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हाथरस के डीएम का तबादला, पीड़ित परिवार ने कहा- उन्हें बर्ख़ास्त करने की मांग करते रहेंगे

हाथरस के ज़िलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार पिछले साल सितंबर महीने में एक दलित लड़की से कथित सामूहिक बलात्कार और उसकी मौत के मामले में अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में आए थे. आरोप है कि लड़की की मौत के बाद प्रशासन ने परिवार की सहमति के बिना आधी रात में उसका अंतिम संस्कार कर दिया था.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: हाथरस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने के बाद सुर्खियों में आए वहां के जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार का उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते बृहस्पतिवार को तबादला कर दिया. राज्य सरकार ने उनके अलावा 15 अन्य आईएएस अधिकारियों के भी तबादले किए हैं.

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक हाथरस के जिला अधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार को स्थानांतरित कर मिर्जापुर का जिलाधिकारी बनाया गया है. उत्तर प्रदेश जल निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक रमेश रंजन ने हाथरस के नए जिलाधिकारी का कार्यभार संभाला है.

लक्षकार सितंबर में हाथरस के चंदपा इलाके में एक दलित लड़की से कथित सामूहिक बलात्कार और उसकी मौत के मामले में अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में आए थे.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उस लड़की के शव का कथित रूप से उसके परिवार की मर्जी के बगैर देर रात प्रशासन द्वारा अंतिम संस्कार करवाए जाने का स्वत: संज्ञान लेते हुए लक्षकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और सरकार से उनका तबादला करने पर विचार करने को कहा था.

उच्च न्यायालय ने आधी रात को शव जलाने के प्रशासन की कार्रवाई को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया था.

हालांकि सरकार ने बीते दिसंबर महीने के शुरू में जस्टिस पंकज मिठाल और जस्टिस राजन रॉय की खंडपीठ के सामने दलील पेश करते हुए कहा था कि लक्षकार को जिलाधिकारी के पद से नहीं हटाया जाएगा.

अदालत में सरकार के वकील ने हाथरस मामले में पीड़िता का अंतिम संस्कार देर रात में कराए जाने को सही ठहराने की कोशिश भी की थी. साथ ही यह भी कहा था कि जिलाधिकारी ने जो भी किया वह हालात के मद्देनजर बिल्कुल दुरुस्त था. बहरहाल बीते 31 दिसंबर को उनका तबादला कर दिया गया.

लक्षकार के तबादले पर द हिंदू से बातचीत में पीड़िता के भाई ने कहा कि वह इसे न्याय की तरफ बढ़ाया गया कदम नहीं मानते. उन्होंने कहा, ‘हमने उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी और हम यह मांग अदालत के समक्ष उठाते रहेंगे.’

पीड़िता की भाभी ने कहा कि लक्षकार किसी भी जिले का जिला मजिस्ट्रेट होने के योग्य नहीं. उन्होंने कहा, ‘मिर्जापुर की बेटियां सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी. हमारी बेटी का शव किसी अनजान व्यक्ति की तरह जलाने के बाद उन्होंने हमें हमारे ही घर में यह समझाने की कोशिश की थी कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है.’

यह न्यायपालिका समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार को बचाने का कदम लगता है.

आरोप है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 14 सितंबर 2020 को सवर्ण जाति के चार युवकों ने 19 साल की दलित युवती के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट करने के साथ बलात्कार किया था. उनकी रीढ़ की हड्डी और गर्दन में गंभीर चोटें आई थीं.

करीब 10 दिन के इलाज के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 29 सितंबर 2020 को युवती ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

परिजनों ने पुलिस पर उनकी सहमति के बिना आननफानन में युवती का अंतिम संस्कार करने का आरोप लगाया था. हालांकि, पुलिस ने इससे इनकार किया है.

इतना ही नहीं इसके अगले दिन 30 सितंबर 2020 को हाथरस के तत्कालीन डीएम द्वारा कथित तौर पर पीड़ित परिवार को धमकाने का एक वीडियो सोशल मीडिया में सामने आया है.

सोशल मीडिया पर वायरल हुए 22 सेकेंड के इस कथित वीडियो में हाथरस के तत्कालीन डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार मृतक युवती के पिता से कहते नजर आ रहे हैं, ‘आप अपनी विश्वसनीयता खत्म मत करिए. मीडियावालों के बारे में मैं आपको बता दूं कि आज अभी आधे चले गए. कल सुबह तक आधे और निकल जाएंगे. दो-चार बचेंगे कल शाम तक.’

वे आगे कहते नजर आ रहे हैं, ‘तो हम ही आपके साथ खड़े हैं. अब आपकी इच्छा है कि आपको बार-बार बयान बदलना है, नहीं बदलना हैं. अभी हम भी बदल जाएं…’

युवती के भाई की शिकायत के आधार पर चार आरोपियों- संदीप (20), उसके चाचा रवि (35) और दोस्त लवकुश (23) तथा रामू (26) को गिरफ्तार किया गया था.

इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने कोर्ट में सौंपी गई चार्जशीट में आरोपियों पर सामूहिक बलात्कार, हत्या और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोप लगाए हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)