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असम राइफल्स के नियंत्रण को लेकर 12 हफ़्तों में फ़ैसला करे केंद्र सरकार: दिल्ली हाईकोर्ट

असम राइफल्स पर पूर्ण नियंत्रण को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच विवाद है. गृह मंत्रालय चाहता है कि उसे पूरा नियंत्रण मिले, लेकिन भारतीय सेना इसके विरोध में है. वर्तमान में पूर्वोत्तर में तैनात असम राइफल्स का प्रशासनिक नियंत्रण गृह मंत्रालय के पास है और ऑपरेशनल कंट्रोल सेना के पास है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्लीः दिल्ली हाईकोर्ट ने असम राइफल्स पर दोहरे नियंत्रण की संरचना पर फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार को 12 हफ्ते का समय दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत का कहना है कि केंद्र सरकार 12 हफ्तों के भीतर फैसला कि क्या असम राइफल्स पर केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के दोहरे नियंत्रण को हटा दिया जाए या फिर इसे बरकरार रखा जाए.

मौजूदा समय में असम राइफल्स पर केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय दोनों का नियंत्रण है.

यह मामला लगभग तीन सालों से लंबित होने को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के विशेष नियंत्रण के तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल को बनाए रखने के लिए सैद्धांतिक फैसला लिाय गया है लेकिन अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया.

जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ और जस्टिस आशा मेनन की पीठ ने कहा, ‘इस मामले में सैनिक/पूर्व सैनिक शामिल हैं, जिनका हित न सिर्फ सर्वोपरि है बल्कि सरकार के विभिन्न मंचों से इन्हें सर्वोच्च भी घोषित किया गया है. जब भी इस तरह के सर्वोपरि फैसले लेने की जरूरत होती है तो इसमें किसी तरह की देरी नहीं करनी चाहिए.’

अदालत ने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, दोनों मंत्रालयों के सचिवों, सेनाध्यक्ष, असम राइफल्स के महानिदेशक और इसमें शामिल अन्य लोगों को तय समयावधि के भीतर फैसला लेने का अनुरोध किया है.

मालूम हो कि असम राइफल्स पूर्व सैनिक कल्याण संघ की ओर से दायर याचिका पर अदालत में यह बात कही गई है. याचिका में असम राइफल्स के सैनिकों के अधिकारों के उल्लंघन के रूप में दोहरे नियंत्रण का आरोप लगाया गया है.

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को तय करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एसके शाही को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि समय-समय पर बैठकें होनी चाहिए ताकि किसी फैसले पर पहुंचा जा सके.

आदेश में कहा गया, ‘हमें उम्मीद है कि याचिकाकर्ता की मांग के अनुरूप फैसला लिए जाएगा या सुनवाई की अगली तारीख तक हमारे समक्ष इसके विरोध में हलफनामा दायर किया जाएगा. ‘

आदेश में कहा गया कि अगर अगली तारीख तक कोई फैसला नहीं लिया जाता है तो एसके शाही अगली सुनवाई के दौरान खुद अदालत के समक्ष पेश होंगे.

बता दें कि असम राइफल्स पर पूर्ण नियंत्रण को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच विवाद है. गृह मंत्रालय चाहता है कि असम राइफल्स पर उसके पास पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए लेकिन भारतीय सेना इसके विरोध में हैं.

मौजूदा समय में उत्तर पूर्व में तैनात असम राइफल्स का प्रशासनिक नियंत्रण गृह मंत्रालय के पास जबकि ऑपरेशनल कंट्रोल सेना के पास है.