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यूपी: पिता का आरोप, स्कूल के परीक्षा में न बैठने देने पर बेटी ने फांसी लगाई

उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले का मामला है. छात्रा के पिता ने आरोप लगाया कि बेटी की फीस न जमा होने से उसे स्कूल प्रबंधन ने परीक्षा कक्ष से बीते दो जनवरी को लौटा दिया था, जिसकी वजह से उसने आत्महत्या कर ली. स्कूल प्रबंधन ने आरोप से इनकार किया है.

Banda

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बबेरू कस्बे में शुल्क न जमा होने पर परीक्षा से वंचित की गई 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने सोमवार को तड़के फांसी लगाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली. वह अनुसूचित जाति समुदाय से थी.

बबेरू कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) भास्कर मिश्रा ने बताया कि कस्बे के नेता नगर में सोमवार तड़के एक 12वीं की छात्रा ने अपने मकान के कमरे में पंखे की हुक से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. उसके शव का पोस्टमॉर्टम करवाया गया है.

उन्होंने बताया कि छात्रा के पिता ने एक शिकायती पत्र दिया है, जिसमें आरोप लगाया है, ‘उनकी बेटी कस्बे के एक विद्यालय में 12वीं कक्षा की छात्रा है, इस समय छमाही परीक्षाएं चल रही हैं और बेटी का शुल्क न जमा होने से उसे विद्यालय प्रबंधन ने परीक्षा कक्ष से बीते दो जनवरी को लौटा दिया था, जिसकी वजह से उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, लड़की के पिता अप्रैल 2020 से फीस नहीं जमा कर सके थे. पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

अमर उजाला के मुताबिक नेतानगर निवासी अनंत कुमार दिहाड़ी मजदूर हैं और लॉकडाउन में आर्थिक तंगी से बुरी तरह से टूट गए हैं. जिस वजह से बेटी का फीस नहीं भर पाए थे.

अनंत की बेटी संजना (16) विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में कक्षा 12वीं में पढ़ती थी. संजना हाईस्कूल में प्रथम श्रेणी में पास हुई थी.

पिता के मुताबिक, इन दिनों संजना की इंटर छमाही की परीक्षाएं चल रही थीं. दो विषयों की परीक्षा भी दे चुकी थी. संजना शनिवार को परीक्षा देने गई थी, लेकिन फीस जमा न होने पर स्कूल वालों ने उसे फीस लेकर आने की बात कहकर बिना परीक्षा दिए ही लौटा दिया.

उन्होंने लगाया कि इससे संजना काफी तनाव में आ गई और निराश होकर खुदकुशी कर ली.

पिता ने बेटी की आत्महत्या के लिए स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लॉकडाउन के बाद काम धंधा न मिलने से वह बेटी की फीस का इंतजाम नहीं कर सके थे.

उधर, स्कूल प्रधानाचार्य अनिल द्विवेदी ने कहा कि फीस के लिए परीक्षा से वंचित करने की बात बेबुनियाद है. किसी भी परीक्षार्थी को फीस के कारण परीक्षा से बाहर नहीं किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)