ब्राज़ील: संसद ने बैलट पेपर से मतदान कराने के राष्ट्रपति बोल्सोनारो के प्रस्ताव को ख़ारिज किया

ब्राज़ील के दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो ने धमकी दी है कि यदि चुनाव प्रक्रिया में बदलाव नहीं किया जाता है तो वे अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों को स्वीकार नहीं करेंगे. राष्ट्रपति चुनाव में उनका मुक़ाबला पूर्व राष्ट्रपति लुइज़ इनासिओ लूला डा सिल्वा से हैं और हाल के तमाम जनमत सर्वेक्षणों में लूला को बोल्सोनारो से काफी आगे बताया गया है.

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जेर बोल्सोनारो. (फोटो: रॉयटर्स)

ब्राज़ील के दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो ने धमकी दी है कि यदि चुनाव प्रक्रिया में बदलाव नहीं किया जाता है तो वे अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों को स्वीकार नहीं करेंगे. राष्ट्रपति चुनाव में उनका मुक़ाबला पूर्व राष्ट्रपति लुइज़ इनासिओ लूला डा सिल्वा से हैं और हाल के तमाम जनमत सर्वेक्षणों में लूला को बोल्सोनारो से काफी आगे बताया गया है.

जेयर बोल्सोनारो. (फोटो: रॉयटर्स)

ब्रासीलिया: ब्राजील की संसद के निचले सदन ने बीते 10 अगस्त को राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो द्वारा समर्थित एक ऐसे प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिसके चलते देश के वोटिंग सिस्टम में व्यापक स्तर पर तब्दीली आने की संभावना थी. इसमें अन्य बदलावों के साथ बैलट पेपर (मत पत्र) के जरिये चुनाव कराने का भी प्रावधान शामिल था.

इतना ही नहीं दक्षिणपंथी बोल्सोनारो ने धमकी दी है कि यदि वोटिंग सिस्टम में बदलाव नहीं किया जाता है तो वे अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों को स्वीकार नहीं करेंगे, जहां वे वामपंथी पूर्व राष्ट्रपति लुइज़ इनासिओ लूला डा सिल्वा से हारते हुए दिख रहे हैं. हाल के तमाम जनमत सर्वेक्षणों में लूला को बोलसोनारो से काफी आगे बताया गया है.

बहरहाल बोल्सोनारो ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग में धोखाधड़ी के अप्रमाणित दावे किए हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ब्राजील के कांग्रेस के निचले सदन ने इस प्रस्ताव के पक्ष में 229 वोट डाले, जबकि इसके विरोध में 218 वोट पड़े थे. वोटिंग के दौरान दर्जनों सदस्य अनुपस्थित थे. इस मामले में संवैधानिक संशोधन को मंजूरी देने के लिए आवश्यक 60 फीसदी वोट से 79 वोट कम था. इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए 513 में से 308 वोट की जरूरत थी.

जिस समय सदन में इस प्रस्ताव पर वोटिंग हो रही थी, उस वक्त बोल्सोनारो एक मिलिट्री परेड में हिस्सा ले रहे थे. राष्ट्रपति भवन के सामने से इस तरह टैंक गुजरने के दृश्य को देखकर कई लोग भयभीत हुए और साल 1964-1985 के दौरान तानाशाही शासन की यादें ताजा हो गई थीं.

नौसेना ने कहा कि इस परेड की योजना कांग्रेस के निचले सदन में होने वाले मतदान से बहुत पहले से बनाई गई थी और इसका मकसद रविवार को होने वाले वार्षिक सैन्य अभ्यास में राष्ट्रपति को आमंत्रित करना था.

कांग्रेस के निचले सदन की स्पीकर अर्थर लीरा ने कहा कि सदन में महत्वपूर्ण वोटिंग से पहले इस तरह का सैन्य परेड ‘दुखद संयोग’ है.

अन्य सांसदों ने कहा कि राष्ट्रपति भवन के सामने असामान्य सैन्य उपस्थिति उन्हें डराने के लिए थी.

मध्यमार्गी ब्राजीलियाई डेमोक्रेटिक मूवमेंट पार्टी के सीनेटर सिमोन टेबेट ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘सड़क पर टैंक, खास तौर पर पेपर बैलेट संशोधन पर वोट के दिन एक वास्तविक, स्पष्ट और असंवैधानिक धमकी है.’

वामपंथी कांग्रेसी पेरपेटुआ अल्मेडा ने कहा, ‘बोल्सोनारो ने एक सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास को राजनीतिक तमाशे में बदल दिया है. यह उनके गिरती मतदान संख्या की प्रतिक्रिया में शक्ति प्रदर्शन है. इसका उल्टा असर होगा.’

मालूम हो कि बोल्सोनारो लगातार चुनाव नतीजों का न मानने और बैलेट पेपर के जरिये मतदान कराने की बात कहते आ रहे हैं. बीते जुलाई महीने में भी उन्होंने कहा था कि अगले साल होने वाले चुनाव में अगर वह हार गए तो विजयी उम्मीदवार को तब तक सत्ता नहीं सौंपेंगे, जब तक उसकी जीत ‘साफ-सुथरी’ होने की पुष्टि न हो जाए.

बोलसोनारो ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर भी सवाल उठाए थे और इसे बदलने और मतपत्रों के जरिये मतदान कराने के लिए संवैधानिक सुधार की पेशकश की थी, जबकि ब्राजील में 1996 से ही इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से मतदान कराए जाते रहे हैं.

बोलसोनारो ने कहा था कि इलेट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम में धोखाधड़ी की गुंजाइश है. अगर वोटिंग इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से नहीं हुई होती तो वह 2018 के चुनाव में पहले चरण के ही मतदान में जीत गए होते.

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