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केंद्र एमएसपी को क़ानूनी मान्यता दे देती है, तो आंदोलनरत किसान मान जाएंगे: सत्यपाल मलिक

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलनरत किसानों का समर्थन करते हुए मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि आज की तारीख़ में किसानों के पक्ष में कोई भी क़ानून लागू नहीं है. इस स्थिति को ठीक करना चाहिए. जिस देश का किसान और जवान असंतुष्ट होगा, वह देश आगे बढ़ ही नहीं सकता. उस देश को कोई बचा नहीं सकता.

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक. (फोटो: पीटीआई)

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक. (फोटो: पीटीआई)

बागपत: मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने केंद्र के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों का पक्ष लेते हुए रविवार को कहा कि जिस देश का किसान और जवान असंतुष्ट हो, वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता.

मलिक ने गृह जनपद बागपत में अपने अभिनंदन समारोह में कहा कि यदि केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी मान्यता दे देती है, तो प्रदर्शनकारी किसान मान जाएंगे.

उन्होंने कहा, ‘आज की तारीख में किसानों के पक्ष में कोई भी कानून लागू नहीं है. इस स्थिति को ठीक करना चाहिए. जिस देश का किसान और जवान असंतुष्ट होगा, वह देश आगे बढ़ ही नहीं सकता. उस देश को कोई बचा नहीं सकता. इसलिए, अपनी फौज और किसान को संतुष्ट करके रखिए.’

मलिक ने किसानों की दशा का जिक्र करते हुए कहा, ‘इन बेचारों की स्थिति आप देखिए. वे लोग जो चीज (फसल) उपजाते हैं, उसके दाम हर साल घट जाते हैं और जो चीजें खरीदते हैं, उनके दाम बढ़ते जाते हैं. उन्हें तो पता भी नहीं है कि वे गरीब कैसे होते जा रहे हैं. वे जब (बीज की) बुवाई करते हैं, तब दाम कुछ होता है और जब फसल काटते हैं तब वह 300 रुपये कम हो जाता है.’

नए कृषि कानूनों को सही ठहराने के लिए भाजपा द्वारा दी जा रही दलील पर तंज करते हुए मलिक ने कहा, ‘बहुत शोर भी मचाया गया कि किसान दूसरी जगह कहीं भी (फसल) बेच सकते हैं. वह तो 15 साल पुराना कानून है, लेकिन उसके बावजूद मथुरा के किसान जब गेहूं लेकर पलवल जाते हैं तो उन पर लाठीचार्ज हो जाता है. सोनीपत का किसान जब नरेला जाता है, तो उस पर लाठीचार्ज हो जाता है.’

उन्होंने कहा, ‘किसानों के बहुत से सवाल ऐसे हैं, जो हल होने चाहिए. मैं अब भी इस कोशिश में हूं कि किसी तरह यह मसला हल हो. मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि किसानों के मामले में जितनी दूर तक जाना पड़ेगा, मैं जाऊंगा.’

मलिक ने कहा, ‘मुझे किसानों की तकलीफ पता है. उनकी पूरी इकोनॉमिक्स (अर्थव्यवस्था) के बारे में मालूम है. किसान इस देश में बहुत बुरे हाल में हैं.’

मलिक ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की घटना का जिक्र करते हुए कहा, ‘पता नहीं आप लोगों में से कितने लोग जानते हैं, लेकिन मैं सिखों को जानता हूं. श्रीमति गांधी (पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी) ने ऑपरेशन ब्लूस्टार चलाने के बाद अपने फार्म हाउस पर एक महीना तक महामृत्युंजय यज्ञ कराया था.’

उन्होंने कहा, ‘अरुण नेहरू ने मुझे बताया कि उन्होंने उनसे (इंदिरा गांधी से) पूछा कि आप यह तो नहीं मानती थीं, फिर आप यह क्यों करा रही हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि तुम्हें पता नहीं है, मैंने इनका अकाल तख्त तोड़ा है. वे मुझे छोड़ेंगे नहीं. उन्हें इलहाम था कि यह होगा.’

मलिक ने कहा, ‘अभी किसानों के मामले में जब मैंने देखा कि क्या-क्या हो रहा है, तो मैं खुद को रोक नहीं सका और मैंने अपनी बात रखी. मैंने प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) और गृहमंत्री (अमित शाह) दोनों से कहा कि मेरी दो प्रार्थनाएं हैं. एक तो यह कि इन्हें (प्रदर्शनकारी किसानों को) दिल्ली से खाली हाथ मत भेजनाख् क्योंकि यह सरदार (सिख) लोग 300 साल तक (किसी बात को) याद रखते हैं. दूसरा यह कि उन पर बल प्रयोग मत करना. जिस दिन (किसान नेता) राकेश टिकैत की गिरफ्तारी का शोर मचा हुआ, उस वक्त भी मैंने हस्तक्षेप कर उसे रुकवाया था.’

उन्होंने कहा, ‘अभी कल मैं एक बहुत बड़े पत्रकार से मिलकर आया हूं, जो प्रधानमंत्री के बहुत अच्छे दोस्त हैं. मैंने उनसे कहा कि मैंने तो कोशिश कर ली, अब तुम उन्हें समझाओ. किसानों को अपमानित कर दिल्ली से भेजना, गलत रास्ता है. सिर्फ एमएसपी को कानूनी तौर पर मान्यता दे दी जाए, तो सारा मामला ठीक हो जाएगा.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यपाल ने कहा कि उन्हें लोगों द्वारा बात न करने की सलाह दी गई थी लेकिन वह खुद को रोक नहीं पाए.

उन्होंने कहा, ‘राज्यपाल का मतलब चुप रहना होता है. उन्हें आराम करना है, कोई काम नहीं करना है. उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे कुछ न कहें, लेकिन बोलना मेरी आदत है. जब मैंने देखा कि किसानों के साथ क्या हो रहा है, तो मैं खुद को बोलने से रोक नहीं पाया.’

मलिक बागपत के रहने वाले हैं और जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद सरकार ने उन्हें मेघालय का राज्यपाल नियुक्त कर दिया था.

उन्होंने कहा, ‘जब अनुच्छेद 370 हटाया तो मैं वहां का राज्यपाल था. मेरा कर्तव्य था कि मैं चीजों को संभालूं. फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि कोई भी राष्ट्रीय ध्वज को नहीं उठाएगा. उन्होंने कहा था कि खूनखराबा होगा. (महबूबा) मुफ्ती ने कहा था कि कोई भी राष्ट्रीय ध्वज नहीं उठाएगा, लेकिन सरकार ने साहस दिखाया.’

मलिक ने कहा, ‘हमने एक गोली भी नहीं चलाई और न ही किसी पक्षी को नुकसान पहुंचा. मैंने अपना कर्तव्य निभाया.’

मालूम हो कि केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए कृषि से संबंधित तीन विधेयकों– किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020, किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 और आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020- के विरोध में पिछले तीन महीने से अधिक समय से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

इसे लेकर सरकार और किसानों के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है.

किसान तीनों नए कृषि कानूनों को पूरी तरह वापस लिए जाने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दिए जाने की अपनी मांग पर पहले की तरह डटे हुए हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)