मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल में एक माली ले रहा है कोविड-19 जांच के नमूने

मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले के सांची शासकीय सिविल अस्पताल का मामला. यह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी के विधानसभा क्षेत्र में आता है. दूसरी ओर राज्य के कोविड-19 से सर्वाधिक प्रभावित ज़िले इंदौर में लोगों की मौत होने से अस्पतालों के साथ अंतिम संस्कार स्थलों पर भी भारी दबाव बढ़ गया है.

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(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले के सांची शासकीय सिविल अस्पताल का मामला. यह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी के विधानसभा क्षेत्र में आता है. दूसरी ओर राज्य के कोविड-19 से सर्वाधिक प्रभावित ज़िले इंदौर में लोगों की मौत होने से अस्पतालों के साथ अंतिम संस्कार स्थलों पर भी भारी दबाव बढ़ गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)
(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

रायसेन/इंदौर: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सांची शासकीय सिविल अस्पताल में एक माली कोविड-19 जांच के लिए लोगों के नमूने ले रहे हैं. इनका नाम हल्केराम है और वह इस अस्पताल में दैनिक वेतन पर कार्यरत हैं, जिन्हें असलियत में अस्पताल परिसर के पेड़-पौधों की देखरेख के लिए रखा गया है.

यह अस्पताल मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी के विधानसभा क्षेत्र सांची में आता है और रायसेन जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर है.

सिविल अस्पताल सांची के विकासखंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. राज्यश्री तिड़के ने मंगलवार को बताया, ‘अस्पताल में पदस्थ लगभग आधा स्टॉफ कोरोना पॉजिटिव हो चुका है. कर्मचारियों की कमी के कारण से ही इस माली से लोगों के कोरोना नमूने लेने का काम कराया जा रहा है.’

उन्होंने कहा कि वह सांची सिविल अस्पताल में स्टॉफ की कमी के बारे में पहले ही वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को जानकारी दे चुकी हैं.

मीडियाकर्मियों ने कुछ लोगों के नमूना लेते हुए इस माली को सोमवार को अपने कैमरे में कैद कर लिया.

जब मीडियाकर्मियों ने इसके बारे में माली हल्केराम को पूछा तो उन्होंने बताया, ‘बीएमओ द्वारा मुझे जो काम सौंपा गया है, वह मैं कर रहा हूं. मैं अब तक 278 लोगों के कोरोना नमूने ले चुका हूं और अभी भी ले रहा हूं.’

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक हल्केराम ने कहा, ‘मुझे नमूने लेने के लिए अन्य कर्मचारियों की तरह ही प्रशिक्षित किया गया है. जब अन्य कर्मचारी संक्रमित हैं तो मैं नमूने ले रहा हूं.’

डॉ. राज्यश्री तिड़के ने कहा, ‘हमने अपने अन्य कर्मचारियों को भी नमूने लेने के लिए प्रशिक्षित किया है. आपातकालीन परिस्थितियों में शायद ऐसी चीजें एक बार में ही हो जाएं.’

वहीं, यहां भर्ती कई मरीजों ने बताया कि अस्पताल के कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहते हैं. अस्पताल में पदस्थ ड्रेसर एवं अन्य कर्मचारी भी गायब हैं. डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं को पास के शहरों विदिशा या रायसेन रेफर कर दिया जाता है.

उन्होंने कहा कि उन्होंने इस संबंध में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी एवं कलेक्टर उमाशंकर भार्गव से भी शिकायतें की है, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं आया.

इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी से प्रतिक्रिया लेने के लिए कई बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका.

इस बीच चौधरी मंगलवार को 17 अप्रैल के दमोह विधानसभा उपचुनाव प्रचार से संबंधित अपनी तस्वीरें पोस्ट की थीं.

इसके अलावा एक और वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें जबलपुर के वीजेएफ अस्पताल में एक महिला कर्मचारी कोविड-19 टीकाकरण के दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार करती हुई दिखाई दे रही है.

वीडियो वायरल होने के बाद अधिकारियों ने उसे ड्यूटी से हटा दिया और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर दी.

मध्य प्रदेश में बीते मंगलवार को एक दिन में अब तक सर्वाधिक 6,489 मामले दर्ज किए गए थे. इसके साथ ही संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 344,634 हो गए और मृतक संख्या बढ़कर 4,221 हो गई है.

इंदौर में अस्पतालों के साथ अंतिम संस्कार स्थलों पर भी भारी दबाव

कोरोना कर्फ्यू (लॉकडाउन) के कारण इंदौर में इन दिनों सन्नाटा पसरा है, लेकिन अंतिम संस्कार स्थलों में शव लाने वाली एम्बुलेंस का सायरन और महामारी के हाथों अपनों को खोने वाले लोगों के विलाप के स्वर रह-रहकर गूंज रहे हैं.

अधिकारियों ने बताया कि इंदौर, सूबे में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जहां इसकी दूसरी लहर के प्रकोप के कारण सारे प्रमुख अस्पताल मरीजों से भर गए हैं. इसके साथ ही महामारी के कारण दम तोड़ने वाले लोगों के आंकड़े में भी लगातार इजाफा हो रहा है.

शहर के रीजनल पार्क मुक्तिधाम के एक कर्मचारी ने नाम जाहिर न किए जाने की शर्त पर मंगलवार को बताया, ‘इस श्मशान घाट आज सुबह से दोपहर तक करीब 15 शव पहुंच चुके थे. इनमें से 12 लोगों का अंतिम संस्कार कोविड-19 के प्रोटोकॉल के मुताबिक किया गया.’

उन्होंने बताया कि रीजनल पार्क मुक्तिधाम के शेड में आमतौर पर एक साथ 12 शवों के दाह संस्कार का इंतजाम है. लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण काल में सुविधाओं को बढ़ाकर एक साथ 35 चिताएं जलाने का इंतजाम किया गया है.

कर्मचारी ने बताया, ‘आपात स्थिति के बारे में सोचकर हमने रीजनल पार्क मुक्तिधाम में एक भूखंड भी तैयार रखा है, जहां 15 और चिताएं जलाई जा सकती हैं. इस तरह मुक्तिधाम में एक साथ 50 चिताएं जलाई जा सकती हैं.’

उन्होंने बताया कि पार्थिव शरीर को अग्नि के हवाले किए जाने के बाद मुक्तिधाम की ओर से दिवंगत व्यक्ति के परिजनों को टोकन दिया जाता है जिस पर लिखे नंबर की मदद से वे उसकी जली चिता की पहचान कर राख से अस्थि संचय करते हैं.

कर्मचारी ने बताया, ‘हिंदुओं की धार्मिक परंपराओं के मुताबिक अस्थि संचय की रस्म आमतौर पर दाह संस्कार के तीसरे दिन होती है, लेकिन मुक्तिधाम में अर्थियां ज्यादा आने से हम लोगों से अनुरोध कर रहे हैं कि वे दिवंगत स्वजन की अस्थियां अगले ही दिन सहेज लें ताकि नई चिताओं को स्थान मिल सके.’

स्वास्थ्य विभाग के नियमित बुलेटिन में बताया गया कि पिछले 24 घंटे के दौरान इंदौर जिले में 18 प्रतिशत की ऊंची संक्रमण दर के साथ महामारी के 1,552 नए मरीज मिले, जो दैनिक स्तर पर इसके मामलों का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

बुलेटिन के मुताबिक, पिछले 24 घंटे के दौरान जिले में छह संक्रमितों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 35 लाख की आबादी वाले जिले में 24 मार्च 2020 से लेकर अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 80,986 मरीज मिले हैं. इनमें से 1,011 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है.

इस बीच गैर सरकारी संगठन ‘जन स्वास्थ्य अभियान मध्य प्रदेश’ के सह समन्वयक अमूल्य निधि ने दावा किया कि प्रशासन द्वारा महामारी के मरीजों और मृतकों के सही आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘अस्पतालों, श्मशानों और कब्रिस्तानों की मौजूदा स्थिति महामारी को लेकर जारी होने वाले सरकारी आंकड़ों की पोल खोल रही है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)