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कोविड टीकाकरण के बाद 16 मार्च तक 89 लोगों की मौत हुई, लेकिन टीका ज़िम्मेदार नहीं: सरकार

स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने राज्यसभा में बताया कि टीके के प्रतिकूल प्रभाव की निगरानी एक सुव्यवस्थित और मज़बूत निगरानी प्रणाली के ज़रिये की जाती है. बीते 16 जनवरी को भारत में देशव्यापी कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई थी.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि 16 मार्च तक कोविड-19 टीकाकरण किए जाने के बाद 89 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन अभी तक वर्तमान साक्ष्य के अनुसार इस टीके को किसी भी मृत्यु के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है.

स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को बताया कि टीके के प्रतिकूल प्रभाव (एईएफआई- एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्युनाजेशन) की निगरानी एक सुव्यवस्थित और मजबूत निगरानी प्रणाली के जरिये की जाती है.

चौबे ने कहा, ‘दिनांक 16 मार्च 2021 तक की स्थिति के अनुसार, कोविड-19 टीकाकरण के बाद कुल 89 लोगों की मौत की सूचना है. अभी तक मौजूद साक्ष्य के अनुसार कोविड टीकाकरण को किसी भी मौत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है.’

उन्होंने कहा कि एईएफआई की व्यवस्था के लिए उचित उपाय किए गए हैं. इनमें टीकाकरण स्थलों पर जरूरी किट की उपलब्घता, तुरंत रेफरल और 30 मिनट की देखरेख शामिल हैं.

भारत में किन कंपनियों द्वारा कोविड-19 वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनियों की जानकारी से संबंधित एक अन्य सवाल के जवाब में अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है. सीरम इंस्टिट्यूट इसका निर्माण ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और फार्मास्यूटिकल कंपनी एस्ट्राजेनका के सहयोग से कर रही है.

इसके अलावा हैदराबाद का भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा विकसित वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है. यह कंपनी भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) के सहयोग से इसका निर्माण कर रही है.

बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 जनवरी को भारत में देशव्यापी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी. टीकाकरण के पहले चरण में फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया गया था.

उसके बाद एक मार्च से कोविड-19 टीकाकरण का दूसरा चरण शुरू हो गया है. इस चरण में 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों और 45 साल से ऊपर के उन लोगों को जिन्हें स्वास्थ्य  संबंधी गंभीर समस्याएं हों, को टीका लगाया जा रहा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)