भारत

सैन्य कैंटीनों में सिर्फ़ स्वदेशी सामान बेचने पर अभी कोई फ़ैसला नहीं हुआ: सरकार

रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद नाईक से राज्यसभा में पूछा गया था कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत योजना और वोकल फॉर लोकल की अपील के बाद रक्षा मंत्रालय सिर्फ़ स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है.

रक्षा राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक (फोटोः पीआईबी)

रक्षा राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक (फोटोः पीआईबी)

नई दिल्लीः रक्षा मंत्रालय ने देशभर में चलाई जा रहीं सैन्य कैंटीनों में सिर्फ मेड इन इंडिया उत्पादों को ही बेचे जाने को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं लिया है.

रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाईक ने राज्यसभा में कहा, ‘इस संबंध में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है.’

दरअसल वह सदन में उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या रक्षा मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत योजना और वोकल फॉर लोकल की अपील के मद्देनजर अपने स्टोरों और कैंटीन में सिर्फ मेड इन इंडिया उत्पादों का ही इस्तेमाल करने और बेचने पर विचार कर रहा है.

नाइक ने अपने जवाब में यह भी कहा कि 2017-2018 में रक्षा कैंटीनों का कुल टर्नओवर 17,190 करोड़ रुपये था, जो 2018-2019 में 18,917 करोड़ रुपये हो गया. वित्त वर्ष 2019-2020 में यह 17,588 करोड़ रुपये हो गया.

उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में अगस्त महीने तक यह आंकड़ा 3,692 करोड़ रुपये रहा.

उनसे एक अलग सवाल में पूछा गया कि क्या सरकार ने 37 एयरफील्ड के आधुनिकीकरण के लिए किसी निजी कंपनी के साथ अनुबंध किया है.

इस पर मंत्री ने कहा, ‘हां, एयरफील्ड ढांचे के आधुनिकीकरण ने खराब मौसम की स्थितियों में संचालन की क्षमता बढ़ाई है. इसके साथ ही नाइट ऑपरेशन, नेविगेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर और ट्रैफिक हैंडलिंग क्षमता भी बढ़ी है.’

उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि देश में मौजूदा समय में 86 सैन्य एयरबेस संचालन में हैं.

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में देश को आत्मनिर्भर बनाने और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया था.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)