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दीपक गोस्वामी

बृज भूषण शरण सिंह: अपराध के मैदान का धुरंधर खिलाड़ी

भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त खिलाड़ियों ने महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. बृज भूषण ख़ुद को पाक-साफ़ कह रहे हैं लेकिन उनका आपराधिक गतिविधियों से भरा अतीत एक अलग ही कहानी बताता है.

मध्य प्रदेश: क्या शिवराज सरकार के पेसा क़ानून लागू करने की वजह आदिवासी हित नहीं चुनावी है?

मध्य प्रदेश सरकार बीते दिनों पेसा क़ानून लागू करने के बाद से इसे अपनी उपलब्धि बता रही है. 1996 में संसद से पारित इस क़ानून के लिए ज़रूरी नियम बनाने में राज्य सरकार ने 26 साल का समय लिया. आदिवासी नेताओं का कहना है कि शिवराज सरकार के इस क़दम के पीछे आदिवासियों की चिंता नहीं बल्कि समुदाय को अपने वोट बैंक में लाना है.

महाकाल मंदिर ट्रस्ट ने पूर्व राष्ट्रपति के स्वागत में दान में मिले 89 लाख रुपये ख़र्च किए थे

कांग्रेस विधायक महेश परमार द्वारा मध्य प्रदेश विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में पता चला है कि मई महीने में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर आने पर मंदिर ट्रस्ट ने 89 लाख रुपये अपने कोष से ख़र्च किए थे. कांग्रेस विधायक ने कहा कि यह राशि मंदिर ट्रस्ट को भक्तों से दान में मिलती है, इसे सिर्फ़ भक्तों की सुविधाओं पर ख़र्च किया जाना चाहिए, लेकिन इसे वीवीआईपी के आगमन पर ख़र्च कर दिया गया.

आए दिन नेताओं के अस्पतालों के दौरों से बदलता क्या है?

आपबीती: मोरबी पुल हादसे के बाद प्रधानमंत्री मोदी के अस्पताल के दौरे से पहले कायापलट की तस्वीरें सामने आई थीं. यह सब नया नहीं है. मध्य प्रदेश के ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में ऐसे कुछ दौरों का गवाह रहने के चलते जानता हूं कि नेताओं के ऐसे दौरों से अख़बारों की सुर्ख़ियों के अलावा और कुछ नहीं बदलता है.

कुपोषण से जूझते मध्य प्रदेश में सामने आया पोषण आहार घोटाला

कैग की एक रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में बच्चों, किशोरियों और गर्भवती व धात्री महिलाओं को बांटे जाने वाले टेक होम राशन में करोड़ों रुपये का गबन हुआ है. साथ ही, पोषण आहार की गुणवत्ता भी मानकों से नीचे पाई गई है. इस मंत्रालय का प्रभार स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास है.

‘मोहम्मद ज़ुबैर जैसे पत्रकार रास्ते से हट जाएं तो भाजपा बेरोक-टोक झूठ फैला सकती है’

वीडियो: फैक्ट-चेक वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को बीते 27 जून को धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था. उनके ख़िलाफ़ एक अज्ञात ट्विटर एकाउंट के ज़रिये शिकायत दर्ज कराई गई थी. द वायर की पड़ताल में सामने आया है कि उस एकाउंट का संबंध भारतीय जनता युवा मोर्चा के एक पदाधिकारी और टेक फॉग नेटवर्क से है. इस पड़ताल को अंजाम देने वाले देवेश कुमार और नाओमी बार्टन से दीपक गोस्वामी की बातचीत.

मध्य प्रदेश: पुलिस हिरासत से जारी पत्रकार और अन्य की अर्द्धनग्न तस्वीर के पीछे की कहानी क्या है

कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश के सीधी ज़िले के कोतवाली थाने के भीतर अर्धनग्न अवस्था में खड़े कुछ लोगों की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. आरोप है कि स्थानीय भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ल के इशारे पर पुलिस ने पत्रकार और अन्य लोगों को सबक सिखाने के लिए उन्हें हिरासत में लेकर उनके कपड़े उतरवाए और लगभग नग्न अवस्था में उनकी तस्वीर सार्वजनिक कर दी.

यूपी चुनाव: हार के बावजूद सपा ने अपने चुनावी इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सीटों के लिहाज़ से भले ही पिछड़ी हो, लेकिन मत प्रतिशत के मामले में उसने लंबी छलांग लगाई है. अपने चुनावी इतिहास में पहली बार उसे 30 फीसदी से अधिक मत मिले हैं.

उत्तर प्रदेश: चुनाव दर चुनाव साख खोती कांग्रेस के लिए वापसी की राह बेहद कठिन है

आज़ादी के बाद से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का एकछत्र राज हुआ करता था, लेकिन आज हालात ये हैं कि किसी समय राज्य की नब्बे फीसदी से अधिक (430 में से 388) सीट जीतने वाली कांग्रेस दो सीटों पर सिमट कर रह गई है.

यूपी विधानसभा चुनाव: राज्य के चुनावी इतिहास में बसपा का सबसे ख़राब प्रदर्शन

यूपी की 403 सीटों पर उतरी बसपा के खाते में महज़ एक सीट आई है. साल 1989 में पार्टी के गठन के बाद से यह उसका सबसे ख़राब प्रदर्शन है. उसे 12.88 फीसदी मत मिले हैं. इससे कम मत आख़िरी बार उसे तीन दशक पहले मिले थे, लेकिन सीट संख्या तब दहाई अंकों मे थी.

यूपी चुनाव: क्या चुनावी आंकड़े सपा की वापसी और भाजपा की विदाई का संकेत दे रहे हैं

उत्तर प्रदेश के पिछले तीन दशकों से अधिक के विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर गौर करते हैं तो कुछ रोचक नतीजे निकलकर सामने आते हैं, जिनके अनुसार इस बार सपा अगर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब होती है तो यह यूपी की राजनीति के लिहाज़ से एक दुर्लभ घटना होगी.

उत्तर प्रदेश चुनाव: क्या समाजवादी पार्टी योगी आदित्यनाथ सरकार को हटा पाने की स्थिति में है

यूपी में बीते कुछ चुनावों से सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला ही राजनीतिक दलों की सफलता का आधार बना है. वर्तमान चुनाव में समाजवादी पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग चर्चा में है. हालांकि जानकारों के अनुसार, पिछले विधानसभा व लोकसभा चुनावों के दो अलग-अलग सपा गठबंधनों की विफलता के चलते इस बार के गठबंधन की कामयाबी को लेकर कोई सटीक दावा नहीं किया जा सकता.

उत्तर प्रदेश चुनाव: क्या प्रियंका गांधी कांग्रेस को नई पहचान देने में कामयाब हो सकेंगी

2019 के लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश से सक्रिय राजनीति में क़दम रखा था, तब भले ही वे कोई कमाल नहीं दिखा सकीं, पर उसके बाद से राज्य में उनकी सक्रियता चर्चा में रही. विपक्ष के तौर पर एकमात्र प्रियंका ही थीं जो प्रदेश में हुई लगभग हर अवांछित घटना को लेकर योगी सरकार को घेरती नज़र आईं.

उत्तर प्रदेश: पृथक बुंदेलखंड की मांग चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बन पाती है

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 ज़िलों में फैले बुंदेलखंड को पृथक राज्य बनाने की मांग क़रीब 65 वर्ष पुरानी है. नब्बे के दशक में इसने आंदोलन का रूप भी लिया, समय-समय पर नेताओं ने इसके सहारे वोट भी मांगे लेकिन अब यह मतदाताओं को प्रभावित कर सकने वाला मुद्दा नहीं रह गया है.

यूपी: उमा भारती द्वारा गोद लेने के बावजूद पहुज नदी की स्थिति बद से बदतर क्यों होती चली गई

ग्राउंड रिपोर्ट: साल 2014 में तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने सांसद ग्राम योजना की तर्ज पर अपने संसदीय क्षेत्र झांसी की पहुज नदी को गोद लेते हुए इसके संरक्षण का बीड़ा उठाया था, लेकिन आज वही पहुज नदी बांध निर्माण, प्रदूषण व अतिक्रमण के चलते अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है.