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मध्य प्रदेश: रिलायंस पावर की सासन परियोजना बंद करने के लिए एनजीटी में याचिका

रिहंद सरोवर में औद्योगिक कचरा डाले जाने के कारण मध्य प्रदेश के सिंगरौली स्थित इस परियोजना के ख़िलाफ़ याचिका दायर की गई है. कहा गया है कि इस साल अप्रैल में ऐश डैम टूटने से संयंत्र से निकलने वाली राख आसपास के खेतों में फैल गई. इससे कथित तौर पर छह ग्रामीणों की मौत हो गई, जिसमें तीन नाबालिग भी शामिल थे.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में रिलायंस पावर की मध्य प्रदेश स्थित ‘सासन अति वृहद बिजली परियोजना’ (यूएमपीपी) को बंद करने और उसकी पर्यावरण मंजूरियां रद्द करने के लिए याचिका दायर की गई है.

रिहंद सरोवर में जान-बूझकर औद्योगिक कचरा डाले जाने के कारण मध्य प्रदेश के सिंगरौली स्थित इस परियोजना के खिलाफ याचिका दायर की गई है.

अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे ने अपनी याचिका में 10 अप्रैल, 2020 की एक घटना का जिक्र भी किया है. इस दिन परियोजना से निकलने वाली राख इकाई के ‘लापरवाह रवैये’ को दिखाती है.

याचिका में कहा गया है कि इस लापरवाही से संयंत्र से निकलने वाली राख आसपास के खेतों में फैल गई. इससे कथित तौर पर छह ग्रामीणों की मौत हो गई, जिसमें तीन नाबालिग भी शामिल थे. वहीं रिहंद सरोवर में राख के कीचड़ की वजह से पशुधन की भी हानि हुई थी. दरअसल संयंत्र का ऐश डैम टूटने से यह हादसा हुआ था.

याचिका में कहा गया है कि इस राख की वजह से पानी में कई हानिकारक रसायन मिल गए जो आसपास के लोगों के लिए ट्यूमर और अन्य कई स्वास्थ्य बीमारियों का कारण बन सकते हैं.

याचिका में एनजीटी से गोविंद वल्लभ पंत सागर या रिहंद सरोवर, जल संसाधनों, गांवों, पीने के पानी के कुंओं और खेतों से सभी औद्योगिक अपशिष्ट हटाने की अपील की गई है.

याचिका में एनजीटी से मांग की गई है कि वह उद्योगों द्वारा औद्योगिक कचरों के निस्तारण के लिए आवश्यक दिशानिर्देश तैयार करने और इस संबंध में उचित जांच के लिए हस्तक्षेप करे.

सिंगरौली में हुई इसी तरह की एक अन्य घटना में 6 अक्टूबर, 2019 को नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) विंध्याचल परियोजना का सबसे पुराना फ्लाई ऐश (थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख) बांध अचानक फूट गया था. इसके कारण रिहंद सरोवर में 35 लाख मीट्रिक टन से अधिक फ्लाई ऐश गिरा था.

एक रिपोर्ट के अनुसार, सिंगरौली में कुल ताप बिजलीघरों की संख्या 10 है. देश भर के लिए बिजली पैदा करने वाले इस इलाके में कुल 21,000 मेगावॉट बिजली उत्पादित की जाती है. इसके लिए साल भर में कोई 10.3 करोड़ टन कोयले की खपत होती है. इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की खपत से हर साल तकरीबन 3.5 करोड़ टन फ्लाई ऐश (राख) पैदा होती है, जिसका पर्याप्त इस्तेमाल हो नहीं पा रहा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)