कोविड-19

टीका बनाना विशिष्ट प्रक्रिया, रातों-रात उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकती: अदार पूनावाला

टीकों की बढ़ती मांग के बीच कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अदार पूनावाला ने कहा कि भारत की आबादी बहुत बड़ी है और सभी वयस्कों के लिए पर्याप्त खुराक का उत्पादन करना कोई आसान काम नहीं है. उन्होंने कहा कि कंपनी उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और अगले कुछ महीनों में 11 करोड़ टीकों की आपूर्ति की जाएगी.

अदार पूनावाला. (फोटो: रॉयटर्स)

अदार पूनावाला. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली/लंदन: देश में कोविड संकट और टीकों की मांग के बीच कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने कहा है कि टीकों की कमी जुलाई तक बनी रह सकती है.

फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, उस समय तक टीकों का उत्पादन 6-7 करोड़ से बढ़कर दस करोड़ होने की उम्मीद है.

उन्होंने यह भी कहा कि टीकों की कमी को लेकर नेताओं और आलोचकों द्वारा उनकी कंपनी को बदनाम किया गया, लेकिन नीतिगत फैसलों के लिए कंपनी नहीं बल्कि सरकार जिम्मेदार है.

गौरतलब है कि देश में टीकाकरण के तीसरे चरण में 18 से 44 साल की उम्र के नागरिकों को वैक्सीन देने की शुरुआत हो चुकी है, हालांकि कई राज्यों द्वारा पर्याप्त टीके न होने होने की बात कहते हुए इसे आगे बढ़ाया गया है.

पूनावाला ने इस अख़बार को बताया कि प्रशासन को अंदाजा नहीं था कि कोरोना संक्रमण के मामले घटने के बाद इस तरह से महामारी की दूसरी लहर आएगी. उन्होंने कहा, ‘सबको लगा था कि भारत ने महामारी को नियंत्रण में कर लिया है.’

मालूम हो कि भारतीय दवा महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने जनवरी में दुनिया की सबसे बड़ी टीका निर्माता कंपनी पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित कोविशील्ड तथा भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी थी.

भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के साथ मिलकर कोवैक्सीन का विकास किया है. वहीं, सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने ‘कोविशील्ड’ के उत्पादन के लिए ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ साझेदारी की है.

एसआईआई ने बीते हफ्ते राज्यों को बेचे जाने वाले टीके की कीमत घटा दी. इसके तहत राज्यों को अब टीके लिए पूर्व में घोषित 400 रुपये प्रति खुराक की जगह 300 रुपये प्रति खुराक देने होंगे.

कंपनी की कीमत नीति का लेकर व्यापक स्तर पर आलोचना झेलने के बाद यह कदम उठाया गया है, क्योंकि सीरम इंस्टिट्यूट ने कोविशील्ड शुरू में केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रति खुराक की दर से बेची है.

पूनावाला ने कहा कि उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया गया है. उन्होंने आगे यह भी कहा कि उन्होंने वैक्सीन की उत्पादन क्षमता इसलिए नहीं बढ़ाई थी क्योंकि ‘ऐसा आदेश ही नहीं दिया गया था’ और कंपनी को भी नहीं लगा था कि उसे साल की 100 करोड़ से अधिक वैक्सीन उत्पादित करनी हैं.

उल्लेखनीय है कि देश में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान टीके की बढ़ती मांग के बीच लंदन पहुंचे पूनावाला ने कहा था कि वे दबाव के चलते देश से बाहर गए हैं.

उन्होंने यह भी कहा था कि सब उनके कंधों पर आ पड़ा है, जो उनके वश की बात नहीं है. उन्होंने भारत के बाहर वैक्सीन निर्माण की व्यावसायिक योजनाओं के संकेत दिए हैं.

पूनावाला ने तब उन्हें धमकाए जाने की बात भी कही थी, हालांकि फाइनेंशियल टाइम्स से बात करते हुए उन्होंने कहा कि में सामान्य कारोबार के काम से वहां हैं, सुरक्षा संबंधी वजहों से नहीं.

‘टीका बनाना एक विशिष्ट प्रक्रिया है, रातों-रात उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकती’

सोमवार को ही अदार पूनावाला ने कहा कि रातों-रात टीके की उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ायी जा सकती है. उन्होंने कहा कि टीके का उत्पादन एक खास प्रक्रिया होती है, जिसमें समय लगता है.

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आबादी बहुत बड़ी है और सभी वयस्कों के लिए पर्याप्त खुराक का उत्पादन करना कोई आसान काम नहीं है.

लंदन में मौजूद पूनावाला ने हालांकि कहा कि कंपनी देश में कोविड महामारी की दूसरी लहर के बीच कोविशील्ड का उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार को अगले कुछ महीनों में 11 करोड़ टीकों की आपूर्ति की जाएगी.

पूनावाला ने ट्विटर पर लिखा है, ‘मैं कुछ चीजों को स्पष्ट करना चाहूंगा क्योंकि मेरे बयान को गलत तरीके से लिया गया है. सबसे पहले, टीका बनाना एक विशेषीकृत प्रक्रिया है, इसीलिए रातों-रात उत्पादन बढ़ाना संभव नहीं है. हमें यह भी समझने की जरूरत है कि भारत की आबादी बहुत बड़ी है. ऐसे में सभी वयस्कों के लिए पर्याप्त खुराक का उत्पादन करना कोई आसान काम नहीं है.’

पूनावाला ने कहा कि यहां तक कि विकसित देश और कंपनियां भी उत्पादन बढ़ाने के लिए परेशान हैं जबकि उन देशों की आबादी बहुत कम है. उन्होंने कहा कि पुणे की कंपनी पिछले साल अप्रैल से सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है.

पूनावाला ने कहा, ‘हमें हर प्रकार का समर्थन मिला है. चाहे वह वैज्ञानिक हो, नियामकीय हो या फिर वित्तीय. अभी की स्थिति के अनुसार हमें 26 करोड़ खुराक के आर्डर मिले हैं. इसमें से हम 15 करोड़ से अधिक खुराक की आपूर्ति कर चुके हैं. हमें भारत सरकार से अगले कुछ महीनों में 11 करोड़ खुराक के लिए 100 प्रतिशत भुगतान यानी 1,725.5 करोड़ रुपये पहले ही मिल चुके हैं.’

उन्होंने कहा कि इसके अलावा अगले कुछ महीनों में 11 करोड़ खुराक राज्यों एवं निजी अस्पतालों के लिए आपूर्ति की जाएगी.

पूनावाला ने कहा, ‘…हम इस बात को समझते हैं कि हर कोई यथाशीघ्र टीके की उपलब्धता चाहता है. हमारा प्रयास भी यही है और हम इसे हासिल करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं. हम और कठिन मेहनत करेंगे और भारत के कोविड-19 महामारी के खिलाफ अभियान को और मजबूत बनाएंगे.’

ब्रिटेन में 24 करोड़ पाउंड निवेश करेगा सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया अपने वैक्सीन कारोबार का विस्तार करने के लिए ब्रिटेन में 24 करोड़ पाउंड का निवेश करेगा और एक नया बिक्री कार्यालय खोलेगा, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक अरब पाउंड की भारत-ब्रिटेन व्यापार संवर्धन साझेदारी के तहत यह घोषणा की, जिससे ब्रिटेन में करीब 6,500 नई नौकरियां तैयार होंगी.

पुणे स्थित वैक्सीन विनिर्माता के साथ ही लगभग 20 भारतीय कंपनियों ने ब्रिटेन में स्वास्थ्य सेवा, बायोटेक और सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निवेश करने की घोषणा की है.

यह भी पता चला है कि भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियाने कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए ब्रिटेन में पहले चरण का परीक्षण भी शुरू कर दिया है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोमवार को एसआईआई की योजनाओं के संदर्भ में कहा, ‘बिक्री कार्यालय से एक अरब अमेरिकी से अधिक का नया व्यापार तैयार होने की उम्मीद है, जिसमें से 20 करोड़ पाउंड ब्रिटेन में निवेश किए जाएंगे.’

बयान में कहा गया, ‘सीरम (एसआईआई) का निवेश नैदानिक परीक्षणों, अनुसंधान और विकास और वैक्सीन के विनिर्माण के लिए होगा. इससे ब्रिटेन और दुनिया को कोरोना वायरस महामारी और अन्य घातक बीमारियों को हराने में मदद मिलेगी. सीरम ने पहले ही ब्रिटेन में कोरोना वायरस की वैक्सीन का परीक्षण शुरू कर दिया है.’

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक अन्य भारतीय कंपनी ग्लोबल जीन कॉर्प द्वारा अगले पांच वर्षों के दौरान 5.9 करोड़ पाउंड का निवेश किया जाएगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)