कोविड-19

कोविड-19: रेमडेसिविर वितरण अभियान के ख़िलाफ़ गुजरात भाजपा अध्यक्ष और अन्य को नोटिस

रेमडेसिविर इंजेक्शन की जमाखारी और वितरण के आरोप में गुजरात हाईकोर्ट ने विधानसभा में विपक्ष के नेता परेश धानाणी की याचिका पर राज्य भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल, विधायक हर्ष सांघवी और अन्य को नोटिस जारी किया है. भाजपा ने सूरत कार्यालय से ये इंजेक्शन मुफ़्त बांटने का अभियान दस अप्रैल से शुरू किया था.

सीआर पाटिल. (फोटो साभार: फेसबुक)

सीआर पाटिल. (फोटो साभार: फेसबुक)

अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष सीआर पाटिल और विजय रूपाणी सरकार को रेमडेसिविर इंजेक्शन की खरीद और इसके वितरण के संबंध में मंगलवार को नोटिस जारी किए.

रेमडेसिविर इंजेक्शन संक्रमण के उपचार में काम आता है.

दरअसल राज्य भाजपा ने पार्टी के सूरत कार्यालय से इंजेक्शन की पांच हजार वायल (इंजेक्शन की शीशियां) नि:शुल्क बांटने का अभियान दस अप्रैल से शुरू किया था.

विधानसभा में विपक्ष के नेता और अमरेली से कांग्रेस विधायक परेश धानाणी ने इस संबंध में याचिका दाखिल की, जिसे न्यायाधीश जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस वैभव नानावटी की पीठ ने स्वीकार करते हुए सूरत से भाजपा विधायक हर्ष सांघवी और जिलाधिकारी को भी नोटिस जारी किए.

उच्च न्यायालय ने खाद्य एवं औषधि आयुक्त को पीठ को यह सूचित करने को कहा कि धानाणी की 14 अप्रैल को दाखिल याचिका पर क्या कार्रवाई की गई.

धानाणी ने गुजरात भाजपा अध्यक्ष पाटिल के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और अपनी याचिका में कहा था कि सत्तारूढ़ दल ने दवा अवैध रूप से खरीदी है और इसका भंडारण किया है और उसके पास ऐसा करने का लाइसेंस नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, धानाणी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता आनंद याग्निक ने अदालत को बताया, ‘सूरत में भाजपा कार्यालय में कोविड प्रमाण पत्र और डॉक्टर के पर्चे प्रदान करने की शर्त पर रेमडेसिविर इंजेक्शन वितरित करना, अवैध है और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम, फार्मेसी अधिनियम और ड्रग्स नियंत्रण अधिनियम के कई प्रावधानों का उल्लंघन करता है. सीआर पाटिल और अन्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए गांधीनगर खाद्य एवं औषधि आयुक्त को एक आवेदन दिया है.’

याग्निक ने बताया, ‘सांसद और राज्य भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल के साथ विधायक हर्ष सांघवी द्वारा सूरत भाजपा कार्यालय से रेमडेसिविर इंजेक्शन को स्टॉक करना और इसे वितरित करने की अवैध कार्रवाई को औषधि आयुक्त द्वारा देखा जाना चाहिए और इसकी स्थिति रिपोर्ट माननीय अदालत को प्रदान करनी चाहिए.’

मालूम हो कि गुजरात में इस इंजेक्शन को लेकर उस वक्त विवाद शुरू हो गया जब इस इंजेक्शन की बढ़ती मांग के बीच भाजपा के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने बीते 10 अप्रैल से इन्हें मुफ्त में बांटना शुरू कर दिया था.

पाटिल ने अपने गृहनगर सूरत में रेमडेसिविर की कमी के बीच इस दवा की 5000 खुराकें वितरित करने की घोषणा कर विवादों को जन्म दिया था. दवा का नि:शुल्क वितरण दस अप्रैल से भाजपा के सूरत कार्यालय में शुरू हुआ. जिस पर विपक्षी दल कांग्रेस ने अवैध रूप से दवा को खरीदने और इसके भंडारण के लिए उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की थी.

बता दें कि रेमडेसिविर अमेरिकी कंपनी गिलीड साइंसेज इंक द्वारा बनाई गई एक एंटीवायरल दवा है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रेमडेसिविर कोविड-19 परीक्षणों में सुधार दिखाने वाला पहला उपचार है.

अमेरिका, भारत और दक्षिण कोरिया में गंभीर रूप से बीमार रोगियों के इलाज के लिए आपातकालीन उपयोग के लिए इसकी मंजूरी मिली है, वहीं जापान में इसे पूर्ण स्वीकृति मिली है.

कोविड-19 के खिलाफ एंटीवायरल ड्रग की प्रभावकारिता साबित नहीं हुई है, लेकिन कोविड-19 के मामलों में देश में वृद्धि होने से इस दवा की मांग काफी बढ़ गई है, ऐसे में भारत ने बीते 11 अप्रैल को रेमडेसिविर इंजेक्शन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों संक्रमण के लगातार बढ़ रहे मामलों के चलते इसकी मांग भी बढ़ी है. मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में लगातार इसे कीमत से अधिक दाम पर बेचे जाने की ख़बर आ रही है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)