राजनीति

केरल विधानसभा में लक्षद्वीप के प्रशासक को वापस बुलाए जाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित

केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल कुछ प्रावधान लेकर आए हैं, जिसके तहत इस मुस्लिम बहुल द्वीप पर शराब के सेवन से रोक हटाने, बीफ उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने और तटीय इलाकों में मछुआरों के झोपड़े तोड़े जाने हैं. इनमें बेहद कम अपराध क्षेत्र वाले लक्षद्वीप में एंटी-गुंडा एक्ट लाना और दो से अधिक बच्चों वालों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का भी प्रावधान भी शामिल है.

New Delhi: Kerala CM Pinarayi Vijayan during a press conference in New Delhi on Saturday,June 23,2018.( PTI Photo/ Atul Yadav)(PTI6_23_2018_000063B)

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन. (फोटो: पीटीआई)

तिरुवनंतपुरमः केरल विधानसभा ने लक्षद्वीप के लोगों के साथ एकजुटता जताते हुए सोमवार को एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया, जिसमें द्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को वापस बुलाए जाने की मांग की गई है और केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है, ताकि द्वीप के लोगों के जीवन और उनकी आजीविका की रक्षा हो सके.

इसी के साथ केरल देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने केंद्रशासित प्रदेश में हुए हालिया घटनाक्रमों को लेकर लोगों का समर्थन करते हुए प्रस्ताव पारित किया है.

अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप में प्रफुल्ल खोड़ा पटेल के हालिया कदमों एवं प्रशासनिक सुधारों का स्थानीय लोग पिछले कुछ दिन से विरोध कर रहे हैं.

केरल के मुख्मयंत्री पिनराई विजयन ने यह प्रस्ताव पेश किया, जो 15वीं विधानसभा में इस प्रकार का पहला प्रस्ताव है.

उन्होंने केरल और लक्षद्वीप के लोगों के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को याद किया और वहां स्वाभाविक लोकतंत्र को नष्ट करने की कथित कोशिश के लिए केंद्र सरकार की निंदा की.

उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप का भविष्य चिंता का विषय है और इसकी अनूठी एवं स्थानीय जीवनशैली को कमजोर करना अस्वीकार्य है.

मुख्यमंत्री ने अपील की कि संवैधानिक मूल्यों को बरकरार रखने का समर्थन करने वालों को लक्षद्वीप के प्रशासक के कदमों का कड़ा विरोध करना चाहिए.

राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए सत्तारूढ़ माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव का समर्थन किया. यूडीएफ ने इसमें कुछ संशोधनों का सुझाव दिया.

प्रस्ताव में कहा गया है कि लक्षद्वीप में स्थानीय जीवन शैली एवं पारिस्थतिकी तंत्र नष्ट करके भगवा एजेंडे और कॉरपोरेट हितों को थोपने की कोशिश की जा रही है.

इसमें आरोप लगाया गया है कि सुधार के नाम पर शुरू किए गए एजेंडे का क्रियान्वयन नारियल के पेड़ों को भगवा रंग से रंगकर शुरू किया गया और अब यह इस स्तर तक बढ़ गया है कि द्वीपवासियों के पारंपरिक आवास, जीवन और प्राकृतिक संबंधों को नुकसान पहुंच रहा है.

प्रस्ताव में कहा गया है कि द्वीप में अपराध की दर असाधारण रूप से कम है, इसके बावजूद गुंडा एक्ट लागू करने के लिए कदम उठाए गए.

आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र के लोगों के प्राकृतिक आहार का हिस्सा बीफ को बाहर करने के प्रयास के जरिये गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के संघ परिवार के एजेंडे को पिछले दरवाजे से लागू किया जा रहा है.

प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रशासक ने केंद्रशासित प्रदेश के लोगों के स्थानीय जीवन और संस्कृति को धीरे-धीरे नष्ट करने का बीड़ा उठाया है.

विजयन ने प्रशासक को विभिन्न सरकारी विभागों के मामलों में हस्तक्षेप करने का विशेष अधिकार देने वाले केंद्र के कानून की निंदा की.

उन्होंने कहा कि यह अपनी पसंद के अधिकारी नियुक्त करके द्वीप के स्वाभाविक लोकतंत्र को कमजोर करने के समान है.

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘लक्षद्वीप में हालिया घटनाक्रम को संघ परिवार के एजेंडे की प्रयोगशाला के रूप में देखा जाना चाहिए. वे देश के लोगों की संस्कृति, भाषा, जीवनशैली और खानपान संबंधी आदतों को अपनी विचारधारा के अनुसार बदलने की कोशिश कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश के लोगों को कॉरपोरेट हितों और हिंदुवादी राजनीति का गुलाम बनाने की कोशिश के खिलाफ कड़ी आवाज उठाई जानी चाहिए.

विजयन ने कहा कि यह सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि केंद्रशासित प्रदेश और उसके मूल निवासियों की विशिष्टता को संरक्षित रखा जाए.

विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता वीडी सतीशन ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि सुधारों की आड़ में पटेल द्वारा लागू किए जा रहे एजेंडे को अरब सागर में फेंक दिया जाना चाहिए.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने प्रस्ताव को पेश करते हुए कहा कि पर्यटन, संस्कृति को बढ़ावा देने के नाम पर लक्षद्वीप के अस्तित्व को नकारा जा रहा है.

उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप प्रशासन आधिकारिक तौर पर लोगों के जीवन की रक्षा करने की बुनियादी जिम्मेदारी को नष्ट कर रहा है.

उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप में किए जा रहे अत्याचार औपनिवेशिक शासन के दौर से भी बदतर हैं.

बता दें कि छह अप्रैल को विधानसभा चुनाव में विजयन सरकार की शानदार जीत से सत्ता में वापसी के बाद से सदन में पेश किया गया यह पहला प्रस्ताव है.

पिछले हफ्ते केरल में सत्तारूढ़ एलडीएफ सरकार लक्षद्वीप के लोगों के समर्थन में आगे आई थी और इस मामले पर राज्य विधानसभा में प्रस्ताव लाने का वादा किया था.

मुख्यमंत्री विजयन का कहना है कि इस मामले पर हर किसी की मजबूत भावनाएं हैं, क्योंकि लक्षद्वीप के लोग हमारे भाई हैं.

सीपीआईएम के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ में पहले कहा गया था कि मुस्लिम बहुल्य लक्षद्वीप में प्रफुल्ल खोड़ा पटेल की नीतियां कश्मीर के अनुभवों को उजागर कर रही है लेकिन वास्तव में इसके लिए गुजरात मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा है.

बता दें कि मुस्लिम बहुल आबादी वाला लक्षद्वीप हाल ही में लाए गए कुछ प्रस्तावों को लेकर विवादों में घिरा हुआ है. वहां के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को हटाने की मांग की जा रही है.

पिछले साल दिसंबर में लक्षद्वीप का प्रभार मिलने के बाद प्रफुल्ल खोड़ा पटेल लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, लक्षद्वीप असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम विनियमन, लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन और लक्षद्वीप पंचायत कर्मचारी नियमों में संशोधन के मसौदे ले आए हैं, जिसका तमाम विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं.

उन्होंने पटेल पर मुस्लिम बहुल द्वीप से शराब के सेवन से रोक हटाने, पशु संरक्षण का हवाला देते हुए बीफ (गोवंश) उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने और तट रक्षक अधिनियम के उल्लंघन के आधार पर तटीय इलाकों में मछुआरों के झोपड़ों को तोड़ने का आरोप लगाया है.

इन कानूनों में बेहद कम अपराध क्षेत्र वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में एंटी-गुंडा एक्ट और दो से अधिक बच्चों वालों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का भी प्रावधान भी शामिल है.

लक्षद्वीप के साथ बेहद मजबूत सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रखने वाले केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन के साथ वामदलों और कांग्रेस के सांसदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में पत्र लिखा था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)