में 9.46 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है.

अप्रैल 2002 में पेट्रोल और डीजल के दाम नियंत्रणमुक्त किए जाने के बाद किसी एक पखवाड़े में यह सबसे बड़ी वृद्धि है.

तेल कंपनियों ने अप्रैल, 2002 में पेट्रोल और डीजल के दाम में हर पखवाड़े बदलाव करने की शुरुआत की थी. ये दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के अनुरूप किए जाते हैं.

उसके बाद से किसी एक पखवाड़े में इनके दाम में यह सबसे बड़ी वृद्धि हुई है. कंपनियों ने मई 2017 से पेट्रोल और डीजल के दाम में दैनिक बदलाव की शुरुआत की.

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इससे पहले किसी एक पखवाड़े में सबसे ज्यादा चार से पांच रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई है. लेकिन इस बार बीते पखवाड़े में पेट्रोल के दाम 8.30 रुपये और डीजल के दाम में 9.46 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि हो चुकी है.

कोरोना वायरस और उसके चलते लागू किए गए लॉकडाउन के दौरान 82 दिनों तक तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया. उसके बाद 7 जून से दाम में उनकी अंतरराष्ट्रीय लागत के अनुरूप बदलाव किया जाने लगा.

इसके बाद पिछले लगातार 16 दिन से दाम बढ़ने का सिलसिला जारी है. इस वृद्धि से डीजल के दाम जहां नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं, वहीं पेट्रोल के दाम भी दो साल की ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं.

मौजूदा वृद्धि से पहले 16 अक्टूबर, 2018 को डीजल का दाम दिल्ली में 75.69 रुपये प्रति लीटर की ऊंचाई को छू चुका है वहीं, पेट्रोल के दाम इससे पहले 4 अक्टूबर, 2018 को 84 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुके हैं.

पेट्रोल के मौजूदा दाम में करीब दो तिहाई हिस्सा विभिन्न करों का शामिल है. पेट्रोल के दाम में 32.98 रुपये केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और 17.71 रुपये प्रति लीटर स्थानीय कर अथवा वैट शामिल है. इसी प्रकार डीजल के दाम में 63 प्रतिशत से अधिक करों का हिस्सा है. इसमें 31.83 रुपये प्रति लीटर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और 17.60 रुपये प्रति लीटर वैट का हिस्सा है.

सरकार ने जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिर रहे थे ,तब 14 मार्च को पेट्रोल और डीजल दोनों पर उत्पाद शुल्क में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी. इसके बाद पांच मई को फिर से पेट्रोल पर रिकॉर्ड 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया.

इससे सरकार को सालाना आधार पर दो लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा. इस दौरान तेल कंपनियों ने उत्पाद शुल्क वृद्धि का बोझ हालांकि, उपभोक्ताओं पर नहीं डाला बल्कि बढ़े उत्पाद शुल्क को अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट के साथ समायोजित कर दिया.

उल्लेखनीय है कि अप्रैल-मई के दौरान जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन चल रहा था, कच्चे तेल के दाम दो दशक के निम्न स्तर तक गिर गए थे, लेकिन जून की शुरुआत से आर्थिक गतिविधियां शुरू होने के बाद मांग बढ़ने से कच्चे तेल के दाम धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं. यही वजह है कि तेल कंपनियां भी उसी वृद्धि के अनुरूप दाम बढ़ा रही हैं.

पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा है, ‘देश के इतिहास की सबसे खराब आर्थिक अवधि के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमत में लगातार 16 दिन वृद्धि. केवल भाजपा ही इस तरह क्रूर हो सकती है.’

बता दें कि हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसे ‘असंवेदनशील’ करार दिया था और प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि कोरोना महामारी के समय लोगों की परेशानी को बढ़ाने वाली इस वृद्धि को वापस लिया जाए.

सोनिया ने कहा था, ‘मौजूदा कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई के दौरान भारत को स्वास्थ्य संबंधी, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. मुझे इस बात की पीड़ा है कि ऐसे मुश्किल समय में सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का असंवेदनशील निर्णय लिया.’

उससे पहले मई महीने में केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये लीटर बढ़ा दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)