मध्य प्रदेश: क्या सरकारी अव्यवस्थाओं के चलते कोविड से अधिक जानलेवा साबित हो रहा है ब्लैक फंगस

देशभर में कोरोना संक्रमितों या इससे उबर चुके लोगों में ब्लैक फंगस संक्रमण देखा जा रहा है, पर मध्य प्रदेश में स्थिति बेहद ख़राब है. लगातार कई शहरों में बढ़ते मामलों और मौत की ख़बरों के बीच दवा और इंजेक्शन का अभाव तो बना ही है, वहीं सरकार को अब तक राज्य में आए ऐसे कुल मामलों की जानकारी तक नहीं है.

/
जबलपुर के एक अस्पताल में ब्लैक फंगस के मरीज की जांच करते चिकित्सक. (फोटो: पीटीआई)

देशभर में कोरोना संक्रमितों या इससे उबर चुके लोगों में ब्लैक फंगस संक्रमण देखा जा रहा है, पर मध्य प्रदेश में स्थिति बेहद ख़राब है. लगातार कई शहरों में बढ़ते मामलों और मौत की ख़बरों के बीच दवा और इंजेक्शन का अभाव तो बना ही है, वहीं सरकार को अब तक राज्य में आए ऐसे कुल मामलों की जानकारी तक नहीं है.

जबलपुर के एक अस्पताल में ब्लैक फंगस के मरीज की जांच करते चिकित्सक. (फोटो: पीटीआई)
जबलपुर के एक अस्पताल में ब्लैक फंगस के मरीज की जांच करते चिकित्सक. (फोटो: पीटीआई)

ग्वालियर की 43 वर्षीय रमा शर्मा अप्रैल के आखिरी दिनों में कोरोना संक्रमित पाई गई थीं. ऑक्सीजन लेवल गिरने पर उन्हें अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जयारोग्य में भर्ती कराया गया.

इसी दौरान रमा के भाई धर्मेंद्र भी संक्रमित होकर शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती हो हुए. धर्मेंद्र घबराएं नहीं इसलिए परिजनों ने रमा के अस्पताल में भर्ती होने की बात उनसे छिपा ली लेकिन जब जयारोग्य अस्पताल की अव्यवस्थाओं के चलते रमा की हालत बिगड़ने लगी, तब धर्मेंद्र को बताया गया.

उन्होंने तुरंत रमा को भी उसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करवाया जहां वे भर्ती थे. धर्मेंद्र की हालत में पहले से सुधार था लेकिन रमा की सांसों को सामान्य बनाए रखने के लिए उस रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत थी, जिसकी बाजार में किल्लत थी. जब भाई से अपनी बहन की उखड़ती सांसें नहीं देखी गईं तो उन्होंने अपना इलाज पूरा होने से पहले ही अस्पताल से  छुट्टी करा ली, ताकि बहन के लिए रेमडेसिविर का इंतजाम कर सकें.

इंजेक्शन का इंतजाम हो भी गया, रमा की सेहत भी सुधरने लगी, लेकिन उनके चेहरे और आंखों पर सूजन आने लगी. धर्मेंद्र बताते हैं, ‘डॉक्टर को इस संबंध में बताया तो उन्होंने इसे सामान्य सूजन बताते हुए लगातार ऑक्सीजन मास्क लगाने जैसे कुछ कारण गिनाए और दवा दे दी. पांच-छह दिन बाद सूजन इतनी बढ़ गई कि एक आंख बंद हो गई.’

तब ईएनटी (कान, नाक, गला) विशेषज्ञ से परामर्श के बाद रमा का सीटी स्कैन कराया तो इस सूजन के पीछे का कारण म्यूकॉरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस निकला.

बता दें कि देश भर में कोरोना संक्रमित मरीजों या संक्रमण से उबर चुके लोगों में ब्लैक फंगस की समस्या देखी जा रही है लेकिन मध्य प्रदेश में यह विकराल हो गई है. हर दिन मामले दिन दूने, रात चौगुने बढ़ रहे हैं. नतीजतन, बाजार में जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं तो अस्पतालों में बिस्तर.

इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आलोक मांडलीय बताते हैं, ‘यह संक्रमण पहले उन लोगों को होता था जो एचआईवी ग्रस्त हों, जिनकी डायबिटीज अनियंत्रित हो या जिनका अंग प्रत्यारोपण हुआ हो लेकिन अब मामले इतने ज्यादा बढ़े हैं कि जितने पूरे देश में निकलते थे, उतने एक शहर में निकल रहे हैं.’

बात सही है. दो हफ्ते पहले तक ब्लैक फंगस ऐसा रोग था जिसे लोग जानते तक नहीं थे लेकिन अब यह महामारी है. इसकी भयावहता का अंदाजा ऐसे लगा सकते हैं कि समय रहते उपचार न मिलने पर तीन से सात दिन में मौत हो सकती है. इसका इलाज चार प्रकार के विशेषज्ञों (ईएनटी, नेत्र, न्यूरो और दंत) की टीम करती है.

एम्स, भोपाल के डेंटिस्ट्री विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंशुल राय कोरोना संक्रमितों में बढ़ते इस खतरे को लेकर बताते हैं, ‘इनमें फंगस इसलिए बढ़ा क्योंकि इलाज में स्टेरॉयड्स की भारी मात्रा देनी पड़ती है. स्टेरॉयड्स से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. तब इस फंगस को बढ़ने का वातावरण मिलता है. यह एक ‘ऑपर्च्युनिस्टिक फंगल इंफेक्शन’ है जो मौका देखकर हमला करता है.’

इंदौर के एमवायएच अस्पताल में ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज कर रहीं नेत्र विभाग की प्रोफेसर डॉ. श्वेता वालिया थोड़ा और विस्तार से समझाती हैं, ‘फंगस स्पोर्स (बीजाणु) हमारी नाक और साइनस में पहले से मौजूद रहते हैं. कोरोना होने पर स्टेरॉयड से इलाज होता है जिससे ब्लड शुगर बढ़ती है और इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. जिसके चलते नाक और साइनस में मौजूद फंगस बीजाणु बढ़ने लगते हैं.’

ये बीजाणु कैसे जानलेवा साबित होते हैं, इस पर डॉ. आलोक कहते हैं, ‘फंगस वातावरण में हर जगह मौजूद है जो नाक के जरिये साइनस पर हमला करता है. वहां अपनी कॉलोनी बनाकर बढ़ता है. साइनस की हड्डी को नुकसान पहुंचाता है. फिर आंख की ओर बढ़ता है. आंख की दूसरी तरफ व नसों पर दबाव डालता है और आदमी को दिखना बंद हो जाता है. आंखें तक बाहर आ जाती हैं जिन्हें शरीर से निकालना पड़ता है. ऐसा न करने पर फंगस दिमाग की ओर बढ़ता है और खून सप्लाई करने वाली नसों पर हमला करके पैरालिसिस अटैक लाता है.’

वे आगे बताते हैं, ‘कई बार दिमाग में फंगस पॉकेट्स बन जाते हैं और यह जान पर हावी हो जाता है. समय पर उपचार न मिलने पर मृत्यु दर 100 फीसदी होती है. मरीज को बचाना असंभव होता है. साइनस या नाक के आस-पास फंगस मौजूद रहते इलाज मिल जाए तो मरीज बच जाता है. जब फंगस आंख तक पहुंच जाए तो उम्मीद थोड़ी कम होती है. दिमाग तक पहुंचने पर बेहद ही कम.’

डॉ. अंशुल के मुताबिक, ब्लैक फंगस बहुत कम मरीजों में जानलेवा साबित होता है क्योंकि इसके दिमाग तक पहुंचने पर ही मौत संभव है. समय रहते पहचान होने पर यह उपचारात्मक है.

फंगस (नाक, आंख या दिमाग) कहीं भी हो, उसे बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन जरूरी है. ऑपरेशन बाद फंगस वापस न पनपे, इसके लिए मरीज को अगले 10-20 दिन तक एंटी फंगल इंजेक्शन एंफोटेरेसिन-बी देना जरूरी है. ब्लैक फंगस बीमारी में यह जीवनरक्षक दवा है.

चिकित्सकों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद मरीज तभी जीवित रह सकता है जब उसे एंफोटेरेसिन-बी की निर्धारित मात्रा मिले. न मिलने पर मौत निश्चित मानिए.

रमा का भी 10 मई को ऑपरेशन हुआ. 15 मई को उन्होंने दम तोड़ दिया क्योंकि उन्हें एंफोटेरेसिन-बी नहीं मिला.

इसी तरह विदिशा जिले के गंजबासौदा निवासी 42 वर्षीय कमलेश पंथी ने भी एंफोटेरेसिन-बी न मिलने पर दम तोड़ दिया. उन्हें अप्रैल के आखिरी हफ्ते में कोरोना हुआ था. ऑक्सीजन लेवल 70 होने पर पहले उन्हें स्थानीय सिविल अस्पताल, फिर विदिशा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया.

तीन दिन बाद कमलेश का जबड़ा सूजने लगा, आंखों में सूजन आई और नाक से खून आने लगा. डॉक्टर्स ने इसे दवाओं का सामान्य इंफेक्शन बताया. धीरे-धीरे एक आंख सूजकर चिपक गई और दिखना बंद हो गया.

ब्लैक फंगस के मरीज की टेस्ट रिपोर्ट देखते डॉक्टर. (फोटो: पीटीआई)
ब्लैक फंगस के मरीज की टेस्ट रिपोर्ट देखते डॉक्टर. (फोटो: पीटीआई)

कमलेश के भाई गौरव बताते हैं, ‘डॉक्टर्स ने तब भी ध्यान नहीं दिया और 6 अप्रैल को स्वस्थ बताकर छुट्टी कर दी. जबकि उनका ऑक्सीजन लेवल 92 था, लेकिन कह दिया कि घर पर ब्रीदिंग एक्सरसाइज कराओ.’

कमलेश के चेहरे और आंखों की बढ़ती सूजन देखकर किसी को समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है? तभी परिजनों ने अखबार में ब्लैक फंगस की खबर पढ़ी. तुरंत वे कमलेश को लेकर विदिशा भागे.

जिला अस्पताल में पहले ही लापरवाही हुई थी, इसलिए अब वे एक निजी अस्पताल पहुंचे. वहां विशेषज्ञों ने आंख की पुतली डैमेज बताकर एम्बुलेंस से तुरंत भोपाल जाने कहा. 108 एम्बुलेंस मिली नहीं. यहां मानवता को शर्मसार करने वाला चेहरा तब दिखा जब निजी एम्बुलेंस चालक ने 60 किलोमीटर के 11,000 रुपये मांग लिए.

जैसे-तैसे कमलेश को भोपाल पहुंचाया. अनेक सरकारी-गैर सरकारी अस्पतालों में बिस्तर के लिए भटकने के बाद अंतत: हमीदिया में उन्हें भर्ती कराया. वहां मालूम हुआ कि जिन कमलेश को कभी डायबिटीज नहीं रही, उनका शुगर लेवल 600 पार था.

गौरव आगे बताते हैं, ‘14 मई को रात 11:30 बजे अस्पताल से फोन आया कि कहीं से भी इंजेक्शन लाओ. आधी रात कहां बाजार खुला होता, इसलिए रात भर भोपाल के अलग-अलग अस्पतालों में भटकते रहे. ड्रग इंस्पेक्टर को फोन लगाए. उन्होंने सुबह बात करने कहा. ऐसे-कैसे सुबह का इंतजार करते जब हमारा भाई मरने को था?’

बहरहाल, सुबह भी इंजेक्शन कहीं नहीं मिला और शाम को कमलेश ने दम तोड़ दिया.

हफ्ते भर में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ब्लैक फंगस ने 30 से ज्यादा जानें ले ली हैं. इंजेक्शन की कमी इसकी बड़ी वजह है. कईयों की आंखें भी निकालनी पड़ी हैं. प्रदेश के हर हिस्से से मामले सामने आ रहे हैं. जिस तेजी से यह रोग फैल रहा है, इस पर काबू पाने के सरकारी प्रयास उतने तेज नहीं हैं.

पहली बार ब्लैक फंगस पर कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12 मई को भोपाल व जबलपुर के मेडिकल कॉलेज में 10-10 बिस्तर की दो यूनिट खोलने का ऐलान किया. दो दिन बाद इंदौर, रीवा और ग्वालियर के लिए भी यही घोषणा हुई.

साथ ही, सरकार ने रेमडेसिविर की तरह ही एंफोटेरेसिन-बी के वितरण की व्यवस्था बनाई ताकि कालाबाजारी रुके और बाजार में उपलब्ध सभी इंजेक्शन अधिकार में लेकर वितरण व्यवस्था अपने हाथ में ले ली.

इससे पहले ब्लैक फंगस का इलाज केवल निजी अस्पतालों में हो रहा था. सिर्फ साधन-संपन्न लोग ही इलाज कराने में समर्थ थे क्योंकि एक एंफोटेरेसिन-बी इंजेक्शन की कीमत सात-आठ हजार रुपये थी. अमूमन मरीज को दस से बीस दिन तक उसके शरीर के भार के आधार पर औसतन छह इंजेक्शन प्रतिदिन लगते हैं.

तब हालात ऐसे थे कि गरीब इलाज करा नहीं सके और पैसे वाले को इंजेक्शन मिल नहीं रहे थे, लेकिन सरकारी प्रयासों के बाद भी हालात बदले नहीं हैं. एंफोटेरेसिन-बी की मांग और आपूर्ति में विशाल अंतर बना हुआ है.

उदाहरण के तौर पर, बुधवार को भोपाल के निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए 80 इंजेक्शन बांटे गए जबकि उसी समय करीब 75 मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती थे. यानी जरूरत 450 इंजेक्शन की थी. नतीजतन, मरीजों के परिजनों ने हंगामा कर दिया तो पुलिस बुलानी पड़ी.

ग्वालियर की रमा को दस दिन छह-छह इंजेक्शन दिए जाने थे. धर्मेंद्र शुरुआती दो दिन बाजार से इंजेक्शन लाए. इससे रमा की आंखों की सूजन और दर्द चला गया. तीसरे दिन दुकानदार ने हाथ खड़े कर दिए. फिर सरकार ने इंजेक्शन का वितरण अपने हाथ में ले लिया.

ग्वालियर की रमा. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)
ग्वालियर की रमा. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

उसके बाद से सरकारी दावों में प्रदेश में इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है. सबको इंजेक्शन बांटे जा रहे हैं. लेकिन, इन दावों की हकीकत धर्मेंद्र बताते हैं. रुंधे गले से उन्होंने बताया, ‘सरकारी व्यवस्था ऐसी है कि मैंने सबको फोन लगाया, लेकिन कोई इंजेक्शन नहीं दिला सका. मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) को बीस बार फोन किया, ड्रग इंस्पेक्टर से बात की, सबने हाथ खड़े कर दिए.’

यह कहानी अकेले ग्वालियर की हो तो इसे अपवाद मानकर सरकारी दावों पर यकीन कर लें कि ब्लैक फंगस से लड़ने के लिए तैयारी पर्याप्त है, लेकिन प्रदेश के हर कोने में ऐसी कहानी है. फिर बात विदिशा के कमलेश की करें या सिवनी के ओमप्रकाश यादव की, जिन्होंने इंजेक्शन के अभाव में दम तोड़ दिया.

या बात करें इंदौर और जबलपुर के निजी अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे अज़ीम और नारायण सिंह ठाकुर की व इंजेक्शन के लिए रात-दिन भटकते उनके रोते-बिलखते परिजनों की. हर ओर बस जीवनरक्षक दवाओं की कमी, अस्पतालों में अव्यवस्थाएं, नाकाफी इलाज व उसमें लापरवाही या चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था के ही किस्से सुनाई पड़ते हैं.

जांचों में हेर-फेर करके कोरोना पर जीत का डंका बजा रही शिवराज सरकार की ब्लैक फंगस पर सजगता ऐसे समझें कि खबर लिखे जाने तक उसके पास आंकड़े ही नहीं थे कि राज्य में इसके कितने मामले सामने आ चुके हैं, अस्पतालों में कितने मरीज इलाजरत हैं और कितनी मौतें हुई हैं?

प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के मीडिया से जुड़े लोगों ने द वायर  को बताया कि वे हर दिन अस्पतालों में फोन करके मरीजों की जानकारी जुटाते हैं. इन जुटाए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 700 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं.

जब संबंधित आंकड़े ही न हों तो असर नीतियों पर भी पड़ता है. जब प्रदेश में ब्लैक फंगस के करीब 250 मरीज थे, तब मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 10-10 बिस्तर के पांच यूनिट खोले थे. यानी, मरीजों की संख्या से पांच गुना कम.

नतीजतन, भोपाल की हमीदिया यूनिट में पहले दिन ही 18 मरीज आ गए. पांच दिन में संख्या 60 हो गई. फिलहाल सौ मरीज हैं. अब सौ बिस्तर का वॉर्ड बनाने की योजना है.

इसी तरह इंदौर के एमवायएच में हफ्ते भर में ही आठ वॉर्ड बनाने पड़े. फिलहाल 160 मरीज हैं. दो दिन पहले खुली ग्वालियर यूनिट में 30 और जबलपुर यूनिट में 80 मरीज हैं. सरकारी अस्पताल भरे होने के चलते निजी अस्पतालों में इससे दोगुने मरीज हैं.

द वायर  ने पूरे मामले पर सोमवार को प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग से बात की. उन्होंने कहा, ‘हमने इंजेक्शन और दवाओं की खरीद कर ली है. सभी मेडिकल कॉलेज में इन्हें उपलब्ध करा दिया है. निजी अस्पतालों में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित हो, इसके प्रयास कर रहे हैं. मरीजों के आंकड़े भी इकट्ठे कर रहे हैं. मरीजों में इस रोग की जल्दी पहचान और रोकथाम के लिए क्या किया जा सकता है, इस पर भी काम कर रहे हैं. फिलहाल मरीजों की संख्या नहीं बता सकता.’

मेडिकल कॉलेज में इंजेक्शन की उपलब्धता संबंधी विश्वास सारंग के दावों की पोल उसी दिन खुल गई. भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती अज़ीम के परिजनों को डॉक्टर्स ने इंजेक्शन बाजार से लाने के लिए पर्ची थमा दी. उन्हें बाजार में केवल दो ही इंजेक्शन मिले.

43 वर्षीय अज़ीम मंगलवार की सुबह तक हमीदिया में भर्ती थे. फिलहाल इंदौर के एक निजी अस्पताल में हैं क्योंकि उनके भाई मुवीन के मुताबिक हमीदिया में अव्यवस्थाओं के चलते अज़ीम की हालत बिगड़ती जा रही थी. उनके गालों पर सूजन है, आंखें पूरी बंद हो गई हैं. दिमाग भी सुन्न पड़ चुका है.

14 मई को ओमप्रकाश यादव ने भी जबलपुर मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया क्योंकि अस्पताल में न इंजेक्शन थे और न दवाएं. ओमप्रकाश की बहन यशोदा से किसी भी हाल में यह दोनों चीजें बाहर से लाकर देने कहा गया, लेकिन यशोदा इतनी भी पढ़ी-लिखी नहीं हैं कि यहां-वहां जाकर प्रयास करके कुछ इंतजाम कर पातीं.

नाते-रिश्तेदारों को फोन लगाकर उन्होंने अगले दिन इंजेक्शन का इंतजाम किया लेकिन तब तक ओमप्रकाश दम तोड़ चुके थे.

सरकारी अस्पतालों की इसी बदहाली के चलते लोग निजी अस्पताल जा रहे हैं. 65 वर्षीय नारायण सिंह ठाकुर जबलपुर के सर्वोदय अस्पताल में भर्ती हैं. खबर लिखे जाने तक उनके ऑपरेशन को चार दिन हो चुके थे, लेकिन अब तक एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन नहीं मिले हैं.

उनके बेटे नीरज कलेक्टर-एसडीएम से लेकर सीएमएचओ, ड्रग इंस्पेक्टर तक सबसे संपर्क कर चुके, लेकिन एंफोटेरेसिन-बी की जगह उन्हें 350 रुपये कीमत का ऐसा इंजेक्शन थमा दिया गया, जिसे डॉक्टर लगाने से मना कर रहे हैं.

नीरज रोते हुए बताते हैं, ‘कोई और बीमारी होती तो इंजेक्शन की उपलब्धता देखकर ऑपरेशन कराते, लेकिन फंगस के ऑपरेशन में कुछ घंटों की देरी भी पिता की जान ले लेती. लेकिन, जान बचाना तो अब भी मुश्किल लग रहा है. हर दिन छह इंजेक्शन की जरूरत है. कहां से लाऊं? एक वक्त खाना खाकर बिना सोए रात-दिन भटक रहा हूं. प्रशासन ने जो सस्ता वाला इंजेक्शन दिया, डॉक्टर ने लगाने से मना कर दिया लेकिन यह सोचकर कि न भले से कुछ भला, मैंने इंजेक्शन जबरन लगवा लिया. जानता हूं फायदा नहीं होगा लेकिन मन को बस झूठी तसल्ली मिल जाती है.’

नीरज की व्यथा शिवराज सरकार द्वारा निजी अस्पतालों को पर्याप्त इंजेक्शन उपलब्ध कराने संबंधी दावों की कलई खोलती है. वहीं, इंदौर में पति के लिए इंजेक्शन न मिलने पर एक महिला ने अस्पताल की छत से कूदकर आत्महत्या करने की धमकी भरा वीडियो मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के नाम जारी किया है.

इंदौर के सरकारी अस्पताल एमवायएच में भी हालत समान हैं. डॉ. श्वेता इस बात की पुष्टि करती हैं कि इंजेक्शन और दवाओं की भारी कमी बनी हुई है.

ब्लैक फंगस के मरीज की जांच करते चिकित्सक. (फोटो: पीटीआई)
ब्लैक फंगस के मरीज की जांच करते चिकित्सक. (फोटो: पीटीआई)

कमी ग्वालियर में भी है लेकिन जेएएच अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आकेएस धाकड़ कहते हैं, ‘चिकित्सा क्षेत्र में मेरा 20-22 साल का अनुभव है. ब्लैक फंगस एक दुर्लभ बीमारी है. हाल में अचानक मामले बढ़े हैं. इस हिसाब से दवा निर्माण नहीं था जिससे दवा की कमी है. हालांकि, सरकार ने हमें आश्वस्त किया है कि आवश्यकतानुसार दवा/इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे.’

दवा व इंजेक्शन की उपलब्धता से इतर देखें तो ब्लैक फंगस के खिलाफ जंग में सरकारी नीतियों पर भी सवाल उठ रहे हैं. जानकार बताते हैं कि ब्लैक फंगस में ऑपरेशन जरूरी है. सरकार ने इलाज के लिए अलग से यूनिट तो बना दिए लेकिन ऑपरेशन थिएटर्स (ओटी) की संख्या बढ़ाने पर काम नहीं किया.

जानकार बताते हैं, ‘ब्लैक फंगस इतनी तेजी से फैलता है कि तत्काल सर्जरी जरूरी है. हमीदिया का ही उदाहरण लें तो वहां दिन में सिर्फ 3-4 ऑपरेशन हो पाते हैं. जबकि भर्ती मरीजों की वर्तमान संख्या करीब 80 है. यही चला तो कोरोना से ज्यादा जानलेवा ब्लैक फंगस साबित होगा.’

उन्होंने हमें यह भी बताया कि हमीदिया में केवल कोरोना से उबर चुके लोगों की सर्जरी हो रही है, संक्रमितों की नहीं. उनकी रिपोर्ट जब तक निगेटिव न आए, सर्जरी नहीं करते. भले ही वह दम तोड़ दे.

इन अव्यवस्थाओं पर जब अस्पताल अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र दवे से संपर्क किया तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया.

वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, ‘कोविड और पोस्ट-कोविड, दोनों स्थिति में सर्जरी की जरूरत पड़ती है. हमने करीब सात मेडिकल कॉलेज में कोविड और नॉन-कोविड ओटी की व्यवस्था की है.’

देश के चुनिंदा कर्क रोग अनुवांशिक विशेषज्ञों में शुमार भोपाल कैंसर अस्पताल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नारायण गणेशन बताते हैं, ‘कोरोना की पहली लहर के समय ही मैंने आशंका जताई थी कि स्टेरॉयड के अत्यधिक उपयोग से मरीजों में ब्लैक फंगस की समस्या हो सकती है. यह बेहद सामान्य समझ की बात थी कि कोरोना का बुखार आम बुखार जैसे दो-चार दिन नहीं रहता. यह हफ्तों चलता है. इस दौरान मरीज स्टेरॉयड्स के साथ-साथ ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहता है. इसलिए स्टेरॉयड्स की अधिकता और ऑक्सीजन देते समय ह्युमिडीफायर में सादा पानी का प्रयोग, ब्लैक फंगस को बढ़ावा देता ही. अगर जिम्मेदारों ने समय पर इस दिशा में काम किया होता तो ब्लैक फंगस का खतरा पैदा नहीं होता.’

बहरहाल, आईसीएमआर और केंद्र व राज्य सरकारों ने गाइडलाइन जारी की है कि कोरोना संक्रमितों के इलाज में स्टेरॉयड्स के प्रयोग में सावधानी बरती जाए और ह्युमिडीफायर में डिस्टिल्ड वॉटर का प्रयोग हो.

इस बीच, राज्य सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है लेकिन गौर करने वाली बात है कि ऐसा तब हुआ जब केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से ऐसा करने की अपील की. अन्यथा जिस हरियाणा राज्य में ब्लैक फंगस के 200 मामले भी सामने नहीं आए थे, वहां इसे महामारी घोषित कर दिया गया था, जबकि प्रदेश के एक अकेले शहर (भोपाल या इंदौर) में ही 250 से ज्यादा मामले सामने पर भी शिवराज सरकार इसे महामारी मानने तैयार नहीं थी.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)

bonus new member slot garansi kekalahan mpo http://compendium.pairserver.com/ http://compendium.pairserver.com/bandarqq/ http://compendium.pairserver.com/dominoqq/ http://compendium.pairserver.com/slot-depo-5k/ https://compendiumapp.com/app/slot-depo-5k/ https://compendiumapp.com/app/slot-depo-10k/ https://compendiumapp.com/ckeditor/judi-bola-euro-2024/ https://compendiumapp.com/ckeditor/sbobet/ https://compendiumapp.com/ckeditor/parlay/ https://sabriaromas.com.ar/wp-includes/js/pkv-games/ https://compendiumapp.com/comp/pkv-games/ https://compendiumapp.com/comp/bandarqq/ https://bankarstvo.mk/PCB/pkv-games/ https://bankarstvo.mk/PCB/slot-depo-5k/ https://gen1031fm.com/assets/uploads/slot-depo-5k/ https://gen1031fm.com/assets/uploads/pkv-games/ https://gen1031fm.com/assets/uploads/bandarqq/ https://gen1031fm.com/assets/uploads/dominoqq/ https://www.wikaprint.com/depo/pola-gacor/ https://www.wikaprint.com/depo/slot-depo-pulsa/ https://www.wikaprint.com/depo/slot-anti-rungkad/ https://www.wikaprint.com/depo/link-slot-gacor/ depo 25 bonus 25 slot depo 5k pkv games pkv games https://www.knowafest.com/files/uploads/pkv-games.html/ https://www.knowafest.com/files/uploads/bandarqq.html/ https://www.knowafest.com/files/uploads/dominoqq.html https://www.knowafest.com/files/uploads/slot-depo-5k.html/ https://www.knowafest.com/files/uploads/slot-depo-10k.html/ https://www.knowafest.com/files/uploads/slot77.html/ https://www.europark.lv/uploads/Informativi/pkv-games.html/ https://www.europark.lv/uploads/Informativi/bandarqq.html/ https://www.europark.lv/uploads/Informativi/dominoqq.html/ https://www.europark.lv/uploads/Informativi/slot-thailand.html/ https://www.europark.lv/uploads/Informativi/slot-depo-10k.html/ https://www.europark.lv/uploads/Informativi/slot-kakek-zeus.html/ https://www.europark.lv/uploads/Informativi/rtp-slot.html/ https://www.europark.lv/uploads/Informativi/parlay.html/ https://www.europark.lv/uploads/Informativi/sbobet.html/ https://st-geniez-dolt.com/css/images/pkv-games/ https://st-geniez-dolt.com/css/images/bandarqq/ https://st-geniez-dolt.com/css/images/dominoqq/ https://austinpublishinggroup.com/a/judi-bola-euro-2024/ https://austinpublishinggroup.com/a/parlay/ https://austinpublishinggroup.com/a/judi-bola/ https://austinpublishinggroup.com/a/sbobet/ https://compendiumapp.com/comp/dominoqq/ https://bankarstvo.mk/wp-includes/bandarqq/ https://bankarstvo.mk/wp-includes/dominoqq/ https://tickerapp.agilesolutions.pe/wp-includes/js/pkv-games/ https://tickerapp.agilesolutions.pe/wp-includes/js/bandarqq/ https://tickerapp.agilesolutions.pe/wp-includes/js/dominoqq/ https://tickerapp.agilesolutions.pe/wp-includes/js/slot-depo-5k/ https://austinpublishinggroup.com/group/pkv-games/ https://austinpublishinggroup.com/group/bandarqq/ https://austinpublishinggroup.com/group/dominoqq/ https://austinpublishinggroup.com/group/slot-depo-5k/ https://austinpublishinggroup.com/group/slot77/ https://formapilatesla.com/form/slot-gacor/ https://formapilatesla.com/wp-includes/form/slot-depo-10k/ https://formapilatesla.com/wp-includes/form/slot77/ https://formapilatesla.com/wp-includes/form/depo-50-bonus-50/ https://formapilatesla.com/wp-includes/form/depo-25-bonus-25/ https://formapilatesla.com/wp-includes/form/slot-garansi-kekalahan/ https://formapilatesla.com/wp-includes/form/slot-pulsa/ https://ft.unj.ac.id/wp-content/uploads/2024/00/slot-depo-5k/ https://ft.unj.ac.id/wp-content/uploads/2024/00/slot-thailand/ bandarqq dominoqq https://perpus.bnpt.go.id/slot-depo-5k/ https://www.chateau-laroque.com/wp-includes/js/slot-depo-5k/ pkv-games pkv pkv-games bandarqq dominoqq slot bca slot xl slot telkomsel slot bni slot mandiri slot bri pkv games bandarqq dominoqq slot depo 5k slot depo 5k bandarqq https://www.wikaprint.com/colo/slot-bonus/ judi bola euro 2024 pkv games slot depo 5k judi bola euro 2024 pkv games slot depo 5k judi bola euro 2024 pkv games bandarqq dominoqq slot depo 5k slot77 depo 50 bonus 50 depo 25 bonus 25 slot depo 10k bonus new member pkv games bandarqq dominoqq slot depo 5k slot77 slot77 slot77 slot77 slot77 pkv games dominoqq bandarqq slot zeus slot depo 5k bonus new member slot depo 10k kakek merah slot slot77 slot garansi kekalahan slot depo 5k slot depo 10k pkv dominoqq bandarqq pkv games bandarqq dominoqq slot depo 10k depo 50 bonus 50 depo 25 bonus 25 bonus new member