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पैरालंपिक में भारत का स्वर्णिम प्रदर्शन जारी, एक दिन में दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक आए

टोक्यो पैरालंपिक खेलों में निशानेबाज़ी की पी-4 मिश्रित 50 मीटर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में शीर्ष दोनों स्थान भारत के नाम रहे. निशानेबाज़ मनीष नरवाल ने स्वर्ण पदक पर निशाना साधा और सिंहराज अडाना ने रजत पदक अपने नाम किया. इनके अलावा बैडमिंटन में मौजूदा विश्व चैंपियन प्रमोद भगत ने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता, जबकि मनोज सरकार के हाथ कांस्य पदक लगा. इसके साथ ही भारत शनिवार तक पैरालंपिक खेलों में कुल 17 पदक जीत चुका है.

टोक्यो पैरालंपिक खेलों के निशानेबाजी में रजत पदक जीतने वाले सिंहराज अडाना (बाएं) और स्वर्ण पदक धारी मनीष नरवाल. (फोटो साभार: ट्विटर)

टोक्यो/नई दिल्ली: टोक्यो पैरालंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का स्वर्णिम प्रदर्शन जारी है. शनिवार को भारत के खाते में दो स्वर्ण पदक आए. इन खेलों में ये दूसरी बार है, जब भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक हासिल किए हैं. बीते 30 अगस्त को निशानेबाजी में अवनि लेखरा के बाद पहली बार पैरालंपिक खेल रहे सुमित अंतिल ने भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया था.

शनिवार को निशानेबाज मनीष नरवाल ने पैरालंपिक रिकॉर्ड के साथ टोक्यो खेलों में भारत की झोली में तीसरा स्वर्ण पदक डाला, जबकि सिंहराज अडाना ने रजत पदक जीता, जिससे पी-4 मिश्रित 50 मीटर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में शीर्ष दोनों स्थान भारत के नाम रहे.

इनके अलावा बैडमिंटन में मौजूदा विश्व चैंपियन प्रमोद भगत ने पुरुष एकल एसएल-3 वर्ग में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता, जबकि मनोज सरकार ने कांस्य पदक अपने नाम किया.

पहले भारतीय निशानेबाजों की बात करें तो पी-4 मिश्रित 50 मीटर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्डधारी 19 वर्ष के नरवाल ने पैरालंपिक का रिकॉर्ड बनाते हुए 218.2 स्कोर करके अपने पहले ही खेलों में पीला तमगा जीता.

स्वर्ण जीतने के बाद उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं.’

नरवाल का परिवार 2016 में उन्हें पास की एक निशानेबाजी रेंज में ले गया था और वह तुरंत इस खेल की ओर आकृष्ट हो गए थे. वह नियमित अभ्यास करते रहे लेकिन उस समय उन्हें पैरालंपिक खेलों के बारे में नहीं पता था.

कोच जयप्रकाश नौटियाल ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्होंने 2017 बैंकाक विश्व कप में पी-1 एयर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में व्यक्तिगत वर्ग का स्वर्ण जीता.

वहीं पी-1 पुरुषों की एस मीटर एयर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में बीते 31 अगस्त को कांस्य जीतने वाले 39 वर्ष के अडाना ने 216.7 अंक बनाकर रजत पदक अपने नाम किया. इसके साथ ही अडाना एक ही खेलों में दो पदक जीतने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए.

अडाना ने कहा, ‘आज फाइनल बहुत कठिन था. जब मैं तीसरे स्थान पर था तो मैंने खुद से कहा कि सिंहराज अच्छा प्रदर्शन, रुको, सांस लो, रुको, ओके. एक शॉट, बस एक शॉट. कोई और बात मेरे दिमाग में चल ही नहीं रही थी.’

फाइनल में पहनी हैट के बारे में उन्होंने कहा, ‘यह मेरी पत्नी ने मुझे तोहफे में दी थी और मेरे लिए लकी है.’

दो पदकों की बात करें तो इससे पहले निशानेबाज अवनि लेखरा ने मौजूदा खेलों में स्वर्ण और कांस्य पदक जीता है. वहीं जोगिंदर सिंह सोढी ने 1984 पैरालंपिक में रजत और कांस्य पदक जीता था.

रूसी ओलंपिक समिति के सर्जेइ मालिशेव ने 196.8 अंकों के साथ कांस्य पदक जीता.

दाहिने हाथ में विकार के शिकार नरवाल की शुरुआत धीमी रही, जब उन्होंने 7.7 और 8.3 स्कोर किया, लेकिन इसके बाद हरियाणा के वल्लभगढ़ के इस युवा ने शानदार वापसी की. दूसरी ओर अडाना की शुरुआत काफी अच्छी रही, लेकिन बीच में वह चूक गए. फाइनल सीरीज में नरवाल ने 8.4 और 9.1, जबकि अडाना ने 8.5 तथा 9.4 स्कोर किया.

इससे पहले क्वालीफाइंग दौर में अडाना 536 अंक लेकर चौथे और नरवाल 533 अंक लेकर सातवें स्थान पर थे. भारत के आकाश 27वें स्थान पर रहकर फाइनल में जगह नहीं बना सके.

भारतीय निशानेबाजों ने मौजूदा खेलों में दो स्वर्ण समेत पांच पदक जीत लिए हैं.

नरवाल ने यूएई में 2021 पैरा निशानेबाजी विश्व कप में पी-4 में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण और टीम वर्ग में रजत पदक जीता था. उन्होंने सिडनी पैरा निशानेबाजी विश्व चैंपियनशिप 2019 में तीन कांस्य पदक जीते थे.

एसएच-1 वर्ग में निशानेबाज एक ही हाथ से पिस्टल पकड़ते हैं, क्योंकि उनके एक हाथ या पैर में विकार होता है जो रीढ़ की में चोट या अंग कटने की वजह से होता है. कुछ निशानेबाज खड़े होकर तो कुछ बैठकर निशाना लगाते हैं.

बैडमिंटन: विश्व चैंपियन प्रमोद भगत ने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता, मनोज को कांसा

मौजूदा विश्व चैंपियन प्रमोद भगत ने शनिवार को पुरुष एकल एसएल-3 वर्ग में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता, जबकि मनोज सरकार ने कांस्य पदक अपने नाम किया, जिससे भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर टोक्यो पैरालंपिक खेलों में देश को पदक दिलाना जारी रखा.

दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी भगत ने फाइनल में ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को हराया, जबकि सरकार ने तीसरे स्थान के प्लेऑफ में जापान के दाइसुके फुजीहारा को मात दी. दोनों ही खिलाड़ियों ने सीधे गेम में जीत दर्ज की.

एसएल-3 वर्ग में उन खिलाड़ियों को हिस्सा लेने की अनुमति होती है जिनके पैर में विकार हो.

बैडमिंटन इस साल पैरालंपिक खेलों में पदार्पण कर रहा है. दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी भगत इस तरह खेल में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए.

शीर्ष वरीय भारतीय और एशियाई चैंपियन भगत ने योयोगी नेशनल स्टेडियम में 45 मिनट तक चले रोमांचक फाइनल में दूसरे वरीय बेथेल को 21-14 21-17 से मात दी.

टोक्यो खेलों में भारत को चौथा स्वर्ण पदक दिलाने के बाद भगत ने कहा, ‘यह मेरे लिए बहुत विशेष है, मेरा सपना सच हो गया. बेथेल ने बहुत कोशिश की, लेकिन मैं संयमित रहा और अपना बेहतर खेल दिखाया.’

उन्होंने कहा, ‘मैं इस पदक को अपने माता-पिता और हर उस व्यक्ति को समर्पित करना चाहूंगा, जिसने मेरा समर्थन किया. मैं खुश हूं कि मैं भारत को गौरवांवित कर सका.’

भगत ने अपने प्रतिद्वंद्वी के बारे में कहा, ‘मैं दो साल पहले जापान में इन्हीं प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेला था और हार गया था. वो मेरे लिए सीखने का मौका था. आज मैं उसी स्टेडियम में हूं और वही माहौल है, लेकिन मैंने जीतने की रणनीति निकाली.’

भुवनेश्वर का 33 साल का यह खिलाड़ी अभी मिश्रित युगल एसएल-3-एसयू-5 वर्ग में कांस्य पदक की दौड़ में बना हुआ है.

भगत और उनकी जोड़ीदार पलक कोहली रविवार को कांस्य पदक के प्लेऑफ में जापान के दाईसुके फुजीहारा और अकिको सुगिनो की जोड़ी से भिड़ेंगे.

एसएल-3-एसयू-5 वर्ग में भगत और पलक की जोड़ी को सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की हैरी सुसांतो एवं लीएनी रात्रि आकतिला से 3-21, 15-21 से हार का सामना करा पड़ा था.

चार वर्ष की उम्र में पोलियो के कारण उनका बायां पैर विकृत हो गया था. उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में चार स्वर्ण समेत 45 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं.

बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में पिछले आठ साल में उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत जीते. 2018 पैरा एशियाई खेलों में उन्होंने एक स्वर्ण और एक कांस्य जीता.

वर्ष 2019 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार और बीजू पटनायक पुरस्कार से नवाजा गया.

वहीं 31 वर्षीय बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार जब एक साल के थे तो पोलियो से ग्रस्त हो गए थे. उन्होंने फुजीहारा के खिलाफ शानदार जज्बा दिखाते हुए 22-20, 21-13 से जीत हासिल की.

पुरुष एकल की एसएल-3 वर्ग के सेमीफाइनल में वह ब्रिटेन के बेथेल से 8-21 10-21 से हार गए थे, लेकिन उन्होंने हार के बाद वापसी करते हुए कांसा अपने नाम किया.

सरकार ने पांच साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया था, लेकिन अपने बड़े भाइयों के खिलाफ जीत के बाद ही वह इस खेल के प्रति जुनूनी हुए, जिसके बाद उन्होंने गंभीरता से खेलना शुरू किया. वह सक्षम खिलाड़ियों के खिलाफ अंतर स्कूल प्रतिस्पर्धा में खेले, जिसके बाद उन्होंने 2011 में पैरा बैडमिंटन में खेलना शुरू किया.

उन्होंने बीजिंग में 2016 एशियाई चैंपियनशिप के एसएल-3 एकल में स्वर्ण पदक जीता था. 2018 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला.

स्वर्ण पदक के मैच में प्रमोद भगत ने शुरू में बढ़त गंवा दी थी, लेकिन जल्द ही वापसी करते हुए वह 8-6 से आगे हो गए. बेथेल अपने प्रतिद्वंद्वी की गलतियों का इंतजार कर रहे थे, लेकिन ब्रेक तक भारतीय खिलाड़ी 11-8 से आगे था.

फिर भगत ने 15-9 की बढ़त बना ली, हालांकि कुछ अंक भी गंवाए, लेकिन छह गेम पॉइंट जीत लिए. भगत ने आक्रामक रिटर्न से पहला गेम जीत लिया.

दूसरे गेम में बेथेल ने 11-4 की बढ़त बना ली थी, लेकिन भगत ने शानदार वापसी कर अगले सात में से छह अंक जुटाकर बेथेल की बढ़त कम की. वह 10-12 से पीछे थे, लेकिन जल्द ही उन्होंने पासा पलट दिया और 16-15 से आगे हो लिए.

विपक्षी खिलाड़ी की गलती से भगत की बढ़त 18-16 की हो गई और लगातार आक्रामक स्मैश से उन्होंने तीन मैच पॉइंट जुटाए. बेथेल की एक और गलती के साथ ही भगत ने रैकेट गिराकर अपने कोच गौरव खन्ना को गले लगाया और स्वर्ण का जश्न मनाया.

भारत को अभी और पदक मिलने है, जिसमें सुहास यथिराज एसएल-4 और कृष्णा नागर एसएच-6 क्लास के पुरुष एकल फाइनल में पहुंच चुके हैं.

तरुण ढिल्लों को सेमीफाइनल में पराजय का सामना करना पड़ा, जिससे वह कांस्य पदक की दौड़ में शामिल हैं.

एसएल-4 क्लास में सुहास ने इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 31 मिनट में 21-9, 21-15 से हराया. अब उनका सामना शीर्ष वरीयता प्राप्त फ्रांस के लुकास माजूर से होगा.

कर्नाटक के 38 वर्ष के सुहास के टखनों में विकार है. कोर्ट के भीतर और बाहर कई उपलब्धियां हासिल कर चुके सुहास कम्प्यूटर इंजीनियर हैं और प्रशासनिक अधिकारी भी. वह 2020 से नोएडा के जिला मजिस्ट्रेट हैं और कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में मोर्चे से अगुवाई कर चुके हैं.

उन्होंने 2017 में बीडब्ल्यूएफ तुर्की पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में पुरुष एकल और युगल स्वर्ण जीता. इसके अलावा 2016 एशिया चैंपियनशिप में स्वर्ण और 2018 पैरा एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया.

दूसरी वरीयता प्राप्त कृष्णा नागर ने ब्रिटेन की क्रिस्टीन कूम्ब्स को एसएच-6 क्लास सेमीफाइनल में 21-10, 21-11 से हराया. अब उनका सामना हांगकांग की चु मान केइ से होगा.

22 वर्ष के नागर ने चार साल पहले ही खेलना शुरू किया. उन्होंने पैरा एशियाई खेलों में रजत और विश्व चैंपियनशिप 2019 में एकल में कांस्य और युगल में रजत पदक जीता था.

दूसरे एसएल-4 सेमीफाइनल में माजूर ने दूसरी वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी ढिल्लों को करीबी मुकाबले में 21-16, 16-21, 21-18 से हराया. हिसार के 27 वर्ष के ढिल्लों का सामना कांस्य पदक के लिए सेतियावान से होगा.

भारत का पैरालंपिक में प्रदर्शन

भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन के साथ टोक्यो पैरालंपिक में शनिवार तक कुल 17 पदक भारत के नाम हो चुके हैं. इसमें चार स्वर्ण, सात रजत और छह कांस्य शामिल हैं. पैरालंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुके भारतीय खिलाड़ी उस लय को बरकरार रखे हुए हैं.

इससे पहले बीते तीन सितंबर को 19 साल की निशानेबाज अवनि लेखरा ने फिर इतिहास रचा था, जबकि 18 वर्ष के प्रवीण कुमार ने एशियाई रिकॉर्ड के साथ रजत पदक जीता और हरविंदर सिंह ने पैरालंपिक खेलों के इतिहास में तीरंदाजी में भारत को पहला पदक दिलाया था.

तीरंदाजी में हरविंदर ने पुरुषों के व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में कांस्य पदक के लिए रोमांचक शूटऑफ में कोरिया के किम मिन सू को मात दी. दुनिया के 23वें नंबर के खिलाड़ी सिंह ने 2018 पैरा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था.

बीते 31 अगस्त को भारतीय निशानेबाज सिंहराज अडाना ने टोक्यो पैरालंपिक खेलों में पी-1 पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था. 31 अगस्त को ही रियो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता मरियप्पन थंगावेलु ने पुरुषों की ऊंची कूद टी-42 वर्ग में रजत और शरद कुमार ने कांस्य पदक जीता था.

बीते 30 अगस्त को भारत ने टोक्यो पैरालंपिक खेलों में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे. निशानेबाजी में अवनि लेखरा के बाद पहली बार पैरालंपिक खेल रहे सुमित अंतिल ने भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया था.

इसके अलावा बीते 30 अगस्त को ही स्टार पैरा एथलीट और दो बार के स्वर्ण पदक विजेता देवेंद्र झाझरिया पैरालंपिक खेलों की भाला फेंक स्पर्धा में अपना तीसरा पदक रजत पदक के रूप में जीता, जबकि चक्का फेंक के एथलीट योगेश कथूनिया ने भी दूसरा स्थान (रजत पदक) हासिल किया.

इतना ही नहीं सुंदर सिंह गुर्जर ने भी कांस्य पदक जीता. वह पुरुषों के भाला फेंक के एफ-46 स्पर्धा में झाझरिया के बाद तीसरे स्थान पर रहे. 29 अगस्त को टेबल टेनिस में भाविना पटेल और ऊंची कूद स्पर्धा में निषाद कुमार ने रजत पदक भारत के नाम किया था. भाविना के पदक के साथ भारत का टोक्यो पैरालंपिक में खाता खुला था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)