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केंद्र का दिल्ली हाईकोर्ट से आग्रह, वॉट्सऐप को नई प्राइवेसी नीति लागू करने से रोकें

फेसबुक के स्वामित्व वाले सोशल नेटवर्किंग मंच वॉट्सऐप ने जनवरी में अपनी नई निजता नीति को 8 फरवरी से लागू करने की घोषणा की थी, जिसे दुनियाभर में कड़ी आलोचना के बाद 15 मई तक टाल दिया गया था.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से ‘वॉट्सऐप’ को 15 मई से प्रभावी होने जा रही उसकी नई ‘निजता नीति’ [Privacy policy] एवं सेवा शर्तें लागू करने से रोकने का अनुरोध किया.

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने फेसबुक के स्वामित्व वाले सोशल नेटवर्किंग मंच वॉट्सऐप की नई निजता नीति को चुनौती देने वाली एक याचिका के जवाब में दाखिल किए गए अपने हलफनामे में यह कहा.

याचिकाकर्ता सीमा सिंह, एम. सिंह और विक्रम सिंह ने दलील दी है कि नई निजता नीति से भारतीय डेटा संरक्षण और निजता कानूनों के बीच बड़ा अंतराल होने का संकेत मिलता है.

नई निजता नीति के तहत यूजर (उपयोगकर्ता) को या तो ऐप को स्वीकार करना होगा या उससे बाहर निकलना होगा, लेकिन वे अपने डेटा फेसबुक के स्वामित्व वाले किसी तीसरे ऐप से साझा करने से इनकार नहीं कर सकेंगे.

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और जस्टिस जसमीत सिंह की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तारीख तय की है.

उल्लेखनीय है कि फेसबुक के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप ने जनवरी में अपनी निजता पॉलिसी में बदलाव किया था, जिसे स्वीकार करने की आख़िरी तारीख आठ फरवरी तय की गई थी.

इन बदलावों की वजह से वॉट्सऐप को भारत सहित वैश्विक स्तर पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था. दुनियाभर में इस बात को लेकर चिंता जताई गई थी कि वॉट्सऐप यूजर्स के डेटा को अपनी मूल कंपनी फेसबुक से साझा कर सकती है, जिसके बाद वॉट्सऐप ने ये पॉलिसी बदलाव 15 मई तक टाल दिए थे.

इससे पहले वॉट्सऐप ने कहा था कि उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जारी रखने के लिए यूजर्स को नई शर्तों और नीति पर आठ फरवरी तक सहमति देनी होगी.

वॉट्सऐप का कहना था कंपनी यह ब्योरा नहीं रखती कि यूजर्स किसे संदेश भेज रहे हैं या किसे कॉल कर रहे हैं. साथ ही वह संपर्कों को फेसबुक से साझा नहीं करती है.

फेसबुक के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप ने कहा था, ‘ये बदलाव वॉट्सऐप पर वैकल्पिक ‘बिजनेस फीचर्स’ से जुड़े हैं. इनसे हमारे द्वारा डेटा संग्रहण और उसके इस्तेमाल को लेकर और पारदर्शिता आएगी.’

यह घटनाक्रम इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि भारत वॉट्सऐप के लिए सबसे बड़े बाजारों में से है. भारत में वॉट्सऐप यूजर्स की संख्या 40 करोड़ से अधिक है.

नीतियों को लेकर हुए इस विवाद के बीच वॉट्सऐप के प्रतिद्वंद्वी प्लेटफॉर्म सिग्नल और टेलीग्राम के डाउनलोड में काफी इजाफा हुआ है.

केंद्र द्वारा दायर किए गए हलफनामे में कहा गया है, ‘उपरोक्त याचिका के संदर्भ में यह विनम्र अनुरोध है कि अदालत को प्रतिवादी नं. 2 (वॉट्सऐप) द्वारा 4 जनवरी 2021 को लाई गई और 8 फरवरी, 2021 या उसके बाद की तारीख से लागू होने वाली नई गोपनीयता नीति और नई सेवा की शर्तों लागू होने से रोकना चाहिए.’

इससे पहले मार्च की शुरुआत में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को वॉट्सऐप की नई निजता नीति की पड़ताल के लिए तीन सप्ताह का वक्त दिया था.

केंद्र ने तब को अदालत को बताया कि 15 मई से प्रभावी होने जा रही ‘वॉट्सऐप’ की नई निजता नीति की उच्चतम स्तर पर पड़ताल की जा रही है और सरकार इस मुद्दे पर उससे कुछ स्पष्टीकरण मांग रही है.

जस्टिस संजीव सचदेवा ने इस दलील पर संज्ञान लेते हुए इस कार्य के लिए केंद्र को तीन सप्ताह का वक्त दिया और विषय की सुनवाई के लिए अगली तारीख 19 अप्रैल निर्धारित करते हुए एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा.

अदालत तब ऐप की नई निजता नीति के खिलाफ एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जहां केंद्र सरकार के वकील कीर्तिमान सिंह ने कहा कि वे इस मुद्दे पर और अधिक स्पष्टता जुटाने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं और वॉट्सऐप से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं.

इससे पहले, केंद्र ने उच्च न्यायालय से कहा था कि वॉट्सऐप भारतीय उपयोगकर्ताओं से अलग तरह का बर्ताव कर रहा है, उसकी नई नीति सरकार के लिए चिंता का विषय है और वह इस मुद्दे पर गौर कर रही है.

अधिवक्ता मनोहर लाल के मार्फत दायर चैतन्य रोहिल्ला की याचिका में दावा किया गया है कि वॉट्सऐप की नई निजता नीति किसी उपयोगकर्ता की ऑनलाइन गतिविधियों तक पूर्ण रूप से पहुंच प्रदान करती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)