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दिल्ली में पेट्रोल दो साल में पहली बार 80 रुपये प्रति लीटर के पार, डीज़ल के दाम भी बढ़े

शुक्रवार को डीज़ल की कीमतों में जहां लगातार 20वें दिन बढ़ोतरी हुई है, वहीं तीन सप्ताह से भी कम समय में पेट्रोल के दाम 19 बार बढ़ाए गए हैं. सात जून से पेट्रोल 8.87 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल 10.80 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दाम दो साल में पहली बार 80 रुपये प्रति लीटर के पार हो गए हैं. पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने शुक्रवार को एक बार फिर से पेट्रोल और डीजल कीमतों में बढ़ोतरी की.

पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की कीमतों को लेकर अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल कीमतों में जहां 21 पैसे प्रति लीटर की और बढ़ोतरी की गई है, वहीं डीजल के दाम 17 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए हैं.

दिल्ली में अब पेट्रोल का दाम 79.92 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 80.13 रुपये प्रति लीटर हो गया है. वहीं डीजल कीमतें 80.02 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 80.19 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं.

वाहन ईंधन के दाम देशभर में बढ़ाए गए हैं, लेकिन स्थानीय बिक्रीकर या मूल्यवर्धित कर (वैट) की वजह से विभिन्न राज्यों में इनकी कीमतों में अंतर होता है.

मुंबई में पेट्रोल का दाम 86.91 रुपये प्रति लीटर और डीजल 78.51 रुपये प्रति लीटर हो गया है.

दिल्ली में पेट्रोल कीमतें दो साल में पहली बार 80 रुपये प्रति लीटर के पर निकली हैं. वहीं डीजल के दाम इस समय अपने सर्वकालिक उच्चस्तर पर हैं.

सितंबर, 2018 में पेट्रोल के दाम 80 रुपये प्रति लीटर हो गया था. शुक्रवार को डीजल की कीमतों में जहां लगातार 20वें दिन बढ़ोतरी हुई है, वहीं तीन सप्ताह से भी कम समय में पेट्रोल के दाम 19 बार बढ़ाए गए हैं.

सात जून से पेट्रोल 8.87 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है. वहीं इस दौरान डीजल कीमतों में 10.80 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है.

मौजूदा वृद्धि से पहले 16 अक्टूबर, 2018 को डीजल का दाम दिल्ली में 75.69 रुपये प्रति लीटर की ऊंचाई को छू चुका है वहीं, पेट्रोल के दाम इससे पहले 4 अक्टूबर, 2018 को 84 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुके हैं.

पेट्रोल के मौजूदा दाम में करीब दो तिहाई हिस्सा विभिन्न करों का शामिल है. पेट्रोल के दाम में 32.98 रुपये केंद्रीय उत्पाद शुल्क और 17.71 रुपये प्रति लीटर स्थानीय कर अथवा वैट शामिल है. इसी प्रकार डीजल के दाम में 63 प्रतिशत से अधिक करों का हिस्सा है. इसमें 31.83 रुपये प्रति लीटर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और 17.60 रुपये प्रति लीटर वैट का हिस्सा है.

सरकार ने जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिर रहे थे, तब 14 मार्च को पेट्रोल और डीजल दोनों पर उत्पाद शुल्क में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी. इसके बाद पांच मई को फिर से पेट्रोल पर रिकॉर्ड 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया.

इससे सरकार को सालाना आधार पर दो लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा. इस दौरान तेल कंपनियों ने उत्पाद शुल्क वृद्धि का बोझ हालांकि, उपभोक्ताओं पर नहीं डाला बल्कि बढ़े उत्पाद शुल्क को अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट के साथ समायोजित कर दिया.

उल्लेखनीय है कि अप्रैल-मई के दौरान जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन चल रहा था, कच्चे तेल के दाम दो दशक के निम्न स्तर तक गिर गए थे, लेकिन जून की शुरुआत से आर्थिक गतिविधियां शुरू होने के बाद मांग बढ़ने से कच्चे तेल के दाम धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं. यही वजह है कि तेल कंपनियां भी उसी वृद्धि के अनुरूप दाम बढ़ा रही हैं.

बीते मई महीने में केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये लीटर बढ़ा दिया था.

पेट्रोल और डीजल की मूल्य वृद्धि को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर हमला बोल रही है.

एक दिन पहले जब डीजल के दाम में लगातार 19वें दिन बढ़ोतरी की गई तो पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों को लेकर कांग्रेस ने एक ट्वीट किया था, जिसमें बताया गया था कि भाजपा का ध्यान सिर्फ लाभ कमाने में हैं. पार्टी ने एक तस्वीर साझा करते हुए कहा है कि साल 2014 के बाद से पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में 258 प्रतिशत और डीजल के दाम में 820 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है.

कांग्रेस ने कहा था, ‘भाजपा सरकार ने हर भारतीय का जीवन सुधारने का वादा किया था, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं दूर हैं. सरकार ने मामलों को सिर्फ खराब किया है.’

बीते 23 जून को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था था कि कोरोना संकट और इसके बाद की स्थिति से निपटने में सरकार पूरी तरह विफल रही है और इन सबके बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि कर लोगों की पीड़ा बढ़ा रही है.

इससे पहले सोनिया गांधी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसे ‘असंवेदनशील’ करार दिया था और प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि कोरोना महामारी के समय लोगों की परेशानी को बढ़ाने वाली इस वृद्धि को वापस लिया जाए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)