कोविड-19ः कुंभ का दौरा करने वाले भाजपा विधायक संक्रमित, भीड़ के बचाव में उतरे

उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक सुनील भराला का कहना है कि कुंभ की आस्था कोरोना वायरस से बहुत बड़ी है गंगा मां ही इस कोरोना का सर्वनाश करेंगी और पिछले साल निज़ामुद्दीन मरकज़ में जुटी भीड़ की तुलना कुंभ से नहीं की जानी चाहिए.

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भाजपा विधायक सुनील भराला (फोटो साभारः ट्विटर)

उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक सुनील भराला का कहना है कि कुंभ की आस्था कोरोना वायरस से बहुत बड़ी है गंगा मां ही इस कोरोना का सर्वनाश करेंगी और पिछले साल निज़ामुद्दीन मरकज़ में जुटी भीड़ की तुलना कुंभ से नहीं की जानी चाहिए.

भाजपा विधायक सुनील भराला (फोटो साभारः ट्विटर)
भाजपा विधायक सुनील भराला (फोटो साभारः ट्विटर)

नई दिल्लीः उत्तराखंड के हरिद्वार में चल रहे कुंभ मेले का दौरा करने वाले उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक सुनील भराला कोरोना संक्रमित पाए गए हैं और उन्होंने सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का बचाव भी किया है.

एनडीटीवी पर हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान उमड़ी भीड़ और पिछले साल दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में इकट्ठा हुई भीड़ की धारणा में विसंगति को लेकर चर्चा हुई थी, जहां भाजपा विधायक सुनील भराला ने कुंभ में उमड़ी व्यापक भीड़ का बचाव किया है.

भाजपा विधायक भराला के कोरोना संक्रमित होने को सबसे पहले लॉजिकल इंडियन ने रिपोर्ट किया था. हालांकि, वेबसाइट ने यह स्पष्ट किया है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि क्या वह (भराला) कुंभ मेले के दौरान संक्रमित हुए हैं या उससे पहले से ही संक्रमित थे.

इस दौरान विधायक ने कहा, ‘कुंभ की आस्था कोरोना वायरस से बहुत बड़ी है.’

राज्य के श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष भराला एनडीटीवी के हिंदी और अंग्रेजी चैनल पर प्रसारित कार्यक्रमों में पहुंचे थे और दावा किया था कि आस्था कोरोना प्रोटोकॉल से ऊपर है, लेकिन उन्होंने एनडीटीवी इंडिया के साथ बातचीत में स्वीकार किया कि वह कोरोना संक्रमित थे.

दरअसल 16 अप्रैल को यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो के 10:30 मिनट पूरे होने पर देखा जा सकता है कि भराला कह रहे हैं कि उन्होंने शाही स्नान के लिए कुंभ मेले का दौरा किया था.

उन्होंने कहा, ‘वहां लगभग एक करोड़ लोग थे, सभी तरह के प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा था.’

इस बीच कार्यक्रम के होस्ट ने भराला से पूछा कि जब प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद कोरोना संक्रमित हैं और कई अन्य नेता इससे जूझ रहे हैं, ऐसी स्थिति में क्या व्यापक स्तर पर कुंभ मेले का आयोजन जारी रहना चाहिए?

वीडियो के 11:01 मिनट पर सवाल के जवाब में भराला दो बार कहते हैं, ‘मैं खुद कोरोना संक्रमित हूं.’

वहीं, एनडीटीवी अंग्रेजी के कार्यक्रम में जिसे एनडीटीवी ने ट्वीट किया और बाद में भराला ने इसे रिट्वीट किया, उसमें उन्होंने (भराला) कहा, ‘कुंभ की आस्था, कोरोना से बहुत बड़ी है और गंगा मां ही इस कोरोना का सर्वनाश करेंगी.’

उन्होंने यहा भी कहा कि कुंभ को मरकज से जोड़ना सही नहीं है. इस बीच एंकर ने उनसे पूछा, ‘क्यों? अगर आप इसे धर्म के चश्मे से नहीं देखते तो इसकी तुलना की जानी चाहिए. दोनों मामलों में भीड़ थी.’

इस पर भराला ने कहा, ‘जब दिल्ली में मरकज हुआ तो पूरे देश में लॉकडाउन था. अब कहीं लॉकडाउन नहीं है. कोरोना नियमों का पालन किया जा रहा है. हरिद्वार जाइए और देखिए. पुलिस वहां मौजूद है. हर कोई रिपोर्ट के साथ आ रहा है.’

वास्तव में तबलीगी जमात का कार्यक्रम 13 मार्च 2020 को शुरू हुआ था, ऐसे समय में जब स्वास्थ्य मंत्री ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने से इनकार कर दिया था. हालांकि, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अगले दिन ही पचास से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी थी. 24 मार्च को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद दिल्ली पुलिस ने जमातियों से मरकज खाली करने को कहा था.

एंकर ने भराला से पूछा कि कुंभ में उमड़ी भीड़ का यह कहकर बचाव करना कि लॉकडाउन नहीं लगा हुआ है, जबकि देश में कोरोना के मामले लगातर बढ़ रहे हैं, कितना सही है?

इस पर भराला ने कहा, ‘कुंभ बारह साल में एक बार आता है, मौनी अमावस्या 48 साल में एक बार आती है. भक्ति बड़ी हो जाती है, कोरोना छोटा पड़ जाता है.’

उन्होंने बाद में कहा, ‘गंगा मां कोरोना का सर्वनाश करेंगी और लोगों को इस तीर्थयात्रा से शक्ति मिलेगी.’

बता दें कि भराला एकमात्र नहीं हैं, जो कुंभ मे उमड़ी भीड़ की गंभीरता को कम आंक रहे हैं.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बीते 13 अप्रैल को इस बात पर जोर दिया था कि दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मरकज में हुआ कार्यक्रम कुंभ से ज्यादा खतरनाक था.

उन्होंने कहा था कि कुंभ और मरकज के बीच कोई तुलना नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा था कि कुंभ को मरकज से जोड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि मरकज एक कोठी की तरह की बंद जगह में हुआ था, जबकि कुंभ का क्षेत्र बहुत बड़ा, खुला हुआ और विशाल है.

उन्होंने कहा था कि कुंभ और मरकज के बीच कोई तुलना नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा था कि कुंभ को मरकज से जोड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि मरकज एक कोठी की तरह की बंद जगह में हुआ था, जबकि कुंभ का क्षेत्र बहुत बड़ा, खुला हुआ और विशाल है.

मुख्यमंत्री ने यहां तक कह दिया था, ‘सबसे महत्वपूर्ण है कि कुंभ गंगा नदी के किनारे है. मां गंगा का आशीर्वाद यहां बह रहा है, इसलिए यहां कोरोना नहीं होना चाहिए.’

हरिद्वार के विभिन्न अखाड़ों के कई साधु संत भी कोविड-19 की चपेट में आ चुके हैं जिनमें अखाडा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाडे के महंत नरेंद्र गिरि भी शामिल हैं. इतना ही नहीं मध्य प्रदेश से आए निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर कपिल देव की कोविड-19 के कारण 13 अप्रैल को मृत्यु हो चुकी है.

कुंभ में फैल रहे कोरोना के मद्देनजर निरंजनी अखाड़े ने 17 अप्रैल से खुद को कुंभ से दूर कर लिया है. हालांकि बीते शुक्रवार को निरंजनी अखाड़े द्वारा हरिद्वार महाकुंभ के 17 अप्रैल से समापन की घोषणा किए जाने के बाद अन्य अखाड़े विरोध में उतर आए थे और इस मसले पर माफी मांगने को कहा था.

इस बीच शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत समाज से उत्तराखंड के हरिद्वार में चल रहे कुंभ को ‘प्रतीकात्मक’ रखने की अपील की, ताकि इस महामारी के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ी जा सके.

प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर यह जानकारी दी कि उन्होंने जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि से इस सिलसिले में फोन पर बात की और साथ ही संतों का कुशल-क्षेम भी पूछा.

उन्होंने कहा, ‘मैंने प्रार्थना की है कि दो शाही स्नान हो चुके हैं और अब कुंभ को कोरोना के संकट के चलते प्रतीकात्मक ही रखा जाए. इससे इस संकट से लड़ाई को एक ताकत मिलेगी.’

बता दें कि कोरोना के बीच अब तक दो शाही स्नान के दौरान 48.51 लाख लोग हिस्सा ले चुके हैं. हरिद्वार महाकुंभ मेला स्वास्थ्य कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार पांच अप्रैल से लेकर 14 अप्रैल तक कुंभ मेला क्षेत्र में 68 साधु संतों की जांच रिपोर्ट में उनके महामारी से पीड़ित होने की पुष्टि हो चुकी है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)