राजनीति

नंदीग्राम: अदालत जाएंगी ममता, कहा- घोषणा के बाद चुनाव आयोग फ़ैसला कैसे बदल सकता है

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम के निर्वाचन अधिकारी द्वारा सीईओ कार्यालय को भेजे एक कथित एसएमएस को सार्वजनिक करते हुए दावा किया कि अधिकारी को अपने जीवन का ख़तरा था इसलिए उन्होंने फिर से मतगणना के आदेश नहीं दिए.

विधानसभा चुनाव में जीत के बाद ममता बनर्जी. (फोटो: पीटीआई)

विधानसभा चुनाव में जीत के बाद ममता बनर्जी. (फोटो: पीटीआई)

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को आरोप लगाया कि नंदीग्राम के निर्वाचन अधिकारी को अपने जीवन का खतरा था इसलिए उन्होंने फिर से मतगणना के आदेश नहीं दिए.

बनर्जी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वह नंदीग्राम के चुनाव परिणाम को लेकर अदालत का रुख करेंगी, जहां उन्हें भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा.

बनर्जी ने नंदीग्राम के निर्वाचन अधिकारी द्वारा सीईओ कार्यालय को भेजे एक कथित एसएमएस को सार्वजनिक करते हुए दावा किया कि उन्होंने आशंका जताई थी कि अगर वह फिर से मतगणना के आदेश देते हैं तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और आत्महत्या तक करनी पड़ सकती है.

उन्होंने कहा, ‘निर्वाचन आयोग औपचारिक रूप से घोषणा करने के बाद नंदीग्राम के परिणाम कैसे उलट सकता है? इसके खिलाफ हम अदालत जाएंगे.’

उन्होंने कहा, ‘सर्वर चार घंटे तक डाउन क्यों था? हम जनादेश स्वीकार करना चाहते थे, लेकिन अगर एक स्थान के परिणाम में गड़बड़ी है तो जो प्रतीत होता है उससे परे कुछ है. हमें सच्चाई का पता लगाना है.’

बनर्जी ने कुछ स्थानों से हिंसा की खबरों के बीच अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि किसी के उकसावे में नहीं आएं.

उन्होंने यह भी आरोप लगाए कि केंद्रीय बलों ने चुनावों के दौरान टीएमसी समर्थकों पर काफी अत्याचार किए.

उन्होंने कहा, ‘परिणाम घोषित होने के बाद भी भाजपा ने कुछ इलाकों में हमारे समर्थकों पर हमला किया लेकिन हमने अपने लोगों से किसी के उकसावे में नहीं आने की अपील की और इसके बजाय पुलिस को सूचना देने के लिए कहा.’

बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों ने भेदभाव करते हुए टीएमसी के खिलाफ काम किया.

चुनाव आयोग पर प्रहार करते हुए उन्होंने दावा किया कि अगर निर्वाचन आयोग ने सहयोग नहीं किया होता तो भाजपा 50 का आंकड़ा पार नहीं कर पाती.

बता दें कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भारी जीत दर्ज करने वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट पर कभी सहयोगी रहे और अब भाजपा के प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी से हार गई हैं.

निर्वाचन आयोग ने बताया कि नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी 1,956 मतों से विजयी हुए हैं. आयोग ने पुष्टि की है कि शुभेंदु अधिकारी को 110,764 मत मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी बनर्जी के पक्ष में 108,808 मत पड़े.

हालांकि, आधिकारिक नतीजे आने से पहले घंटों तक भ्रम की स्थिति रही, क्योंकि मीडिया के एक धड़े में शुभेंदु अधिकारी पर ममता की जीत की खबर चलने लगी थी.

इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने इसके मद्देनजर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर दोबारा मतदान कराने की मांग की थी.

हालांकि, चुनाव आयोग ने नंदीग्राम विधानसभा सीट पर फिर से मतगणना कराने के तृणमूल कांग्रेस के अनुरोध को खारिज कर दिया है.

मुफ्त वैक्सीन

मुख्यमंत्री ने एक बार फिर मांग की कि देश के हर नागरिक को नि:शुल्क टीका दिया जाना चाहिए.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, उन्होंने दावा किया, ‘वे दो-तीन राज्यों को वैक्सीन और ऑक्सीजन भेज रहे हैं. ऐसा क्यों? हर राज्य को उसका हक मिलना चाहिए. मैंने सुना है कि गुजरात में, भाजपा पार्टी कार्यालय से टीका दिया जा रहा है. क्या उन्हें (भाजपा) टीके देने में कोई विशेषज्ञता है?’

एक सवाल का जवाब देते हुए बनर्जी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता महामारी से लड़ने की है औऱ एक बार कोविड-19 संकट खत्म होने पर 2024 के राष्ट्रीय चुनावों में अपनी भूमिका के बारे में सोचेंगी.

उन्होंने कहा, ‘मैं सिर्फ एक स्ट्रीट फाइटर हूं. मैं लोगों का मनोबल बढ़ा सकती हूं, ताकि हम भाजपा के खिलाफ एक मजबूत लड़ाई लड़ सकें. एक व्यक्ति अकेले सब कुछ नहीं कर सकता है और यह सामूहिक प्रयास होना चाहिए. अगर सामूहिक रूप से हम कोई निर्णय ले सकते हैं, साथ में हम 2024 की लड़ाई लड़ सकते हैं. लेकिन, पहले हमें इस कोविड संकट से लड़ना चाहिए और फिर हम इस पर फैसला करेंगे. अभी समय नहीं हुआ है.’

बनर्जी ने यह भी दावा किया कि वाम दल भाजपा के पास गए अपना वोट बैंक वापस पाने में असफल रहे जिसके कारण उनकी हालत और खराब हो गई.

उन्होंने कहा, ‘उनके (लेफ्ट) साथ मेरे राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन मैं उन्हें शून्य होते हुए नहीं देखना चाहताी थी. बेहतर होता कि वे भाजपा से वोट वापस पा लेते. उन्होंने भाजपा का इतना समर्थन किया कि वे साइनबोर्ड बन गए. उन्हें इस बारे में सोचने की जरूरत है. दीपांकर भट्टाचार्य (भाकपा-माले) ने ऐसा नहीं किया.’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें चुनावों में अपनी जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परंपरागत फोन नहीं आया. उन्होंने कहा, ‘यह पहली बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने फोन नहीं किया. यह ठीक है, वह व्यस्त हो सकते हैं. मैंने इसे भावुकता में नहीं लिया.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)