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उत्तराखंड: चमोली में नीति घाटी के पास हिमस्खलन, कम से कम आठ की मौत

उत्तराखंड के चमोली ज़िले के पास नीति घाटी के सुमना क्षेत्र में शुक्रवार को एक ग्लेशियर के टूटने से कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई. भारतीय सेना ने शनिवार को शवों को बरामद किया और 384 अन्य लोगों को बचाने में कामयाब रही, जो शुक्रवार शाम तक इस क्षेत्र में सीमा सड़क संगठन के शिविर में काम कर रहे थे.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: शुक्रवार को उत्तराखंड के चमोली जिले के पास नीति घाटी के सुमना क्षेत्र में एक ग्लेशियर के टूटने से कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना ने शनिवार को शवों को बरामद किया और 384 अन्य लोगों को बचाने में कामयाब रही, जो कल देर शाम तक इस क्षेत्र में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के शिविर में काम कर रहे थे.

खराब मौसम के कारण कल रात बचाव कार्य बाधित हो गए थे. सूत्रों ने कहा कि ऑपरेशन आज सुबह शुरू हुआ, और सेना बैचों में और लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है.

सेना ने एक बयान में कहा कि 23 अप्रैल की शाम लगभग 4 बजे हिमस्खलन से उत्तराखंड में सुम्मा-रिमखिम सड़क पर सुमना से लगभग 4 किमी दूर एक स्थान पर हिमस्खलन हुआ, जो जोशीमठ-मलारी-गिरथिड़ोबला-सुमना-रिमखिम एक्सिस पर स्थित है.

बयान में कहा गया, ‘इस छोर के साथ सड़क निर्माण कार्य के लिए पास में एक बीआरओ टुकड़ी और दो श्रमिक शिविर मौजूद हैं. सुमना से तीन किलोमीटर की दूरी पर एक आर्मी कैंप स्थित है. इलाके में पिछले पांच दिन से भारी बारिश और बर्फबारी हो रही है.’

आगे कहा गया, ‘भारतीय सेना द्वारा तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया. 384 मजदूरों को सुरक्षित बचा लिया गया है और अब वे सेना के शिविर में हैं. दोनों शिविरों में अन्य मजदूरों का पता लगाने के लिए बचाव अभियान जारी है. अब तक आठ शव बरामद किए गए हैं.’

सेना ने कहा कि कई भूस्खलन के कारण सड़क की पहुंच चार से पांच स्थानों पर कट गई है और जोशीमठ से बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स की टीमें बीती शाम से भपकुंड से सुमना तक के मार्ग को साफ करने के लिए काम कर रही हैं और इस छोर को साफ करने के लिए इसे 6 से 8 घंटे लेने की उम्मीद है.

एक अधिकारी ने उल्लेख किया कि शुक्रवार को उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ सेक्टर के सुमना क्षेत्र में भारी बर्फबारी के दौरान एक बीआरओ शिविर हिमस्खलन की स्थिति में आ गया. जैसे ही बचाव अभियान शुरू हुआ, बर्फीले हालात ने देर शाम तक खाड़ी में बचाव अभियान स्थगित रखा.

अधिकारी ने यह भी कहा कि सेना द्वारा किए गए एक रात के बचाव अभियान में बीआरओ कैंप में फंसे अन्य 150 जीआरएफ व्यक्तियों को बचाया गया और सुरक्षित लाया गया. जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स बीआरओ के तहत काम करता है.

शुक्रवार देर रात तक बचाव कार्य चल रहा था ताकि देर शाम से ही बर्फ के नीचे या काम पर फंसे लोगों का पता लगाया जा सके.

अधिकारी ने उल्लेख किया कि लोगों को बैचों में पाया गया और बचाया गया. शुरू में 55 और फिर 149 के बाद, 37, 22, 9 और 19 के चार और बैचों को बचाया गया और सुरक्षित लाया गया. रात के दौरान कुल संख्या 291 तक पहुंच गई.

हालांकि, जैसा कि मौसम ने बचाव कार्य के लिए मुश्किल बना दिया तो ऑपरेशन को रोकना पड़ा. अधिकारी ने कहा कि रात के दौरान मौसम बहुत खराब हो गया था और पहले से ही अनुमानित लोगों की संख्या से अधिक बचाया गया था, जो 280 के आसपास था. अन्य लोगों को बचाने के लिए सेना के जवानों को सुबह फिर से शुरुआत करनी थी.

शुक्रवार शाम को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने घटना के बारे में ट्वीट किया, ‘नीति घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटने की सूचना मिली है. इस संबंध में मैंने एलर्ट जारी कर दिया है. मैं निरंतर जिला प्रशासन और बीआरओ के सम्पर्क में हूं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जिला प्रशासन को मामले की पूरी जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दे दिए हैं. एनटीपीसी एवं अन्य परियोजनाओं में रात के समय काम रोकने के आदेश दे दिए हैं ताकि कोई अप्रिय घटना ना होने पाये.’

उन्होंने ट्वीट किया, ‘माननीय गृह मंत्री अमित शाह  जी ने नीति घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटने की सूचना का तत्काल संज्ञान लिया है. उन्होंने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड को पूरी मदद देने का आश्वासन दिया है और आईटीबीपी को सतर्क रहने के निर्देश दिये है. उनकी इस तत्परता व संवेदनशीलता के लिए मैं अपने प्रदेशवासियों की ओर से माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का दिल से आभार व्यक्त करता हूं.’

शनिवार की सुबह, रावत ने साइट का हवाई दौरा किया. यह घटना चमोली जिले में फरवरी में बाढ़ आने के दो महीने बाद आई है जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे.