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छत्तीसगढ़: फायरिंग में तीन लोगों की मौत के मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के सिलगर गांव स्थित सीआरपीएफ के सुरक्षा शिविर के विरोध में आदिवासियों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा था. इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फायरिंग में बीते 17 मई को तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए थे. सुरक्षाबलों ने मारे गए लोगों को माओवादी बताया था और मृतकों के परिजनों ने इस बात से इनकार किया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के सिलगर गांव में सीआरपीएफ के सुरक्षा शिविर के खिलाफ आदिवासियों के प्रदर्शन के दौरान फायरिंग में तीन लोगों की मौत के मामले की मजिस्ट्रेट जांच की घोषणा की गई है.

दरअसल सुरक्षाबलों ने मारे गए लोगों को माओवादी बताया था और मृतकों के परिजनों ने इस बात से इनकार किया है.

सुकमा जिले के अधिकारियों ने बताया कि कलेक्टर विनीत नंदनवार ने जगरगुंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिलगर गांव में 17 मई को हुई घटना के संबंध में मजिस्ट्रेट जांच का निर्देश दिया है.

अधिकारियों ने बताया कि कलेक्टर ने घटना के संबंध में पुलिस अधीक्षक सुकमा के प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त करते हुए घटना की जांच के लिए डिप्टी कलेक्टर रूपेंद्र पटेल को जांच अधिकारी नियुक्त किया है.

उन्होंने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट ने जांच के लिए बिंदु निर्धारित करते हुए जांच अधिकारी को एक माह के भीतर जांच पूरी कर प्रतिवेदन और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, आदिवासी समुदायों के प्रदर्शनकारी लोगों के प्रतिनिधियों ने बीते रविवार को सुकमा और बीजापुर जिलों के पुलिस महानिरीक्षक और कलेक्टरों से मुलाकात की थी, जिसके बाद मजिस्ट्रियल जांच का ये आदेश आया है. 

मालूम हो कि छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सिलगर गांव स्थित सीआरपीएफ के सुरक्षा शिविर के विरोध में आदिवासियों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा था. इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फायरिंग में बीते 17 मई को तीन लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे.

पुलिस ने मारे गए लोगों को माओवादी बताया है, जबकि आदिवासियों ने इस बात से इनकार किया है.

पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इस महीने की 17 तारीख को बड़ी संख्या में ग्रामीण सिलगर पहुंचे और शिविर पर पथराव शुरू कर दिया और इस दौरान कथित तौर पर माओवादी भी वहां मौजूद थे.

पुलिस का कहना है कि मरने वाले तीनों व्यक्ति माओवादी थे. हालांकि परिजनों ने इस दावे को झूठा करार दिया है और कहा है कि वे तीनों निर्दोष थे. इस मामले के पीड़ित परिजनों को दिए गए 10,000 रुपये भी प्रशासन को वापस कर दिए गए हैं और उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है.

सीआरपीएफ के सुरक्षा शिविर के विरोध में 30 गांवों के 5000 से अधिक लोग पिछले 10 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं.

वहीं राज्य के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति का गठन कर मामले की जांच की मांग की है.

उन्होंने घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा देने और घटना के दोषी लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की मांग की है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)