भारत सरकार ने स्मार्टफोन में देश का बायोमेट्रिक पहचान ऐप यानी आधार ऐप पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य करने के यूआईडीएआई के प्रस्ताव को आगे न बढ़ाने का फ़ैसला किया है. यूआईडीएआई ने अपने बयान में कहा कि आधार ऐप को प्री-लोड करने के प्रस्ताव को वापस लेने से पहले आईटी मंत्रालय ने ‘इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ परामर्श’ किया था.
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने असम में जारी विधानसभा चुनाव के बीच 10 अप्रैल को स्थानीय अख़बार 'असोमिया प्रतिदिन' के कार्यालय पर हुए हमले की निंदा की है. वहीं, अख़बार ने इस घटना को ‘प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला’ बताया है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक्स पर संचालित पैरोडी अकाउंट डॉ. निमो यादव और नेहर हु को तत्काल बहाल करने का आदेश दिया है. ये अकाउंट उन 12 अकाउंट्स में शामिल थे, जिन्हें बीते दिनों इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के निर्देश पर ब्लॉक किया गया था.
टीवी रेटिंग्स के कामकाज से टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) का नियंत्रण हटाकर केंद्र सरकार ने भारत के 36,000 करोड़ रुपये के टीवी विज्ञापन कारोबार की रीढ़ मानी जाने वाली टेलीविजन रेटिंग्स पर पूर्ण नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है. अब ट्राई के पास यह तय करने का अधिकार नहीं है कि रेटिंग एजेंसियां टीवी देखने की आदतों और रेटिंग्स के अन्य पहलुओं को कैसे ट्रैक करेंगी.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी द्वारा उनके वित्तीय लेन-देन से जुड़ी ख़बरों को लेकर रिपब्लिक टीवी और उसके संपादक अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ दायर मानहानि मुक़दमे पर सुनवाई करते हुए न्यूज़ चैनल को 'अपमानजनक आलोचना' से बचने का निर्देश दिया. कोर्ट ने गोस्वामी के शो में की गई टिप्पणियों को 'अनुचित' बताते हुए कहा कि चैनल को कुछ शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए और 'संयम बरतना चाहिए'.
एक्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि व्यंग्यात्मक हैंडल ‘डॉ निमो यादव’ को भारत में केंद्र सरकार के आदेश पर ब्लॉक किया गया है. कंपनी के अनुसार, इस अकाउंट पर ‘प्रधानमंत्री से जुड़ी भ्रामक नैरेटिव फैलाने’ और ‘उन्हें ग़लत तरह से पेश करने’ का आरोप लगाया गया है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी आईटी नियम, 2021 के प्रस्तावित संशोधनों में ऑनलाइन सामग्री, ख़ासकर समाचार और समसामयिक मामलों पर केंद्र सरकार के नियंत्रण को और बढ़ाने का प्रावधान है. इसके तहत न सिर्फ मध्यस्थ (सोशल मीडिया मंच) बल्कि उन यूज़र्स को भी निगरानी के दायरे में लिया जा रहा है, जो ‘प्रकाशक’ नहीं हैं लेकिन ऑनलाइन ख़बरें और समसामयिक सामग्री पोस्ट या साझा करते हैं.
डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म मॉलीटिक्स, नेशनल दस्तक और कॉमेडियन राजीव निगम समेत कई फेसबुक पेज अब भारत में नहीं देखे जा सकते हैं. सोशल मीडिया मंच मेटा की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि यह कार्रवाई भारत सरकार और क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों के नोटिस के आधार पर की गई है.
गुजरात के राजकोट में एक पत्रकार ने पुलिस हिरासत में अमानवीय बर्बरता के गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि राजकोट क्राइम ब्रांच के डीसीपी जगदीश बांगड़वा और उनकी टीम ने एक बिल्डर के इशारे पर उनके गुप्तांग में पेट्रोल डाला और उन्हें उल्टा लटकाकर बेरहमी से पीटा, जिससे पैर में फ्रैक्चर सहित कई गंभीर चोटें आईं हैं. पुलिस ने आरोपों से इनकार किया है.
गृह मंत्रालय के 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(ख) के तहत 1,11,185 संदिग्ध ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक किया गया है.
केरल पुलिस ने एक एआई-जेनरेटेड वीडियो प्रसारित करने के आरोप में एक्स और एक यूज़र के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. दावा है कि वीडियो में प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग को कथित तौर पर भ्रामक और मानहानिकारक तरीके से दिखाया गया है. एफआईआर में कहा गया है कि वीडियो ‘समाज में दंगे भड़काने के इरादे से’ पोस्ट किया गया था और अधिकारियों के निर्देश के बावजूद एक्स ने इसे हटाने के बजाय प्रसारित होने दिया.
दिल्ली पुलिस द्वारा समाचार एजेंसी ‘यूएनआई’ के कार्यालय को उच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए शुक्रवार को सील कर दिया गया, जिसे समाचार एजेंसी ने ‘प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला’ बताया. एजेंसी ने पुलिस पर कर्मचारियों के साथ मारपीट और बदसलूकी का भी आरोप लगाया है.
34 नागरिक समाज संगठनों के एक गठबंधन, जिसका नेतृत्व कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स कर रहा है, ने इरफ़ान मेहराज़ और मानवाधिकार कार्यकर्ता ख़ुर्रम परवेज़ की की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि भारतीय अधिकारियों से आग्रह है कि यूएपीए और पीएसए जैसे दमनकारी क़ानूनों को रद्द करें तथा जम्मू-कश्मीर में नागरिक समाज और मीडिया स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए अनुकूल माहौल बनाएं.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यूज़लॉन्ड्री को टीवी टुडे से जुड़ी कुछ टिप्पणियों को हटाने का निर्देश दिया है. इस पर न्यूज़लॉन्ड्री के सह-संस्थापक अभिनंदन सेखरी ने कहा कि यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए ख़तरनाक मिसाल है और मीडिया की आलोचना पर रोक नहीं लगाई जा सकती.
द वायर की सुकन्या शांता को एनआईए के मामलों की सुनवाई के दौरान दोषी ठहराए जाने वाले लोगों की असामान्य रूप से ज़्यादा संख्या पर की गई श्रृंखला के लिए 'द मीडिया फाउंडेशन' के 'विश्व नाथ-दिल्ली प्रेस अवॉर्ड फॉर फियरलेस जर्नलिज़्म 2025' से सम्मानित किया गया है.