राजनीति

यूपी पंचायत: सज़ायाफ़्ता पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की पत्नी की उम्मीदवारी भाजपा ने रद्द की

उत्तर प्रदेश में भाजपा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए बीते आठ अप्रैल को ज़िला पंचायत सदस्य के लिए संगीता सिंह सेंगर को उम्मीदवार घोषित किया था, जिसकी विपक्षी दलों ने आलोचना की थी. उनके पति पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव ज़िले में 17 वर्षीय एक किशोरी से बलात्कार मामले में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे हैं.

संगीता सिंह सेंगर. (फोटो साभार: फेसबुक)

संगीता सिंह सेंगर. (फोटो साभार: फेसबुक)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में भाजपा ने पंचायत चुनाव में सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की पत्नी संगीता सिंह सेंगर की उम्मीदवारी रद्द कर दी है.

संगीता को उन्नाव जिले में जिला पंचायत सदस्य चुनाव के लिए भाजपा की ओर से उम्मीदवार घोषित करने के चौथे दिन यह घटनाक्रम हुआ.

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने बीते रविवार को एक बयान में कहा, ‘उन्नाव जिले के वार्ड नंबर 22 में संगीता सिंह सेंगर का टिकट रद्द किया जाता है.’

उन्होंने कहा, ‘संगीता सिंह सेंगर भाजपा की अधिकृत उम्मीदवार नहीं रहेंगी और उन्नाव में पार्टी के जिलाध्यक्ष से शीघ्र ही वहां से तीन नाम भेजने का आग्रह किया गया है.’

हालांकि, उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा 15 अप्रैल से शुरू होने वाले चार चरण के पंचायत चुनावों में विजयी होगी.

उन्नाव में 26 अप्रैल को पंचायत चुनाव होंगे.

गौरतलब है कि सिंह ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए बीते आठ अप्रैल को जिला पंचायत सदस्य के अधिकृत उम्मीदवारों की जिले की सूची जारी की थी, जिसमें जिले के वार्ड संख्‍या 22 (फतेहपुर चौरासी तृतीय) से संगीता सिंह सेंगर को उम्मीदवार घोषित किया गया था.

संगीता पूर्व में जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं.

संगीता सिंह सेंगर को उम्मीदवार बनाए जाने पर भगवा पार्टी की आलोचना करते हुए समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा था, ‘भाजपा का दोहरा चरित्र है. एक तरफ भाजपा अपराधियों के खात्‍मे की बात करती है और दूसरी तरफ उनका महिमामंडन भी करती है. भाजपा के शासन में रहते अपराध खत्म नहीं हो सकता है.’

उल्लेखनीय है कि पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को उन्नाव जिले में 17 वर्षीय एक किशोरी से बलात्कार मामले में दोषी करार देते हुए दिल्‍ली की तीस हजारी अदालत ने 20 दिसंबर 2019 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

सेंगर को जिस समय यह सजा सुनाई गई थी, वह उन्नाव जिले के बांगरमऊ से भाजपा विधायक थे. सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी.

आरोप था कि कुलदीप सेंगर ने चार जून 2017 को पीड़िता का बलात्कार किया था. उस समय पीड़िता की उम्र 17 साल थी.

इसके बाद 2018 में लखनऊ में  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के घर के बाहर पीड़िता ने धमकी दी कि अगर पुलिस उसकी शिकायत दर्ज नहीं करेगी तो वह खुद को आग लगा लेगी. इसके बाद पिछले साल अप्रैल में सेंगर को गिरफ्तार किया गया था.

उत्तर प्रदेश के बांगरमऊ से चार बार भाजपा के विधायक रह चुके सेंगर को अगस्त 2019 में पार्टी से तब निकाल दिया गया जब पीड़िता और उसका परिवार सड़क हादसे का शिकार हो गया.

वह 28 जुलाई 2019 को रायबरेली जिले में हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थी. पीड़िता की कार को एक तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दिया था, जिसमें उसके दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी और उनका वकील गंभीर रूप से घायल हो गया था.

हादसे के दो दिन बाद सीबीआई ने 30 जुलाई 2019 को सेंगर, उसके भाई मनोज सिंह सेंगर, उत्तर प्रदेश के एक मंत्री के दामाद अरुण सिंह और सात अन्य के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था. पीड़िता के साथ हुए हादसे में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और 10 अन्य को आरोपी बनाया गया था.

इसके अलावा पीड़िता के पिता की कथित तौर पर पिटाई की गई थी और अवैध हथियार रखने का मामला दर्ज किया गया था. न्यायिक हिरासत के दौरान 29 अप्रैल 2018 को उनकी मौत हो गई थी. इस आरोप में अदालत ने सेंगर और 10 अन्य के खिलाफ आरोप तय किए थे.

उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर और छह अन्य लोगों को दस साल कैद की सजा सुनाई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)