आंध्र प्रदेश: मुख्यमंत्री के परिवार की कंपनी को मिला सरकारी ख़रीद के ऑर्डर का बड़ा हिस्सा

भारती सीमेंट कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी के परिवार की 49 फीसदी हिस्सेदारी है और उनकी पत्नी कंपनी की निदेशक हैं. अप्रैल 2020 से 18 जनवरी 2021 तक राज्य द्वारा सीमेंट की ख़रीद के लिए दिए गए कुल ऑर्डर में से 14 फीसदी इस कंपनी को मिले हैं.

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी. (फोटो साभार: पीटीआई)

भारती सीमेंट कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी के परिवार की 49 फीसदी हिस्सेदारी है और उनकी पत्नी कंपनी की निदेशक हैं. अप्रैल 2020 से 18 जनवरी 2021 तक राज्य द्वारा सीमेंट की ख़रीद के लिए दिए गए कुल ऑर्डर में से 14 फीसदी इस कंपनी को मिले हैं.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी. (फोटो साभार: पीटीआई)
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी. (फोटो साभार: पीटीआई)

हैदराबाद: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी के परिवार का जिस सीमेंट कंपनी में मालिकाना हिस्सेदारी है, उसे मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले 10 महीने के दौरान राज्य सरकार के कामों के लिए बड़ी संख्या में खरीददारी के ऑर्डर मिले थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारती सीमेंट कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड में रेड्डी के परिवार की 49 फीसदी हिस्सेदारी है और उनकी पत्नी इसकी निदेशक हैं.

इस कंपनी को अप्रैल, 2020 से 18 जनवरी, 2021 तक राज्य द्वारा कुल सीमेंट की खरीद के लिए दिए गए ऑर्डर का 14 फीसदी या 2,28,307.14 मीट्रिक टन ऑर्डर मिला था.

बता दें कि एक फ्रांसीसी कंपनी विकट ने साल 2010 में भारती सीमेंट में 51 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी.

इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड को 1,59,753.70 मीट्रिक टन का दूसरा सर्वाधिक खरीद ऑर्डर प्राप्त हुआ, जो भारती सीमेंट से लगभग 30 प्रतिशत कम है.

इंडिया सीमेंट्स ने भारती सीमेंट में 95.32 करोड़ रुपये का निवेश किया था और जिस साल विकट ने भारती में 51 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी उसी साल उसने उसे बेच दिया था.

इंडिया सीमेंट्स के प्रबंध निदेशक एन. श्रीनिवासन उन लोगों में से एक हैं जिनका नाम लेन-देन के मामले में वाईएस जगनमोहन रेड्डी व अन्य के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया है.

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन वाईएस राजशेखर रेड्डी सरकार ने कुछ कंपनियों का समर्थन किया था और कम कीमतों पर जमीन आवंटित की थी, खनन पट्टों को देने के लिए कानूनों को दरकिनार किया या नियमों के विपरीत अतिरिक्त नदी जल आवंटित किया, जिसके बदले में उन्होंने जगन रेड्डी के स्वामित्व वाली कंपनियों में निवेश किया.

अप्रैल 2012 से सितंबर 2014 तक सीबीआई द्वारा दाखिल की गई 11 चार्जशीटों में से छठां, सातवां और आठवां चार्जशीट डालमिया सीमेंट्स, इंडिया सीमेंट्स, रघुराम सीमेंट्स (पूर्ववर्ती भारती सीमेंट) और पेन्ना सीमेंट्स से लेन-देन का लेकर था. पेन्ना सीमेंट्स को 1,50,325.02 मीट्रिक टन के खरीद ऑर्डर मिले थे.

अगर इन सभी के ऑर्डरों को मिला दिया जाए तो इन तीनों कंपनियों को अप्रैल, 2020 से जनवरी, 2021 तक दिए गए ऑर्डरों का कुल एक तिहाई हिस्से का ऑर्डर मिला था.

संपर्क किए जाने पर आंध्र प्रदेश के उद्योग मंत्री एम. गौथम रेड्डी ने कहा कि भारती सीमेंट और इंडिया सीमेंट्स को भारी मात्रा में ऑर्डर मिले हैं क्योंकि वे सरकार के शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति करने में सक्षम थे.

उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘कुछ निर्माताओं के पास आपूर्ति को लेकर के समस्याएं हैं और सरकार के लिए काम के शेड्यूल के साथ सीमेंट की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है. आवश्यकता के अनुसार आदेश दिए गए हैं.’

आंध्र प्रदेश में वाईएसआर निर्माण के माध्यम से खरीद के आदेश दिए जाते हैं. वाईएसआर निर्माण राज्य द्वारा लॉन्च किया गया एक पोर्टल है जिसका उपयोग सभी राज्य विभागों द्वारा सरकारी कार्यों जैसे आवास, सड़क, सिंचाई परियोजनाओं आदि के लिए सीमेंट की खरीद के लिए किया जाता है.

यह पोर्टल सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, विनिर्माण कंपनियों और सरकारी विभागों जैसे हितधारकों को जोड़ता है.

वाईएस जगनमोहन रेड्डी सरकार ने अपने विभागों द्वारा खरीद के लिए 50 किलोग्राम सीमेंट बैग की कीमत 225 रुपये तय की है.

विभाग अपनी आवश्यकताओं को जिला कलेक्टरों को भेजते हैं, जो तब वाईएसआर निर्माण का उपयोग करके एपी सीमेंट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एपीसीएमए) को आदेश देते हैं. एपीसीएमए तब अपने 23 निर्माताओं के बीच ऑर्डर वितरित करता है.

भारती सीमेंट के निदेशक एम. रविंदर रेड्डी जो एपीसीएमए के उपाध्यक्ष भी हैं, ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है.

उन्होंने कहा, ‘सरकार के आदेशों का वाईएस भारती (वाईएस जगन मोहन रेड्डी की पत्नी) के निदेशक होने से कोई लेना-देना नहीं है. वह शुरू से ही वहां रही हैं और हमने पिछले शासन के दौरान सरकार को 230 रुपये प्रति बैग की आपूर्ति की है.’

एपीसीएमए के एक अधिकारी ने कहा कि व्यापार निकाय ने किसी भी विशेष कंपनी को आदेशों के आवंटन का पक्ष नहीं लिया.

अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, ‘आवंटन आंध्र प्रदेश में निर्माताओं और उनकी क्षमताओं के बाजार हिस्सेदारी पर आधारित है. भारती सीमेंट्स या इंडिया सीमेंट्स को बड़े ऑर्डर मिलने के कारण अन्य कंपनियां आवश्यक मात्रा में आपूर्ति करने में असमर्थ हैं. कुछ कंपनियां बड़े ऑर्डर नहीं लेना चाहती हैं क्योंकि सरकारी कीमत बहुत कम है.’

हालांकि, जिन कुछ सीमेंट कंपनियों को कम खरीद के आदेश मिले उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

विपक्षी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने आरोप लगाया है कि भारती सीमेंट की अगुवाई वाली सीमेंट कंपनियों ने एक सिंडिकेट का गठन किया है और पिछले कुछ महीनों में प्रति 50 किलोग्राम के बैग की कीमतों को 220-250 रुपये से बढ़ाकर 350-400 रुपये प्रति बैग कर दिया है.

टीडीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कोमारेड्डी पट्टभी ने कहा, ‘ऐसा भारती सीमेंट को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है जिसमें मुख्यमंत्री के परिवार की अभी भी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है.’

टीडीपी का दावा है कि राज्य सरकार ने खुले बाजार में सीमेंट की कीमतों में वृद्धि को लेकर आंख मूंद ली है. आम जनता बहुत अधिक भुगतान करती है, जिससे सीमेंट कंपनियों को खुले बाजार में बिक्री के माध्यम से बेतहाशा लाभ बनाने का मौका मिलता है, भले ही वे सरकार को कम कीमत पर आपूर्ति करें.

भारती सीमेंट के निदेशक रविंदर रेड्डी इन आरोपों को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा, ‘कई कारकों के कारण कीमतें बढ़ी हैं. हमारे पास 50 लाख टन की क्षमता वाला एक संयंत्र है, इसलिए हमें कई सरकारी आदेश प्राप्त होते हैं. लेकिन यह एक बोझ है क्योंकि कीमत बहुत कम है. हम इसे विशेष रूप से कॉरपोरेट-सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के हिस्से के रूप में करते हैं क्योंकि कमजोर वर्गों के लिए आवास भी शामिल है.’

टीडीपी के इस आरोप के बारे में पूछे जाने पर कि सीमेंट की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है, उद्योग मंत्री गौतम रेड्डी ने कहा कि सरकार नियंत्रण को लागू नहीं कर सकती है.

उन्होंने कहा, ‘कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है. हम कीमतें तय नहीं कर सकते.’

यह पूछे जाने पर कि क्या सीमेंट कंपनियां कीमतों को प्रभावित करने के लिए काम कर रही थीं, उन्होंने कहा, ‘सीमेंट कंपनियों के पास अपने खुद के प्लेटफार्म हैं. मैं वास्तव में इस पर चर्चा करने की स्थिति में नहीं हूं क्योंकि मैं सबूत पेश नहीं कर सकता.’