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लाल क़िला हिंसा: आरोपी को ज़मानत देते हुए अदालत ने कहा- मौजूदगी संलिप्तता का प्रमाण नहीं

केंद्र के नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में एक शख़्स को ज़मानत देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि उस समय आरोपी की  मौजूदगी और लाल क़िले की दीवार पर चढ़ जाने के आधार पर उसकी हिरासत को सही नहीं ठहरा सकते.

दिल्ली के लाल किला परिसर में प्रदर्शनकारी किसान. (फोटो: पीटीआई)

दिल्ली के लाल किला परिसर में प्रदर्शनकारी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में एक व्यक्ति को जमानत दे दी और कहा कि उस समय आरोपी की महज मौजूदगी एवं लाल किले की दीवार पर उसका चढ़ जाना उसे हिरासत में रखे जाने को सही नहीं ठहरा सकते हैं.

अदालत ने यह भी कहा कि उकसाने या पुलिस पर हमला करने वाले के तौर पर सक्रिय भूमिका भी आरोपी को नहीं दी गई है.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चारू अग्रवाल ने आरोपी आकाशप्रीत सिंह को 25000 रुपये के जमानती बॉन्ड और उतनी ही राशि के मुचलके पर जमानत दे दी.

अदालत ने कहा कि फिलहाल सिंह के विरुद्ध अभियोजन पक्ष के पास एक मात्र सबूत मौके यानी लाल किले पर उसके मौजूद होने के फोटो हैं जिसमें वह दीवार पर चढ़ रहा है.

अदालत ने कहा, ‘इस कथित अपराध में आवेदक को (सिंह को) बतौर उकसाने वाले या पुलिस पर हमला करने वाले के तौर पर सक्रिय भूमिका नहीं दी गई थी, बस वहां उसका मौजूद होना एवं दीवार पर चढ़ना ही उसे और हिरासत में रखे जाने को सही नहीं ठहरा सकते क्योंकि वह तीन फरवरी, 2021 से ही न्यायिक हिरासत में है.’

न्यायाधीश अग्रवाल ने कहा कि उसके विरुद्ध जांच भी पूरी हो गई है. सिंह के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को गलत ढंग से फंसाया गया है.

सरकारी वकील ने सिंह की जमानत अर्जी का विरोध किया और कहा कि शुरू में सिंह ने अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर संजय गांधी नगर और बुराड़ी में पुलिस बैरीकेड को तोड़ा और बाद में वे जबरन लालकिले में घुस गए और वहां पुलिसकर्मियों पर हमला किया.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, आकाशप्रीत सिंह को 3 फरवरी 2021 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. उनके खिलाफ आईपीसी की धाराओं 307, 308, 395, 397, 427, 188, 120B और 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

इसके साथ ही शस्त्र अधिनियम की धारा 59, सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम, 1984 की क्षति की रोकथाम की धारा 3 और प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम की धारा 30 केतहत भी मामला दर्ज किया गया था.

बता दें कि केंद्र के तीन नए और विवादित कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की मांग को लेकर किसान यूनियनों ने गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड निकाली थी और इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर उस समय अराजकता की स्थिति पैदा हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने अवरोधकों को तोड़ दिया, पुलिस के साथ झड़प की, वाहनों को पलट दिया और लाल किले पर एक धार्मिक झंडा लगा दिया.

इस संबंध में दिल्ली पुलिस ने राजद्रोह का मामला भी दर्ज किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)