राजनीति

लक्षद्वीप प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल के मनमाने फैसलों पर भाजपा नेता दो धड़ों में बंटे

केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल कुछ प्रावधान लेकर आए हैं, जिसके तहत इस मुस्लिम बहुल द्वीप से शराब के सेवन से रोक हटाने, बीफ (गोवंश) उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने और तटीय इलाकों में मछुआरों के झोपड़े तोड़े जाने हैं. इनमें बेहद कम अपराध क्षेत्र वाले लक्षद्वीप में एंटी-गुंडा एक्ट लाना और दो से अधिक बच्चों वालों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का भी प्रावधान भी शामिल है.

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल. (फोटो: ट्विटर/@prafulkpatel)

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल. (फोटो: ट्विटर/@prafulkpatel)

नई दिल्ली: केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल द्वारा लाए गए नए और मनमाने प्रस्तावों के खिलाफ विपक्ष के एकजुट विरोध के बीच भाजपा भी दो खेमों में बंट गई है.

लक्षद्वीप का प्रभार मिलने के बाद प्रफुल्ल खोड़ा पटेल लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, लक्षद्वीप असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम विनियमन, लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन और लक्षद्वीप पंचायत कर्मचारी नियमों में संशोधन के मसौदे ले आए हैं, जिसका तमाम विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं.

उन्होंने पटेल पर मुस्लिम बहुल द्वीप से शराब के सेवन से रोक हटाने, पशु संरक्षण का हवाला देते हुए बीफ (गोवंश) उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने और तट रक्षक अधिनियम के उल्लंघन के आधार पर तटीय इलाकों में मछुआरों के झोपड़ों को तोड़ने का आरोप लगाया है.

इन कानूनों में बेहद कम अपराध क्षेत्र वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में एंटी-गुंडा एक्ट और दो से अधिक बच्चों वालों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का भी प्रावधान भी शामिल है.

लक्षद्वीप पशु संरक्षण नियमन के मसौदे के तहत प्रस्तावित गोमांस पर प्रतिबंध ने केंद्र शासित प्रदेश में अशांति फैलाने में योगदान दिया है, जहां मुसलमानों की आबादी 90 प्रतिशत से अधिक है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जहां पड़ोसी राज्य केरल के भाजपा नेताओं और लक्षद्वीप भाजपा अध्यक्ष ने प्रशासक प्रफुल्ल पटेल का समर्थन किया है तो वहीं अन्य नेताओं ने उनके फैसलों पर सवाल उठाया है और एकतरफा बताकर आलोचना की है.

इसके साथ रही केंद्रीय स्तर पर भी दो वरिष्ठ नेताओं ने लक्षद्वीप में जारी मौजूदा घटनाक्रमों पर असंतोष जाहिर किया है.

केंद्रीय स्तर के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, पटेल को लोगों को भरोसे में लेना चाहिए. उनके काम पार्टी के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और केंद्र सरकार की छवि को भी प्रभावित करेंगे.

बता दें कि प्रफुल्ल खोड़ा पटेल भाजपा के पूर्व नेता हैं और नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के दौरान वे वहां गृहमंत्री थे. उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का करीबी भी माना जाता है.

हाल ही में वह तब विवादों के घेरे में आ गए थे, जब दादरा एवं नागर हवेली से सात बार के सांसद मोहन डेलकर ने आत्महत्या कर ली थी.

डेलकर के बेटे ने दादरा एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल पर आरोप लगाया था. पटेल ने पिछले साल दिसंबर में लक्षद्वीप प्रशासक का कार्यभार संभाला था.

रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा की लक्षद्वीप इकाई के अध्यक्ष अब्दुल खादर प्रशासक हाजी पटेल का समर्थन करते हैं, जबकि महासचिव मोहम्मद कासिम उन्हें निरंकुश बताते हुए कहते हैं कि उनके प्रस्ताव द्वीपों के लोगों के हित में नहीं हैं. उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा.

लक्षद्वीप में कुछ भाजपा नेताओं ने भी पटेल के प्रस्तावों के विरोध में इस्तीफा दे दिया है, जबकि खादर ने दावा किया कि वे भाजपा से संबंधित नहीं हैं, कासिम ने कहा कि उनमें कुछ पदाधिकारी शामिल हैं.

मसौदा नियमनों के तहत लक्षद्वीप से शराब के सेवन पर रोक हटाई गई है. इसके अलावा पशु संरक्षण का हवाला देते हुए बीफ उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया है.

इन कानूनों में बेहद कम अपराध क्षेत्र वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में एंटी-गुंडा एक्ट और दो से अधिक बच्चों वालों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का भी प्रावधान भी शामिल है.

लक्षद्वीप की अधिकांश आबादी मछली पालन पर निर्भर है, लेकिन विपक्षी नेताओं का आरोप है कि प्रफुल्ल पटेल ने तट रक्षक अधिनियम के उल्लंघन के आधार पर तटीय इलाकों में मछुआरों की झोपड़ियों को तोड़ने के आदेश दिए हैं.

लक्षद्वीप के साथ बेहद मजबूत सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रखने वाले केरल के मुख्यमंत्री के साथ वामदलों और कांग्रेस के सांसदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में पत्र लिखा है.

कासिम ने द इंडियन एक्सप्रेस  को बताया, ‘पटेल के मसौदों से बेरोजगारी बढ़ जाएगी और लोग प्रताड़ित होंगे. वह लक्षद्वीप को राजा की तरह चला रहे हैं. उन्होंने यहां के नेताओं के साथ उपायों पर चर्चा नहीं की है और न ही किसी को विश्वास में लिया है.’

भाजपा की लक्षद्वीप इकाई के महासचिव मोहम्मद कासिम ने आगे कहा कि लक्षद्वीप में अपना पैर जमाने की कोशिश कर रही भाजपा प्रशासक का समर्थन करने की कीमत नहीं चुका पाएगी. उन्होंने आशंका जताई की पटेल के कदम पार्टी के प्रयासों पर पानी फेर देंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास नहीं है कि केंद्र सरकार ऐसे जनविरोधी, लक्षद्वीप विरोधी प्रस्तावों का समर्थन करती है.

बता दें कि हाल ही में हुए केरल विधानसभा चुनावों में एक बेहद ध्रुवीकृत चुनावी अभियान चलाने के बावजूद भाजपा को बेहद खराब परिणामों का सामना करना पड़ा.

वहीं लक्षद्वीप में भी भाजपा का समर्थन गिरता जा रहा है. कभी कांग्रेस की मजबूत लोकसभा सीट रहे लक्षद्वीप से साल 2014 और 2019 में एनसीपी के मोहम्मद फैजल पीपी चुने गए. वहीं भाजपा प्रत्याशी को 2009 में 245, 2014 में 187 और 20019 में 125 वोट मिले.

साल 2019 में भाजपा प्रत्याशी रहे अब्दुल खादर ने कहा कि पटेल के उपायों से लक्षद्वीप के विकास में मदद मिलेगी.

यह कहते हुए कि मोदी सरकार के कल्याणकारी उपायों और विकास पहलों को लक्षद्वीप में लोगों का समर्थन मिला है, खादर ने कहा, ‘पटेल को केंद्र द्वारा भेजा गया है और वह द्वीपों को नुकसान पहुंचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाएंगे.

उन्होंने दावा किया कि लक्षद्वीप में कांग्रेस और वाम दलों ने भाजपा के विकास को रोकने के लिए हाथ मिलाया था.

हालांकि, इसी के साथ ही खादर ने माना कि पटेल के कुछ उपायों की लोगों ने सराहना नहीं की. उन्होने कहा, ‘मुस्लिम बहुल इलाके में बीफ पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता. प्रस्तावित कुछ भूमि नियम भी अच्छे नहीं हैं, लेकिन हमारे पास हमेशा ऐसे प्रस्तावों को खारिज करने का विकल्प होता है. उन पर बात होनी चाहिए.’

कासिम ने कहा कि सवाल भाजपा द्वारा पटेल को नियुक्त करने का नहीं है. ‘हमारे पास अतीत में भी प्रशासक रहे हैं, जिनमें भाजपा सरकारों द्वारा भेजे गए प्रशासक भी शामिल हैं. इस क्षेत्र को अब तक किसी ने नुकसान नहीं पहुंचाया है. लेकिन यह प्रशासक इसे नष्ट करने पर आमादा है.’

वहीं, केरल में पटेल के कदमों को भाजपा का समर्थन मिल रहा है, जहां प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन लक्षद्वीप पर आतंकी संबंधों का हवाला देकर सही ठहराया. हालांकि, केरल की अन्य पार्टियां ऐसे दावों को खारिज करती हैं.

राहुल गांधी, शरद पवार ने प्रधानमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लक्षद्वीप में मसौदा नियमन को लेकर बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वह इस मामले में दखल दें और यह सुनिश्चित करें कि इस केंद्र-शासित प्रदेश के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल के आदेशों को वापस लिया जाए.

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पटेल की ओर से मनमाना ढंग से किए गए संशोधनों और घोषित ‘जन विरोधी नीतियों’ के कारण लक्षद्वीप के लोगों के भविष्य को खतरा पैदा हो गया है.

कांग्रेस नेता ने लक्षद्वीप में विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए पत्र में कहा, ‘लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण नियमन का मसौदा इस बात का सबूत है कि प्रशासक की ओर से लक्षद्वीप की पारिस्थितिकी शुचिता को कमतर करने का प्रयास किया जा रहा है.’

उन्होंने दावा किया कि इस मसौदे के प्रावधान लक्षद्वीप में भू-स्वामित्व से संबंधित सुरक्षा कवच को कमजोर करते हैं, कुछ निश्चित गतिविधियों के लिए पर्यावरण संबंधी नियमन को कमतर करते हैं तथा प्रभावित लोगों के लिए कानूनी उपायों को सीमित करते हैं.

राहुल गांधी के मुताबिक, कुछ अल्पकालिक वाणिज्यिक फायदों के लिए लक्षद्वीप में जीविका की सुरक्षा और सतत विकास की उपेक्षा की जा रही है.

उन्होंने पंचायत नियमन के मसौदे का उल्लेख करते हुए कहा कि दो से अधिक बच्चों वाले सदस्यों को अयोग्य ठहराने का प्रावधान पूरी तरह लोकतंत्र विरोधी है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि असामाजिक गतिविधि रोकथाम नियमन, लक्षद्वीप पशु संरक्षण नियमन में बदलाव और शराब की बिक्री पर रोक हटाना लक्षद्वीप के स्थानीय समुदाय के सांस्कृतिक और धार्मिक ताने-बाने पर हमला है.

उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया, ‘आप इसमें दखल दें और यह सुनिश्चित करें कि इन आदेशों को वापस लिया जाए.’

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखकर लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल को वापस बुलाने की मांग की. इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति से यह भी कहा है कि प्रफुल्ल पटेल के कार्यकाल में लिए गए फैसलों को रद्द किया जाए.

वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने बुधवार को लक्षद्वीप के प्रशासक की उनके निर्णय को लेकर आलोचना की और कहा कि उनसे (लोगों की) आजीविका के पारंपरिक साधन और इस द्वीप की अनोखी संस्कृति नष्ट हो जाएगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में पवार ने उनसे दखल देने की मांग की और कहा कि प्रशासक द्वारा लिए गए निर्णय ‘अवांछनीय एवं अतार्किक’ हैं.

पवार ने कहा, ‘लक्षद्वीप प्रशासक द्वारा लिए गए निर्णयों से आजीविका के पारंपरिक साधन और इस द्वीप की अनोखी संस्कृति नष्ट हो जाएगी. उनसे (नियमों) पहले ही बड़ी अशांति पैदा हो गई है और उनका विरोध किया जा रहा है.’

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मांग की कि लक्षद्वीप के वर्तमान प्रशासक के आदेश और नियमों पर पुनर्विचार हो और लक्षद्वीप प्रशासन को इन अतार्किक एवं अवांछनीय आदेशों को वापस लेने का जरूरी निर्देश दिया जाए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)