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महाराष्ट्र: परमबीर सिंह द्वारा गृह मंत्री पर लगाए आरोपों की जांच के लिए समिति का गठन

राज्य सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज कैलाश उत्तमचंद चांदीवाल करेंगे, जिन्हें छह महीने में रिपोर्ट देने को कहा गया है. मुंबई पुलिस आयुक्त पद से तबादले के बाद परमबीर सिंह ने गृह मंत्री अनिल देशमुख पर सचिन वझे को सौ करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य देने का आरोप लगाया था.

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परमबीर सिंह और अनिल देशमुख. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बीते मंगलवार को उच्च न्यायालय के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक समिति गठित की.

एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि जस्टिस कैलाश उत्तमचंद चांदीवाल (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया है.

राज्य सरकार का ये फैसला ऐसे समय पर आया है जब बॉम्बे हाईकोर्ट जांच की मांग वाली परमबीर सिंह की याचिका पर बुधवार (31 मार्च) को सुनवाई करेगा. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सिंह को निर्देश दिया था कि वे अपने मामले को लेकर हाईकोर्ट के पास जाएं.

मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से तबादले के बाद सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि देशमुख ने पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को 100 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य दिया था. हालांकि देशमुख ने इन आरोपों से इनकार किया था.

एनआईए, उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक सामग्री वाली एसयूवी मिलने के मामले की भी जांच कर रही है जिसमें मुंबई पुलिस के सहायक निरीक्षक सचिन वझे को गिरफ्तार किया गया है.

एनआईए कारोबारी मनसुख हिरन की हत्या में भी वझे की कथित भूमिका की जांच कर रही है.

इस मामले में उच्च न्यायालय ने वकील को फटकार लगाई

वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख और मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच का अनुरोध करने वाली याचिका को लेकर एक वकील को फटकार करते हुए कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं अकसर ‘सस्ती लोकप्रियता’ के लिए दायर की जाती हैं.

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस मनीष पिताले की पीठ ने जयश्री पाटिल की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की.

याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया था कि वह सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को देशमुख के खिलाफ लगे आरोपों की जांच का निर्देश दे.

पाटिल ने पिछले सप्ताह याचिका दायर कर कहा था कि देशमुख और सिंह ने उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास के बाहर मिली विस्फोटक सामग्री युक्त एसयूवी वाहन के मालिक मनसुख हिरन की हत्या, मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वझे की गिरफ्तारी और संबंधित घटनाक्रमों के दौरान अपने पेशेवर कर्तव्य का पालन नहीं किया.

देशमुख ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है.

पाटिल ने बीते मंगलवार को अदालत से कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले में एक स्थानीय थाने में भी शिकायत दर्ज कराई है.

अदालत ने कहा, ‘प्रथमदृष्ट्या हमारा मानना है कि इस प्रकार की याचिकाएं घटिया प्रसिद्धि पाने के लिए दायर की जाती हैं. यह अस्वीकार्य है.’

महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने पीठ से कहा कि परमबीर सिंह ने भी उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है और इस प्रकार मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ बुधवार को इस पर सुनवाई करेगी.

उन्होंने पाटिल की याचिका के बारे में कहा कि याचिका को ‘बहुत खराब तरीके से तैयार’ किया गया है.

पीठ ने कहा कि पाटिल की याचिका में केवल राज्य के गृह मंत्री एवं सिंह के बीच हुई बातचीत को ही पेश किया गया है.

कोर्ट ने पाटिल से कहा, ‘आप कानून में डॉक्टरेट हैं. अपनी याचिका में कोई मौलिक अनुरोध कीजिए. आपने केवल पूर्व आयुक्त एवं गृह मंत्री की बाचतीत को फिर से पेश किया है.’

अदालत ने कहा, ‘और इससे आपका क्या लेना-देना है? आपने किस कारण याचिका दायर की है.’

उच्च न्यायालय ने इसके बाद कुंभकोणी से इस मामले से संबंधित सभी यचिकाओं को एक साथ जोड़ने को कहा, ताकि कोई असंगत आदेश पारित न हो सके. अदालत पाटिल की याचिका और अन्य संबंधित याचिकाओं, यदि कोई है, पर एक अप्रैल को सुनवाई करेगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)