लोकसभा चुनाव: मध्य प्रदेश में तीसरे चरण में किसका पलड़ा भारी है?

लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में मंगलवार मध्य प्रदेश की नौ सीटों पर वोट डाले जाएंगे, जहां राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों और एक केंद्रीय मंत्री की क़िस्मत दांव पर लगी है.

‘अग्निवीरों’ का नया निशान: लोहा, लकड़ी और किराने की दुकान

मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में सेना में जाने की लम्बी परम्परा रही है. मसलन, अब तक हर भर्ती में मुरैना के काजी बसई गांव के 4-5 युवक सेना में चुने जाते थे. अग्निपथ योजना आने के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि गांव से कोई नहीं चुना गया. सेना की भर्ती पर निर्भर रहते आये ये युवक अब अनजाने काम खोज रहे हैं.

केरल की लड़ाई: बिखरे विपक्षी गठबंधन के सामने क्या भाजपा राज्य में अपनी पहली जीत दर्ज करा पाएगी?

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में केरल में होने जा रहा मुक़ाबला न केवल भाजपा, बल्कि विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण है. भाजपा ने आज तक राज्य में कोई संसदीय सीट नहीं जीती है, वहीं केंद्र में भाजपा की विभाजनकारी राजनीति को 'इंडिया' गठबंधन के बैनर तले चुनौती देने की बात करने वाले विपक्षी दल केरल में एलडीएफ और यूडीएफ में बंटकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं.

छिंदवाड़ा की कांग्रेस बगावत: कमल नाथ का बुझा हुआ तीर, जिसने अपना शिकार कहीं और खोज लिया

ज़मीनी ख़बर: पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के भाजपा में शामिल होने की अटकलों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के एकमात्र गढ़ को कमज़ोर कर दिया.

नागपुर का सीमावर्ती छिंदवाड़ा: क्या भाजपा मध्य प्रदेश में कांग्रेस का अंतिम किला जीत पाएगी?

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के ‘मिशन 29’ की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बनी वरिष्ठ कांग्रेसी कमल नाथ के प्रभाव वाली छिंदवाड़ा लोकसभा सीट को जीतने के लिए पार्टी ने ‘दल बदल की राजनीति’ को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है.

कच्चाथीवू द्वीप विवाद: इतिहास, राजनीति और परिणाम

कच्चाथीवू द्वीप का राजनीतिक इतिहास और इस विषय पर भाजपा द्वारा उठाया गया विवाद इंगित करता है कि लंबे समय से तमिलनाडु में ज़मीन तलाश रही पार्टी के लिए यह मुद्दा मतदाताओं को लुभाने का ज़रिया है.

महाराष्ट्र: वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय में छात्रों को महात्मा गांधी की श्रद्धांजलि सभा करने से रोका गया

30 जनवरी की शाम वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में छात्रों द्वारा आयोजित गांधी की श्रद्धांजलि सभा को विश्वविद्यालय प्रशासन ने इजाज़त न लिए जाने का हवाला देकर रोक दिया. छात्रों का कहना है कि वे विद्यार्थियों के लिए निर्दिष्ट जगह पर सभा कर रहे थे, जिसके लिए प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य नहीं है.

मध्य प्रदेश: भाजपा की जीत के बीच सीट बचाने में विफल रहे शिवराज सरकार के 40 फीसदी मंत्री

मध्य प्रदेश में जहां भारतीय जनता पार्टी ने इतिहास का सबसे अधिक वोट प्रतिशत (48.55) अर्जित किया, वहीं उसका अपने सभी मंत्रियों पर भरोसा जताने का दांव ज़्यादा सफल साबित नहीं हुआ. चुनाव में उतरे शिवराज सिंह कैबिनेट के 31 में से 12 मंत्री चुनाव हारे हैं.

मध्य प्रदेश: क्या केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों को चुनाव में उतारने से भाजपा को कोई लाभ हुआ?

मध्य प्रदेश में भाजपा ने 3 केंद्रीय मंत्रियों, 4 सांसदों और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को चुनाव लड़ाया था. इन आठ नेताओं में से छह अपनी-अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे हैं.

मध्य प्रदेश: भाजपा की जीत के बीच भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए ख़ुश होने की वजह कम हैं

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है, हालांकि ये नतीजे ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए निराशाजनक हैं. पार्टी ने सिंधिया के कुल 16 समर्थकों को चुनावी मैदान में उतारा था, उनमें से 8 की हार हुई है. हारने वालों में तीन मंत्री और दो विधायक भी शामिल हैं.

मध्य प्रदेश: पिछले पांच सालों में सरकार ने जनता के लिए क्या किया?

मध्य प्रदेश में चौदहवीं विधानसभा (2018-2023) ने भाजपा और कांग्रेस, दो सरकारों को देखा, जहां जनता ने राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं, दल-बदल तो देखे ही, साथ ही बढ़ती कट्टरता और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को पैठ बनाते देखा. इन पांच सालों के घटनाक्रमों से प्रदेश में भविष्य की राजनीति की दिशा समझी जा सकती है. 

मध्य प्रदेश: केंद्रीय मंत्री के बेटे का एक और वीडियो वायरल, सैकड़ों करोड़ की कथित डील करते दिखे

बीते हफ्ते एक बिचौलिए के साथ करोड़ों की 'डील' का वीडियो सामने आने के बाद फिर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे सैकड़ों करोड़ के लेनदेन की बात करते दिखते हैं. मध्य प्रदेश की दिमनी सीट से चुनाव लड़ रहे नरेंद्र सिंह मुख्यमंत्री पद की रेस में भी हैं.

मध्य प्रदेश चुनाव: क्या शिवराज कांग्रेस के साथ ही मोदी-शाह की चुनौती से भी जूझ रहे हैं?

विधानसभा चुनाव में भाजपा ने केंद्रीय मंत्री समेत सांसदों और वरिष्ठ नेताओं को उतारा, फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भाषण आदि में मौजूदा सीएम का कोई ज़िक्र नहीं हुआ. ऐसे में पार्टी का संभावित मुख्यमंत्री के सवाल पर गोलमोल जवाब देना शिवराज सिंह चौहान के मध्य प्रदेश की राजनीति में भविष्य पर सवाल खड़े करता है.

मध्य प्रदेश में शिवराज का ‘बुलडोज़र’ कमज़ोरों के ख़िलाफ़ ही क्यों चला है?

विशेष रिपोर्ट: 2020 में भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद से लगभग हर संगीन अपराध में न्यायिक फैसले का इंतजार किए बिना आरोपियों को सज़ा देने के लिए उनसे जुड़े निर्माण अवैध बताकर बुलडोज़र चला दिया गया.  कथित अपराध की सज़ा आरोपी के परिजनों को देने की इन मनमानी कार्रवाइयों का शिकार ज़्यादातर मुस्लिम, दलित और वंचित तबके के लोग ही रहे.

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