पश्चिम बंगाल: चुनाव क़रीब आने के साथ आई प्रोपेगेंडा चैनल और समाचार वेबसाइट की बाढ़

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. एक पड़ताल में साल 2018 से अब तक 30 से अधिक ऐसी वेबसाइट और चैनल्स सामने आए हैं, जो असत्यापित और पक्षपाती सामग्री के साथ फ़ेक न्यूज़ चलाते हैं.

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(फोटो साभार: पिक्साबे)

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. एक पड़ताल में साल 2018 से अब तक 30 से अधिक ऐसी वेबसाइट और चैनल्स सामने आए हैं, जो असत्यापित और पक्षपाती सामग्री के साथ फ़ेक न्यूज़ चलाते हैं.

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है और इसके साथ ही वहां ऐसे 30 से अधिक प्रोपेगेंडा फैलाने वाली वेबसाइट और वीडियो चैनल सक्रिय हो गए हैं जो समाचार साइटों और चैनलों के रूप में है. ये वेबसाइटें और चैनल असत्यापित और पक्षपाती सामग्री के साथ फेक न्यूज चलाते हैं.

इन चैनलों और समाचार साइटों की जांच में द वायर  ने पाया कि ये वेबसाइट और वीडियो चैनल 2018 से 2020 के बीच बनाए गए और अधिकतर भाजपा के लिए प्रचार करते हैं. दो को छोड़कर ये सभी बंगाली में सामग्री प्रसारित करते हैं.

इंडिया राग, बारता टुडे, कैंपेन कॉलिंग मीडिया, भारत न्यूज, बंगोदेश, कोलकाता प्राइम टाइम, टाइम्स बंगाल, बंगाल न्यूज 24, एसओएम एक्स्ट्रा, बंगाल टाइम्स, जीएस मीडिया और 4यू बांग्ला जैसे नाम के 80 फीसदी से अधिक वेबसाइट और चैनल अपने स्वामित्व को लेकर कोई जानकारी नहीं उपलब्ध कराते हैं.

वहीं, बाकी के 20 फीसदी केवल ‘हम मीडिया और समाचार पोर्टल हैं’ और ‘यह चैनल पश्चिम बंगाल पर रोजाना समाचार अपडेट उपलब्ध कराता है’, जैसे अस्पष्ट जानकारियां उपलब्ध कराते हैं.

द वायर  द्वारा जिन 26 यूट्यूब चैनलों के बारे में पता लगाया गया है, उनमें से छह 2020 में अस्तित्व में आए और उनमें से एक तो बीते 22 अगस्त को शुरू किया गया है. वहीं, 11 ने साल 2019, चार ने 2018 और छह ने 2017 में काम शुरू किया. ये जानकारियां विभिन्न चैनलों द्वारा उनके पेजों पर उपलब्ध कराई गई हैं.

वहीं, समाचार वेबसाइटों ने अपने बारे में कोई जानकारी नहीं उपलब्ध कराई है. किसी ने भी अपने स्थापित किए जाने की तारीख नहीं बताई है और बहुत कम ने अपना कॉन्टैक्ट डिटेल दिया है.

इन वेबसाइटों पर प्रकाशित लेखों में किसी लेखक का नाम नहीं है. कुछ वेबसाइटों ने वास्तविक लगने के लिए लेखक का नाम तो दिया है लेकिन उनके साथ कोई उपनाम नहीं जुड़ा है.

तीन यूट्यूब चैनल खुद को न्यूज चैनल बताते हैं जिनके अजीबोगरीब नाम हैं जैसे टेक न्यूज बांग्ला, डेली जॉब्स अपडेट और बांगलर लोको गान. द वायर  की जांच में पता चला है कि ये पहले गैर-समाचार सामग्री उपलब्ध कराने वाले लोकप्रिय चैनल थे.

उदाहरण के लिए टेक न्यूज बांग्ला एक साल पहले तक नए गैजेट्स, मोबाइल फोन आदि से संबंधित वीडियो अपलोड करता था. इसी तरह पिछले साल तक डेली जॉब्स अपडेट ने सरकारी नौकरियों, नौकरी योग्यता मानदंडों, कौशल आवश्यकताओं पर वीडियो अपलोड किए. अब दोनों समाचार चैनल हैं.

कभी भाजपा आईटी सेल के वरिष्ठ सदस्य के रूप में काम करने वाले एक व्यक्ति ने अपना नाम न छापने की शर्त पर द वायर  से बात करते हुए कहा, ’वहां पर एक कंटेंट तैयार करने वाला विभाग है जिसकी जिम्मेदारी रोजाना समाचार के रूप में प्रोपेगेंडा तैयार करना है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘चूंकि दर्शकों तक अच्छी खासी पहुंच यूट्यूब चैनलों के लिए एक महत्वपूर्ण मानक है, इसलिए भाजपा कभी-कभी अपने खुद के लाभ के लिए बड़े सब्सक्राइबर्स वाले चैनल खरीद लेती है.’

जब द वायर  ने संदिग्ध यूट्यूब चैनलों और वेबसाइटों की सामग्री का विश्लेषण किया तो  पाया कि अधिकांश भाजपा/आरएसएस के लिए सामग्री प्रसारित करते हैं.

इंडिया राग, श्री बांग्ला, बंगोदेश, भारत न्यूज, रूपम टीवी और द बंगाल आउल भाजपा के लिए सामग्री प्रसारित करते हैं और मनगढ़ंत खबरें चलाते हैं.

वहीं दूसरी तरफ 4यू बांग्ला, एसओएम एक्स्ट्रा, बांग्ला न्यूज 24, एनके डिजिटल मैगजीन और दृष्टिभोंगी सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस सरकार का पक्ष लेते हैं. जहां 4यू बांग्ला और एनके डिजिटल मैगजीन 2017 से सक्रिय हैं, वहीं दो अन्य ने अगस्त 2020 में काम शुरू किया.

हाल ही में जब सोशल मीडिया पोस्ट ने दावा किया कि अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा था कि भारत की अर्थव्यवस्था पबजी पर प्रतिबंध से प्रभावित होगी, तो भारत समाचार नामक वेबसाइट द्वारा पोस्ट किए जाने के बाद यह पोस्ट बंगाली में वायरल हो गया.

जब बूम लाइव ने इस पोस्ट की जांच की, तो यह साबित हुआ कि भारत न्यूज़ गलत सूचना फैला रहा था और यह पहली बार नहीं था. भारत समाचार हमारी संदिग्ध समाचार साइटों की सूची में है.

इस साल की शुरुआत में ‘इंडिया राग’ नामक एक पोर्टल द्वारा प्रकाशित एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा गया कि  माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि ‘हिंदू हिंसक हैं’.

इस मुद्दे का संज्ञान लेते हुए माकपा की राज्य इकाई ने कोलकाता पुलिस के साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई थी. इंडिया राग हमारी संदिग्ध समाचार साइटों की सूची में भी है.

वायर के सवालों पर क्या जवाब मिला

कॉन्टैक्ट उपलब्ध होने पर द वायर  ने इनमें से कुछ वेबसाइटों और चैनलों को सवालों के साथ ईमेल भेजे. उनमें से तीन वेबसाइटों- खबर 24×7, श्री बांग्ला और द न्यूज़ बांग्ला, ने अब तक जवाब दिया है.

खबर 24×7 ने ईमेल में कहा, ‘फ्रीलांस पत्रकार के रूप में हमसे संपर्क करने के लिए धन्यवाद. हमारे पास आपके लिए कुछ प्रश्न हैं: हमें आपको हमारे मीडिया हाउस और हमारी संपादकीय नीति के बारे में विवरण भेजने की आवश्यकता क्यों है, क्योंकि आपने उल्लेख किया है कि आप एक फ्रीलांस पत्रकार हैं. एक फ्रीलांस पत्रकार के रूप में आपको इस तरह की जानकारी की आवश्यकता क्यों है, हम जानना चाहेंगे.’

हालांकि, ईमेल का जवाब देने वाले व्यक्ति ने अपनी पहचान उजागर नहीं की.

वहीं श्री बांग्ला ने जवाब दिया, ‘हम हमेशा स्वतंत्रता और सच्चाई के लिए काम करते हैं. हमारा कार्यालय गोरानगर, वृंदावन, भारत में है. यहां काम करने वाले हर समय स्वेच्छा और लगन से काम करते हैं. हम अपने कर्मचारियों को विचार और अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता देते हैं. हम किसी पक्षपात में लिप्त नहीं होते. ’

हालांकि, श्री बांग्ला द्वारा प्रकाशित कुछ हेडलाइंस इस प्रकार हैं, ‘सेक्युलर मुखौटा पहने जिहादी उमर खालिद पकड़ा गया’, ‘पश्चिम बंगाल को पश्चिम पाकिस्तान में बदलने की साजिश चल रही है’ और ‘ममता की पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस समारोह और पूजा की अनुमति नहीं दी’.

जब द वायर  ने यह स्पष्ट करने के लिए एक और ईमेल भेजा कि ये उपरोक्त लेख कैसे निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप से सही हैं, तो वेबसाइट ने कहा, ‘ये लेखकों की राय है और प्रबंधन इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं है.’

हालांकि, श्री बांग्ला वेबसाइट में प्रकाशित किसी भी लेख में लेखक का नाम नहीं है.

वहीं, खबर 24×7 की तरह ईमेल का जवाब देने वाले व्यक्ति ने अपनी पहचान का खुलासा नहीं किया.

ईमेल का जवाब देने वाले तीसरे पोर्टल द न्यूज बांग्ला ने कहा, ‘आपको जो जानकारी चाहिए वह हमारे फेसबुक पेज पर दी गई है. लेकिन आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? हम किसी अनजान व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी का खुलासा क्यों करेंगे?’

फेसबुक पेज पर ऑफिस का पता दक्षिण कोलकाता में दिया गया है और वह यह भी कहता है कि कंपनी निस्संदेह सबसे पारदर्शी, निष्पक्ष और लोगों के अनुकूल वेब न्यूज पोर्टल है. इसका कोई राजनीतिक झुकाव नहीं है. यह किसी का पक्ष नहीं लेता है.

पेज पर एक कॉन्टैक्ट नंबर भी दिया गया था, लेकिन जब फोन किया गया तो किसी ने उसका जवाब नहीं दिया.

जब द वायर  ने एक और ईमेल भेजा, जिसमें पूछा गया कि क्यों किसी भी लेख में पत्रकार के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है और संपादक की पहचान क्यों नहीं बताई गई है तब मीडिया हाउस ने कहा, ‘द न्यूज़ बांग्ला पढ़ने के लिए धन्यवाद. हमें इस तरह से प्रतिक्रिया देते रहें.’

सोशल मीडिया पर पर जनमत सर्वेक्षण

इनमें से कई डिजिटल चैनल 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए जनमत सर्वेक्षण के बारे में वीडियो पोस्ट करते हैं. यह देखते हुए कि कोई भी प्रामाणिक समाचार एजेंसी या चुनाव परामर्श कंपनी वास्तविक चुनाव से एक साल पहले जनमत सर्वेक्षण नहीं करती है, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन जनमत सर्वेक्षणों की कोई विश्वसनीयता नहीं है.

हालांकि, वे बताते हैं कि सोशल मीडिया पर नियमित आधार पर जनमत सर्वेक्षण पेश करने से ग्रामीण मतदाता  प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनमें से अधिकांश यह नहीं समझ सकते हैं कि जो उन्होंने पढ़ा है वह गलत है.

राजनीतिक विश्लेषक मैदुल इस्लाम कहते हैं, ‘आधुनिक चुनावों में सोशल मीडिया अहम भूमिका निभाता है. फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा बहुत गहरे तक घुस गए हैं और मतदाताओं के दिमाग पर काबू पा रहे हैं. सोशल मीडिया आज का गोएबल्स बन गया है. ज्यादा पैसे वाले राजनीतिक दल सोशल मीडिया के माध्यम से अपने प्रचार अभियान को सफलतापूर्वक चला सकते हैं.’

इस साल मई में द वायर ने सबसे पहले रिपोर्ट किया था कि आनंदबाजार पत्रिका से संबंधित एक फर्जी समाचार वेबसाइट तेलिनिपारा की घटना के बारे में झूठी और भड़काऊ खबरें फैला रहा था. आनंदबाजार पत्रिका, पश्चिम बंगाल का सबसे अधिक प्रसारित होने वाला अखबार है.

साल 2018 में राजस्थान के कोटा में पार्टी के सोशल मीडिया स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि समूह के पास किसी भी मैसेज को वायरल करने की शक्ति है, चाहे वह वास्तविक हो या फर्जी.

दैनिक भास्कर ने शाह के हवाले से कहा था, ‘राहुल गांधी के सभी फॉलोवर्स विदेशी हैं, वे किराये के गुंडों से नहीं डरते. सोशल मीडिया के माध्यम से ही हमें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सरकारें बनानी है. संदेशों को वायरल करते रहें.’

कोलकाता में पश्चिम बंगाल भाजपा के आईटी और सोशल मीडिया सेल के संयोजक उज्ज्वल पारीक ने द टेलीग्राफ को बताया कि बंगाल में भाजपा के 50,000 वॉट्सऐप ग्रुप 2019 के आम चुनाव में खेल बदलने वाला साबित हुए थे.

उज्जवल ने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि यह चुनाव एक वॉट्सऐप चुनाव था और हमने अच्छा किया क्योंकि हम वॉट्सऐप का इस्तेमाल मोदीजी के संदेश को फैलाने के लिए कुशलतापूर्वक कर सकते थे.’

बता दें कि 20 करोड़ यूजर्स के साथ भारत वॉट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)