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वरवरा राव को डिमेंशिया की बीमारी नहीं, उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज की जाए: एनआईए

जून 2018 में एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार 82 वर्षीय तेलुगु कवि वरवरा राव इस समय नानावती अस्पताल में भर्ती हैं. मेडिकल आधार पर उन्हें ज़मानत देने की याचिका ख़ारिज करने का अनुरोध करते हुए मामले की जांच कर रहे एनआईए में कहा कि उनकी हालत स्थिर है.

वरवरा राव. (फोटो: पीटीआई )

वरवरा राव. (फोटो: पीटीआई )

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बीते बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट से एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार 82 वर्षीय तेलुगु कवि एवं कार्यकर्ता वरवरा राव द्वारा चिकित्सा आधार पर दाखिल जमानत याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया. 

एजेंसी ने कहा है कि उनकी वर्तमान हालत स्थिर है. एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत को नानावती अस्पताल से इस महीने के शुरू में आई राव की चिकित्सा रिपोर्टों के बारे में याद दिलाया, जिनमें कहा गया है कि उनकी हालत स्थिर है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है.

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय के समक्ष एक बयान दिया था जिसमें कहा गया था कि राव को निजी अस्पताल से छुट्टी दिए जाने के बाद नवी मुंबई में तलोजा जेल वापस नहीं भेजा जाएगा, बल्कि उन्हें यहां सरकारी जेजे अस्पताल के वॉर्ड में भर्ती कराया जायेगा और उन्हें उचित चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जायेगी.

सिंह ने कहा, ‘उनकी (राव) चिकित्सा रिपोर्टों… उनकी वर्तमान स्थिति स्थिर है… और राज्य सरकार ने इन याचिकाओं में किए गए सभी अनुरोधों का ध्यान रखा है.’

उन्होंने जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस मनीष पिटाले की पीठ को बताया, ‘इसलिए उन्हें जमानत देने का सवाल तभी उठता है, जब अदालत को इस बात का भरोसा नहीं हो कि क्या जेजे अस्पताल उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकेगा.’

पीठ तीन याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी. एक रिट याचिका में राव का पूर्ण चिकित्सा रिकॉर्ड दिए जाने का अनुरोध किया गया है और राव द्वारा चिकित्सा आधार पर जमानत याचिका दाखिल की गई है.

तीसरी याचिका राव की पत्नी हेमलता ने दाखिल की है और इस याचिका में चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. राव इस समय मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती हैं.

राव के परिवार ने पिछले साल अक्टूबर महीने में बताया था कि राव का वजन 18 किलो कम हो गया है और वे बेड से उठने लायक नही हैं.

हाईकोर्ट ने कहा, ‘एक बार उन दवाइयों की सूची देखिए, जो कि उन्हें रोजाना दी जाती हैं. वे इन्हीं दवाईयों पर जिंदा हैं. इसलिए उन्हें लगातार मेडिकल मदद की जरूरत है.’

इस पर एएसजी सिंह ने कहा कि इनमें से अधिकतर दवाएं ‘उम्र संबंधी’ हैं. एनआईए वकील ने कहा, ‘हमारे भी घरों में बुजुर्ग लोग हैं और वे इनमें से 70-80 फीसदी दवाईयां लेते हैं.’

सिंह ने दोहराते हुए कहा कि नानावती अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक राव को ‘डिमेंशिया’ नहीं है. डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति अपनी याद्दाश्त खोने लगता है, उसे चीजें याद करने में मुश्किल होती है और वो रोजमर्रा के काम नहीं कर पाता है.

हालांकि हाईकोर्ट ने ध्यान दिलाया कि जेजे अस्पताल, तलोजा जेल अस्पताल और राज्य द्वारा संचालित सेंट जॉर्ज अस्पताल, सभी ने डिमेंशिया का उल्लेख किया है या दिमाग सही से काम नहीं कर पाने के बारे में कहा है.

सिंह ने कहा, ‘हमें जेजे अस्पताल पर पूरा भरोसा है, लेकिन नानावती अस्पताल, जहां उनका इलाज चल रहा था, ने कहा है कि उन्हें अभी डिमेंशिया नहीं है.’

वकील ने आगे कहा, ‘जब राव का इलाज चल रहा था तब हमने नानावती अस्पताल पर भरोसा किया. अब हम इस पर विश्वास क्यों नहीं कर रहे हैं जब इसने कहा है कि राव को डिमेंशिया नहीं है.’

एनआईए वकील ने कहा कि किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य स्थिति में उतार-चढ़ाव हो सकता है, इसलिए न्यायालय को जमानत याचिका पर विचार करते हुए राव की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति देखना चाहिए.

राव के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने दलील दी कि जेजे अस्पताल या किसी अन्य अस्पताल में संक्रमण की आशंका है और बीमार राव को वहां नहीं भेजा जाना चाहिए.

इसके बाद उच्च न्यायालय ने नानावती अस्पताल को राव की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर गुरुवार की सुबह तक एक नई चिकित्सा रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए.

वरवरा राव के परिजन जेल में उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर कई बार चिंता जता चुके हैं. बीते नवंबर महीने में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अस्पताल भेजा गया था.

अदालत ने कहा था, ‘वे लगभग मृत्युशैया पर हैं. उन्हें इलाज की जरूरत है. क्या सरकार ये कह सकती है कि नहीं-नहीं, हम तलोजा (जेल) में ही उनका इलाज करेंगे.’

साल 2018 में एल्गार परिषद मामले में पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए कई कार्यकर्ताओं और वकीलों में वरवरा राव भी शामिल हैं.

इस मामले को एनआईए को स्थानांतरित कर दिया गया है, जिसने बाद में और अधिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को गिरफ्तार किया गया.

यह मामला 1 जनवरी, 2018 को पुणे के निकट भीमा-कोरेगांव की जंग की 200वीं वर्षगांठ के जश्न के बाद हिंसा भड़कने से संबंधित है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे.

उसके एक दिन पहले 31 दिसंबर 2017 को पुणे के ऐतिहासिक शनिवारवाड़ा में एल्गार परिषद का सम्मेलन आयोजित किया गया था. आरोप है कि सम्मेलन में एल्गार परिषद समूह के सदस्यों ने भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके अगले दिन हिंसा भड़क गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)