राजनीति

झारखंड विधानसभा में नमाज़ कक्ष: भाजपा सदस्यों ने ‘जय श्री राम’ का पाठ कर कार्यवाही में बाधा डाली

झारखंड विधानसभा परिसर में विधानसभाध्यक्ष ने नमाज़ पढ़ने के लिए एक कमरा आवंटित करने का आदेश दिया है. मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने कहा है कि यह पूरी तरह असंवैधानिक क़दम है. विधानसभाध्यक्ष को ऐसा करना ही था तो उन्हें विधानसभा में एक भव्य हनुमान मंदिर का निर्माण कराना चाहिए और अन्य धर्मावलंबियों के लिए भी पूजा अथवा आराधना कक्ष निर्धारित करना चाहिए.

झारखंड विधानसभा में नमाज कक्ष आवंटित किए जाने का विरोध करते भाजपा विधायक. (फोटो: पीटीआई)

रांची: झारखंड विधानसभा में नमाज पढ़ने के लिए एक कमरा आवंटित करने के मुद्दे पर विवाद जारी है. मंगलवार को प्रदर्शन करते हुए भगवा रंग के कपड़े पहनकर और ‘जय श्री राम’ और ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक आसन के समीप पहुंच गए और सदन की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न किया.

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा सदस्यों ने नमाज के लिए कमरा आवंटित किए जाने और राज्य की रोजगार नीति के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया. इस बीच विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने हंगामा कर रहे सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलते रहने देने की अपील की.

प्रदर्शनकारी सदस्य प्रश्नकाल के दौरान नारे लगाते रहे, जिसके कारण दोपहर 12:30 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

महतो ने प्रदर्शनकारी विधायकों से कहा, ‘आसन का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अगर आप नाराज हैं तो मुझे पीट लें, लेकिन कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न नहीं करें. कृपया अपने-अपने स्थानों पर जाएं. मुझे बहुत पीड़ा हुई है. यह 3.5 करोड़ लोगों की आस्था का प्रश्न है और आपके आचरण से मुझे कष्ट पहुंचा है.’

हंगामे के बीच अध्यक्ष ने भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही से ‘हनुमान चालीसा’ का सम्मान करने और राजनीतिक फायदे के लिए इसका इस्तेमाल न करने को कहा. उन्होंने कहा कि वह कामना करते हैं कि ‘बजरंग बली’ हंगामा कर रहे विधायकों को सदबुद्धि दें.

बीते सोमवार को भी भाजपा सदस्यों ने सदन में हंगामा किया था, जिससे सदन की बैठक बाधित हुई थी.

बता दें कि, झारखंड विधानसभा परिसर में कमरा संख्या टीडब्लू 348 को विधानसभाध्यक्ष द्वारा नमाज अदा करने के लिए ‘नमाज-कक्ष’ के रूप में निर्धारित करने का दो सितंबर को आदेश दिया था, जिसके बाद मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और कहा था कि यह पूरी तरह असंवैधानिक कदम है.

भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि विधानसभाध्यक्ष को ऐसा करना ही था तो उन्हें विधानसभा में एक भव्य हनुमान मंदिर का निर्माण कराना चाहिए एवं अन्य धर्मावलंबियों के लिए भी पूजा अथवा आराधना कक्ष निर्धारित करना चाहिए.

इससे पहले बीते पांच सितंबर को भाजपा ने राजधानी रांची समेत पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं विधानसभाध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो का पुतला दहन किया था.

इस आदेश के सामने आते ही जहां सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा एवं कांग्रेस ने इसका स्वागत किया, वहीं मुख्य भाजपा ने इसका विरोध किया था.

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुबर दास ने कहा था, ‘हेमंत सरकार में शामिल विधायक खुलेआम तालिबान का समर्थन करते हैं. झारखंड विधानसभा में नमाज के लिए अलग कमरा इसी विचारधारा का नतीजा है. वरना भारतीय लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति ऐसी हरकत नहीं करता.’

दास ने आरोप लगाया था, ‘हेमंत सरकार तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के लिए संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा भी तार-तार कर रही है. यह झारखंड के लिए शुभ संकेत नहीं हैं.’

बीते चार सितंबर को विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के मुख्य सचेतक विरंची नारायण ने पत्र लिखकर विधानसभाध्यक्ष से अपना यह आदेश वापस लेने का अनुरोध किया, ऐसा नहीं करने पर अदालत जाने की बात कही थी.

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी कहा है, ‘लोकतंत्र के मंदिर को लोकतंत्र का मंदिर ही रहना चाहिए. हम ऐसे किसी भी आदेश के खिलाफ हैं.’

इससे पूर्व सत्ताधारी कांग्रेस और झामुमो ने बयान जारी कर विधानसभाध्यक्ष के इस कदम का स्वागत किया, जबकि कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने आरोप लगाया, ‘भाजपा को तो पहले से ही हिंदू-मुस्लिम करने की आदत है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)