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एनएसयूआई ने पूछा- महामारी के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री कहां लापता हैं?

कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के महासचिव नागेश करियप्पा ने दिल्ली पुलिस में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई है. संगठन की ओर से कहा गया है कि हम सभी इस विनाशकारी महामारी से पीड़ित हैं और हमें एक ऐसी सरकार की जरूरत है, जो अपने नागरिकों का समर्थन करें तथा अपने कार्यों के लिए उनके प्रति जवाबदेह हो. वर्तमान सरकार ऐसा करने में विफल रही है.

अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

अमित शाह. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने दिल्ली पुलिस में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई है और पूछा है कि इस महामारी में अमित शाह कहां गायब हैं.

कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के महासचिव नागेश करियप्पा द्वारा ये रिपोर्ट दायर की गई है.

खबरों के अनुसार, करिअप्पा ने कहा कि राजनेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे राष्ट्र की सेवा करेंगे, न कि संकट की स्थिति में दूर भाग जाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि पूरा देश एक विनाशकारी महामारी से पीड़ित है और लोगों को अब जरूरत है कि सरकार नागरिकों का सहयोग करे और अपने कामों के लिए जवाबदेह हो.

उन्होंने कहा कि चूंकि सरकार ऐसा करने में नाकाम रही है, इसलिए एनएसयूआई ने गृह मंत्री के खिलाफ लापता होने की शिकायत दर्ज कराई है और उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस पर जवाब देगी.

द हिंदू के अनुसार, करियप्पा से पूछताछ करने के लिए दिल्ली पुलिस एनएसयूआई ऑफिस आई थी.

एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव और इसके मीडिया और संचार विंग के प्रभारी लोकेश चुघ ने समाचार एजेंसी आईएएनएस आईएएनएस को बताया कि 2013 तक राजनेता नागरिकों के प्रति जिम्मेदार थे, लेकिन 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद चीजें पूरी तरह से बदल गईं और अब महामारी के बीच केंद्र सरकार में ‘दूसरा जिम्मेदार व्यक्ति’ ‘लापता’ है.

एनएसयूआई की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘हम सभी इस विनाशकारी महामारी से पीड़ित हैं और हमें एक ऐसी सरकार की जरूरत है, जो अपने नागरिकों का समर्थन करें तथा अपने कार्यों के लिए उनके प्रति जवाबदेह हो. वर्तमान सरकार ऐसा करने में विफल रही है, इसलिए एनएसयूआई ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया है और सरकार के राष्ट्र को संबोधित करने की प्रतीक्षा कर रही है.’

गौरतलब है कि अमित शाह अप्रैल महीने में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में लगातार सक्रिय रहे थे और पश्चिम बंगाल में उन्होंने कई चुनावी रैलियों को संबोधित किया था.

मालूम हो कि भारत के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को लेकर कई आलोचनात्मक रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुई हैं, जिसमें उनसे महामारी के बीच ऑक्सीजन, बेड, वैक्सीन इत्यादि की उपलब्धता न होने पर सवाल उठाया गया है.

हालांकि ऐसा प्रतीत होता है कि नेताओं पर इन खबरों का प्रभाव नहीं पड़ रहा है और जनता पहले की तरह ही महामारी से लड़ने के लिए जूझ रही है. अस्पताल से हर दिन दर्दनाक तस्वीरें आ रही हैं, जहां लोग ऑक्सीजन और दवाई की कमी के चलते अपने प्रियजनों को खो रहे हैं.