तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के 85 फ़ीसदी हिस्से पर क़ब्जे़ का दावा किया, भारत ने राजनयिकों को बुलाया

अफ़ग़ान सरकार के अधिकारियों ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया कि तालिबान ने देश के अधिकांश हिस्से को नियंत्रित किया है. भारत ने कंधार के आसपास के नए इलाकों पर तालिबान के क़ब्ज़े के मद्देनज़र अपने वाणिज्य दूतावास से क़रीब 50 राजनयिकों और सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया है. अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा अफ़ग़ानिस्तान में वर्षों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की घोषणा मध्य अप्रैल में किए जाने के बाद तालिबान ने पूरे देश में अपनी गतिविधियां बढ़ा दीं.

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बगराम अमेरिकी एयर बेस के पास एक चेकपॉइंट पर तैनात अफगान नेशनल आर्मी का एक जवान. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

अफ़ग़ान सरकार के अधिकारियों ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया कि तालिबान ने देश के अधिकांश हिस्से को नियंत्रित किया है. भारत ने कंधार के आसपास के नए इलाकों पर तालिबान के क़ब्ज़े के मद्देनज़र अपने वाणिज्य दूतावास से क़रीब 50 राजनयिकों और सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया है. अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा अफ़ग़ानिस्तान में वर्षों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की घोषणा मध्य अप्रैल में किए जाने के बाद तालिबान ने पूरे देश में अपनी गतिविधियां बढ़ा दीं.

बगराम अमेरिकी एयर बेस के पास एक चेकपॉइंट पर तैनात अफगान नेशनल आर्मी का एक जवान. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

मास्को: युद्ध से जर्जर अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की रवानगी और देश के अधिकतर क्षेत्रों पर तेजी से बढ़ते तालिबान के नियंत्रण के बीच चरमपंथी समूह ने दावा किया है कि देश के 85 प्रतिशत हिस्से पर अब उसका कब्जा है.

इस बीच भारत ने अफगानिस्तान में सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति और कंधार के आसपास के नए इलाकों पर तालिबान के कब्जे के मद्देनजर इस दक्षिणी अफगान शहर में अपने वाणिज्य दूतावास से करीब 50 राजनयिकों और सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया है.

तालिबान ने साथ ही कहा है कि वह किसी भी व्यक्ति, संगठन और किसी अन्य को अफगानिस्तान की धरती का उपयोग पड़ोसी देशों, क्षेत्रीय देशों और अमेरिका और उसके सहयोगियों सहित दुनिया के देशों के खिलाफ नहीं होने देगा.

तालिबान के वरिष्ठ शिष्टमंडल के इस सप्ताह मास्को दौरे के अंत में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उक्त घोषणा की गई. इस दौरे का लक्ष्य यह आश्वासन देना था कि अफगानिस्तान में तेजी से पैर पसार रहे तालिबान से रूस या मध्य एशिया में उसके सहयोगी देशों को कोई खतरा नहीं होगा.

तालिबान प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन ने कहा, ‘हम लड़ना नहीं चाहते हैं. हम राजनीतिक वार्ता के माध्यम से राजनीतिक समाधान खोजना चाहते हैं.’ तालिबान के शिष्टमंडल ने अनुवादकों के माध्यम से बातचीत की.

हालांकि, तालिबान के इस दावे के सत्यापन का कोई तरीका नहीं है. गौरतलब है कि तालिबान ने अपने पिछले बयान में दावा किया था कि देश के 421 जिलों और जिला केंद्रों में से एक तिहाई से ज्यादा पर उनका नियंत्रण हो गया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अफगान सरकार के अधिकारियों ने इस दावे को खारिज कर दिया कि तालिबान ने देश के अधिकांश हिस्से को नियंत्रित किया है.

उन्होंने इसे लगभग 20 वर्षों की लड़ाई के बाद अमेरिका सहित विदेशी सेनाओं के पीछे हटने पर शुरू किए गए प्रोपगेंडा (प्रचार अभियान) का हिस्सा बताया.

हालांकि स्थानीय अफगान अधिकारियों का कहना है कि तालिबान लड़ाकों ने वापसी से उत्साहित होकर हेरात प्रांत के एक महत्वपूर्ण जिले पर कब्जा कर लिया है, जहां हजारों अल्पसंख्यक शिया हजारा समुदाय के लोग रहते हैं.

अफगान और तालिबान के अधिकारियों ने कहा कि तुर्कमेनिस्तान की सीमा पर एक उत्तरी शहर तोरघुंडी को भी तालिबान ने कब्जा कर लिया था.

बता दें कि इस सप्ताह की शुरुआत में तालिबान के तेजी से बढ़ने के कारण अफगानिस्तानी सैनिकों को भाग कर ताजिकिस्तान की सीमा में जाना पड़ा था.

ताजिकिस्तान का यह सैन्य शिविर रूस का सैन्य बेस है. ताजिकिस्तान ने अफगानिस्तान से साथ सटी अपनी दक्षिणी सीमा पर सुरक्षा मजबूत बनाने के लिए सैन्य रिजर्व से करीब 20,000 सैनिकों को बुलाया है.

रूस के अधिकारियों ने चिंता जताई है कि तालिबान के बढ़ते प्रभाव से मध्य एशिया में अफगानिस्तान के उत्तर में स्थित पूर्व सोवियत संघ देशों में अस्थिरता की स्थिति पैदा हो सकती हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा अफगानिस्तान में वर्षों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की घोषणा मध्य अप्रैल में किए जाने के बाद तालिबान ने पूरे देश में अपनी गतिविधियां बढ़ा दीं.

उन्होंने हाल ही में दर्जनों जिलों पर नियंत्रण कर लिया है और ज्यादातर क्षेत्रों पर बिना किसी संघर्ष के नियंत्रण हुआ है. पिछले एक सप्ताह में तालिबान ने ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान से सटे सीमावर्ती इलाकों और बीते आठ जुलाई को ईरान से सटे सीमावर्ती इलाके पर कब्जा कर लिया है.

हालांकि, मास्को में हुई बैठक में तालिबान ने वादा किया है कि वह प्रांतीय राजधानियों पर हमले नहीं करेगा या उन पर बलपूर्वक कब्जा नहीं करेगा, साथ ही उसने काबुल के साथ इस मुद्दे का ‘राजनीतिक हल’ निकलने की आशा जताई है.

तालिबान के वार्ताकार मावलावी शहाबुद्दीन देलावर ने कहा, ‘हम प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा नहीं करेंगे, ताकि अफगान नागरिकों के जीवन को खतरा न हो.’

देलावर ने कहा कि इन सभी बातों की गारंटी दी गई है, साथ ही मांग रखी गई है कि अफगान जेलों में मौजूद और तालिबान कैदियों को रिहा किया जाए. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के 85 प्रतिशत हिस्से पर अब तालिबान का कब्जा है.

तालिबान ने यह भी कसम खाई है कि वह किसी भी व्यक्ति, संगठन और किसी अन्य को अफगानिस्तान की धरती का उपयोग पड़ोसी देशों, क्षेत्रीय देशों और अमेरिका और उसके सहयोगियों सहित दुनिया के देशों के खिलाफ नहीं होने देगा.

ईरान की मीडिया में बीते नौ जुलाई को आई खबर के अनुसार, तालिबान का कब्जा ईरान और अफगानिस्तान से जुड़ी दो सीमाओं पर है, जिनमें व्यापार के लिए महत्वपूर्ण इस्लाम काला पर भी बीते आठ जुलाई को संगठन का नियंत्रण हो गया था.

ईरान के सरकारी रेडियो के अनुसार, तालिबान के आगे बढ़ने के कारण पीछे हट रहे करीब 300 अफगान सैनिक ईरान की सीमा में प्रवेश कर गए हैं.

अफगानिस्तान में एक प्रमुख तालिबान विरोधी कमांडर ने कहा कि वह ईरान के साथ सीमा पार करने सहित पश्चिमी अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण वापस लेने के लिए अफगान बलों के प्रयासों का समर्थन करेगा.

अफगानिस्तान के नेता मोहम्मद इस्माइल खान, जिसे व्यापक रूप से हेरात के शेर के रूप में जाना जाता है, ने नागरिकों से लड़ाई में शामिल होने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि घोर, बड़गी, निमरोज, फराह, हेलमंद और कंधार प्रांतों से सैकड़ों सशस्त्र नागरिक उनके घर आए थे और विदेशी सेना की वापसी से पैदा हुई सुरक्षा शून्य को भरने के लिए तैयार थे.

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बीते आठ जुलाई को कहा कि अफगान लोगों को अपना भविष्य खुद तय करना चाहिए और वह दो दशक पुराने युद्ध के लिए अमेरिकियों की दूसरी पीढ़ी को नहीं भेजेंगे.

बाइडेन ने काबुल में अमेरिकी दूतावास को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अमेरिकी बलों की अंतिम वापसी के लिए 31 अगस्त की लक्ष्य तिथि निर्धारित की, जिसमें लगभग 650 सैनिक थे.

बाइडेन ने कहा कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य मिशन अगस्त तक जारी रहेगा. उन्होंने कहा, ‘अमेरिका ने वही किया जिसके लिए हम अफगानिस्तान गए थे. हमें 9/11 पर हमला करने वाले आतंकवादियों की धरपकड़ करनी थी और ओसामा बिन लादेन को सजा देनी थी. हमें अफगानिस्तान को आतंकवादियों का अड्डा बनाने की उनकी धमकी को गलत साबित करना था.’

अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमले के बाद अमेरिकी बलों ने करीब बीस साल तक अफगानिस्तान में युद्ध लड़ा.

भारत ने अपने राजनयिकों और सुरक्षाकर्मियों को वापस बुलाया

भारत ने अफगानिस्तान में सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति और कंधार के आस-पास के नए इलाकों पर तालिबान के कब्जे के मद्देनजर इस दक्षिणी अफगान शहर में अपने वाणिज्य दूतावास से करीब 50 राजनयिकों और सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया है. इस संबंध में जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिसकर्मियों के एक समूह समेत भारतीय राजनयिकों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को स्वदेश लाने के लिए भारतीय वायुसेना के एक विशेष विमान को शनिवार को भेजा गया.

क्षेत्र में कई अहम इलाकों पर तालिबान के तेजी से कब्जा जमाने और पश्चिम अफगानिस्तान में सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर भारत ने कंधार में वाणिज्य दूतावास अस्थायी रूप से बंद करने का कदम उठाया है.

काबुल में भारतीय दूतावास ने मंगलवार को कहा था कि कंधार और मजार-ए-शरीफ में दूतावास और वाणिज्य दूतावासों को बंद करने की कोई योजना नहीं है.

दो दिन पहले विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह अफगानिस्तान में बिगड़ती स्थिति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर इसके प्रभाव को लेकर नजर रखे हुए है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा था, ‘हम स्थिति के अनुसार कदम उठाएंगे.’

क्षेत्र में हिंसा बढ़ने के मद्देनजर कम से कम दो विदेशी मिशन ने उत्तरी बाल्ख प्रांत की राजधानी मजार-ए-शरीफ में अपना संचालन बंद कर दिया है.

अफगानिस्तान में बिगड़ती स्थिति को लेकर भारत में बढ़ती चिंताओं के बीच, अफगानिस्तान के राजदूत फरीद मामुंदजे ने मंगलवार को विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला को अफगानिस्तान में स्थिति से अवगत कराया.

भारतीय दूतावास ने अफगानिस्तान की यात्रा करने वाले, वहां रहने और काम करने वाले सभी भारतीयों से पिछले हफ्ते कहा था कि वे अपनी सुरक्षा के संबंध में पूरी सावधानी बरतें और देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर सभी प्रकार की गैर-जरूरी यात्रा से बचें.

एक परामर्श में दूतावास ने कहा कि अफगानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति ‘खतरनाक’ बनी हुई है और आतंकवादी समूहों ने नागरिकों को निशाना बनाने सहित कई खतरनाक हमले किए हैं और भारतीय नागरिकों को अपहरण का अतिरिक्त ‘गंभीर खतरा’ है.

भारत अफगानिस्तान के नेतृत्व, स्वामित्व और नियंत्रण वाली एक राष्ट्रीय शांति और सुलह प्रक्रिया का समर्थन करता रहा है.

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद हनीफ अतमार ने मार्च में भारत का दौरा किया था. इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उन्हें शांतिपूर्ण, संप्रभु और स्थिर अफगानिस्तान के लिए भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता से अवगत कराया था.

मानवीय चिंताएं

अफगानिस्तान में जारी लड़ाई के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता अफगानिस्तान में दवाएं और आपूर्ति पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे और कुछ कर्मचारी हमले के बाद भाग गए थे.

रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय आपात स्थिति निदेशक, रिक ब्रेनन ने कहा कि कम से कम 1.84 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है, जिनमें 31 लाख बच्चे गंभीर कुपोषण के जोखिम में हैं.

काहिरा से वीडियो लिंक के माध्यम से बोलते हुए जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की एक ब्रीफिंग में ब्रेनन ने बताया, ‘हम आवश्यक दवाएं और आपूर्ति प्रदान करने में सक्षम होने की हमारी कमी के बारे में चिंतित हैं और हम स्वास्थ्य देखभाल पर हमलों के बारे में चिंतित हैं.’

उन्होंने कहा कि कुछ सहायता अगले सप्ताह तक पहुंच जाएगी, जिसमें 35 लाख कोविड-19 वैक्सीन खुराक और ऑक्सीजन सांद्रता शामिल हैं. इनमें अमेरिका द्वारा दान किए गए जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन की खुराक और कोवैक्स सुविधा के माध्यम से एस्ट्राजेनेका की खुराक शामिल थी.

संयुक्त राष्ट्र की बच्चों की एजेंसी यूनिसेफ ने कहा कि शुक्रवार को जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन की 14 लाख से अधिक खुराक का अमेरिकी दान आया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)