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सेना ने मानवाधिकार के मुद्दों से निपटने और पारदर्शिता लाने के लिए नया प्रकोष्ठ बनाया

मेजर जनरल गौतम चौहान ने दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय में अतिरिक्त महानिदेशक (मानवाधिकार) के रूप में पदभार ग्रहण किया है. पूर्वोत्तर क्षेत्र और जम्मू कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में इस तरह के अभियान के दौरान सशस्त्र बलों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने मानवाधिकारों से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए एक मेजर जनरल की अगुवाई में नया प्रकोष्ठ बनाया है. 13 लाख जवानों वाले बल के कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है. आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

मेजर जनरल गौतम चौहान ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में सेना मुख्यालय में अतिरिक्त महानिदेशक (मानवाधिकार) के रूप में पदभार ग्रहण किया है.

अतिरिक्त महानिदेशक (मानवाधिकार) उप-सेना प्रमुख के अधीन कार्य करेंगे. सेना ने आतंकवाद विरोधी अभियानों के संचालन में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए मानवाधिकार प्रकोष्ठ बनाने का निर्णय लिया है.

पूर्वोत्तर क्षेत्र और जम्मू कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में इस तरह के अभियान के दौरान सशस्त्र बलों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं. सेना एक व्यापक सुधार प्रक्रिया को लागू करने की प्रक्रिया में है.

इंडिया टुडे के मुताबिक मानवाधिकार प्रकोष्ठ की मंजूरी रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2019 में दी थी, लेकिन इसमें और अधिक प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं की जरूरत थी, जब तक कि यह एक मेजर जनरल रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में काम करना शुरू न कर दे.

कार्यालय मानव अधिकारों के उल्लंघन को देखने के लिए अधिक कठोर तंत्र बनाने पर ध्यान देगा.

मेजर जनरल चौहान, जिन्हें पहले अतिरिक्त महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था, एकीकृत रक्षा स्टाफ (मुख्यालय आईडीएस) के मुख्यालय में ब्रिगेडियर ऑपरेशन्स लॉजिस्टिक्स के रूप में सेवारत थे.

गोरखा राइफल्स में एक पैदल सेना अधिकारी रहे मेजर जनरल चौहान ने उत्तर पूर्व में एक ब्रिगेड का नेतृत्व किया है. उन्होंने सैन्य संचालन निदेशालय (एमओ) में भी काम किया है.

अतिरिक्त महानिदेशक मानवाधिकार का पद सेना द्वारा घोषित कई सुधारों का हिस्सा है. यह किसी भी मानवाधिकार उल्लंघन रिपोर्ट की जांच करने वाला नोडल निकाय होगा.

सेल का भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हिस्सा न केवल जांच और वैधता में सहायता करेगा, बल्कि यदि आवश्यक हो तो अन्य संगठनों और गृह मंत्रालय के साथ समन्वय की सुविधा भी प्रदान करेगा.

बता दें कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने बीते 30 दिसंबर को दावा किया कि श्रीनगर के परिम्पोरा इलाके में हुई मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए हैं. लेकिन मारे गए युवकों के परिवारों का कहना है कि उन लोगों का आतंकवाद से कोई संबंध नहीं था और उनमें से दो छात्र थे.

इससे पहले सेना ने जम्मू कश्मीर के शोपियां इलाके में 18 जुलाई को तीन आतंकियों के मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया था. हालांकि 18 सितंबर को सेना ने स्वीकार किया कि तीनों युवक राजौरी के रहने वाले थे और ऑपरेशन के दौरान आफस्पा, 1990 के तहत मिलीं शक्तियों का उल्लंघन हुआ था.

इस मामले को लेकर जम्मू कश्मीर पुलिस ने सेना के एक अधिकारी (कैप्टन) समेत तीन लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया है. वहीं सेना ने इस केस में साक्ष्य जुटाने का कार्य पूरा कर लिया है और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई हो सकती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)