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अयोध्या ज़मीन घोटाले में सच सामने लाना सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारी: कांग्रेस

अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा भूमि खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मंदिर का निर्माण शीर्ष अदालत के आदेशानुसार किया जा रहा है. क्या यह ट्रस्ट बनाने वाले कोर्ट, उसके जज और प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारी नहीं है कि वे इसकी जांच कराएं.

अगस्त 2020 में अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

अगस्त 2020 में अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

नई दिल्ली: कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा भूमि खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उच्चतम न्यायालय से सच का पता लगाने के लिये अदालत की निगरानी में जांच का आदेश देकर ‘जिम्मेदारी’ निभाने का आग्रह किया.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि अयोध्या में भाजपा नेताओं के हाथों भगवान राम के नाम पर चंदा इकट्ठा कर ‘लूट’ की जा रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री और उच्चतम न्यायालय की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा कि भाजपा के एक नेता ने फरवरी में अयोध्या में 890 मीटर जमीन 20 लाख रुपये में खरीदी और फिर उसे 2.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि में मंदिर ट्रस्ट को बेचकर केवल 79 दिन में 1250 प्रतिशत का मुनाफा कमाया.

सुरजेवाला ने कहा, ‘भगवान राम के मंदिर का निर्माण उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुसार किया जा रहा है. क्या यह ट्रस्ट बनाने वाले उच्चतम न्यायालय, उसके न्यायाधीशों और प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी नहीं है कि वे सच का पता लगाएं और इसकी जांच कराएं.’

पत्रकारों ने सुरजेवाला से पूछा कि क्या पार्टी इस कदम के खिलाफ अदालत जाएगी तो उन्होंने कहा, ‘क्या उच्च न्यायालय को इस मामले पर स्वत: संज्ञान नहीं लेना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट को अपना कर्तव्य निभाते हुए अपनी निगरानी में, पूरे लेनदेन का ऑडिट कराना चाहिए और दोषियों को सजा देनी चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘अब सवाल यह है कि क्या शीर्ष अदालत और प्रधानमंत्री अपने कर्तव्य निभाएंगे? हम इसे उनके विवेक पर छोड़ते हैं. ‘

सुरजेवाला ने कहा कि अगर किसी की जिम्मेदारी बनती है तो वह हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने यह ट्रस्ट बनाया है. उन्होंने कहा, ‘यह न केवल नैतिकता नहीं बल्कि संवैधानिकता का भी सवाल है.’

कांग्रेस नेता ने कहा कि गेंद प्रधानमंत्री के पाले में है. देखते हैं कि वह क्या निर्णय लेते हैं. उन्होंने कहा कि जनता भगवान राम के नाम पर चंदा लूटने वालों को माफ नहीं करेगी.

इससे पहले, कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि इस साल 18 मार्च को पंजीकृत भूमि दस्तावेजों के अनुसार 2 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन ट्रस्ट ‘मिनटों के भीतर’ 18.5 करोड़ रुपये में बेच दी गई. पार्टी ने उच्चतम न्यायालय की निगरानी में ‘घोटाले’ की जांच की मांग की थी.

भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए दावा किया था कि जो लोग राम मंदिर निर्माण का विरोध कर रहे थे, वे अब झूठे और भ्रामक आरोप लगाकर इसे पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं.श्री राम जन्मभूमि तीर्थ न्यास ने भी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया था.

सुरजेवाला ने कहा कि ‘तथ्य’ सार्वजनिक हो चुके हैं. सच सामने लाने के लिये उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराए जाने की आवश्यकता है.

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने पांच सवाल रखे हैं. उन्होंने पूछा है कि:

1. क्या कारण है कि भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण के चंदे की खुली लूट करने वाले पापियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही करने के बारे में मोदी-आदित्यनाथ जी पूरी तरह से चुप हैं?

2. क्या पीएम-सीएम देश को बताएंगे कि 79 दिनों में जमीन की कीमत 1250 प्रतिशत कैसे बढ़ी?

3. जब भाजपा सरकार द्वारा भूमि की कीमत मात्र 4000 रु. प्रति वर्गमीटर आंकी गई, तो फिर राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट ने इसे 28,090 रुपये प्रतिवर्ग मीटर में क्यों खरीदा?

4. क्या भाजपा नेता राम मंदिर निर्माण के लिए इकट्ठे किए गए चंदे को चूना लगा मुनाफे की लूट में लगे हैं?

5. श्री राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए हजारों करोड़ के चंदे में कितनी और रजिस्ट्रियों में खुली लूटपाट हुई है? क्या सुप्रीम कोर्ट के तत्वाधान में पूरे मामले की जांच व पैसे के लेनदेन का ऑडिट कर सारे तथ्य देशवासियों के समक्ष नहीं रखे जाने चाहिए?

कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा के नेता धर्म-आस्था-विश्वास को बेच ‘मुनाफे की लूट’ में लगे हुए हैं और राम के मंदिर के चंदे की लूट ‘रामद्रोह’ है.

सुरजेवाला ने कहा, ‘मोदी-योगी सरकारों को दोषियों को सजा दिलाने के अपने बाध्यकारी कर्तव्य राजधर्म से बचकर नहीं भागना चाहिए.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)