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दिल्ली: वेतन भुगतान व शोषणकारी कामकाजी स्थिति के विरोध में उतरीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

दिल्ली की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वेतन वृद्धि, कोविड-19 कर्मियों के रूप में मान्यता देने सहित कई मांगों को लेकर दिल्ली सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने दिल्ली सरकार के सामने 22 मांगें रखी हैं, जिनमें उचित मानदेय का भुगतान, बकाया धनराशि जारी करना और स्वास्थ्य, भविष्य निधि, पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा से संबंधित सुविधाएं देना शामिल हैं.

दिल्ली सचिवालय के बाहर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका संघ का प्रदर्शन.

नई दिल्लीः आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वेतन वृद्धि, कोविड-19 कर्मियों के रूप में मान्यता देने सहित अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को दिल्ली सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

इनकी मांगों में उचित मानदेय का भुगतान, बकाया धनराशि जारी करना और स्वास्थ्य, भविष्य निधि, पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा से संबंधित सुविधाएं है.

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि विधायक उन्हें चुनाव प्रचार के काम में लगाकर प्रताड़ित न करे.

दिल्ली विधानसभा में 70 में से 63 विधायक आम आदमी पार्टी के हैं जबकि बाकी भाजपा के हैं.

इस विरोध प्रदर्शन में हजारों की संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया, जो महिला एवं बाल विकास विभाग को रिपोर्ट करते हैं और टीकाकरण अभियानों में डॉक्टरों की सहायता करना, प्रजनन को लेकर जागरूकता फैलाना, जरूरतमंदों को दवाइयां प्रदान कराना, टीकाकरण अभियान और इसमें शामिल लोगों के रिकॉर्ड रखना, बीमारी के मामले दर्ज करना, स्वच्छता और बीमारी को लेकर जागरूकता फैलाना और प्री-स्कूल गतिविधियां आयोजित करने जैसे महत्वपूर्ण काम करते हैं.

द वायर  से बात करते हुए दिल्ली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ की वृषाली ने कहा कि महत्वपूर्ण कार्य कर रही इन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को न तो समय पर भुगतान किया जाता है और न ही उन्हें वे सुविधाएं दी जाती हैं, जिनकी वे हकदार हैं. दिल्ली में लगभग 22,000 आंगनबाड़ी और स्वास्थ्यकर्मी काम करती हैं.

उन्होंने कहा कि दिल्ली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लगभग 10 महीनों से पूरा मानदेय नहीं दिया गया है इसलिए हम उस बकाया धनराशि के भुगतान की मांग कर रहे हैं.

मानदेय बढ़ाने के प्रधानमंत्री का वादा लागू नहीं

वृषाली ने कहा कि 11 सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऑनलाइन बैठक में कहा था कि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में इजाफा किया जाएगा लेकिन तीन साल बीतने पर भी अभी तक संशोधित दरों को लागू नहीं किया गया है.

उन्होंने कहा कि हालांकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए 1,500 रुपये की बढ़ोतरी और सहायिकाओं के लिए 750 रुपये की मामूली बढ़ोतरी का ऐलान किया गया था लेकिन उस धनराशि का भी भुगतान नहीं किया गया.

उन्होंने कहा, ‘अगस्त 2021 से इन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का बकाया 51,000 रुपये और सहायिकाओं का बकाया 25,500 रुपये हो गया है. हम चाहते हैं कि इस धनराशि का भुगतान किया जाए.’

सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा, ‘दिल्ली सरकार सहेली समन्वय केंद्र का संचालन कर रही है और केंद्र सरकार अपनी नई शिक्षा नीति के तहत हमें भी शामिल करना चाहती है इस तरह वह प्राथमिक स्कूलों का बोझ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कंधों पर डालने का प्रयास कर रही है.’

वृषाली ने कहा, ‘हम सिर्फ यह कह रहे हैं कि हमारे काम के अनुसार हमें वेतन दिया जाना चाहिए इसलिए हमें कर्मचारी का दर्जा दीजिए, हमें कड़ी मेहनत करने से कोई आपत्ति नहीं है.’

उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण काम किए हैं, जिनमें खाद्य सामग्री के वितरण से लेकर सर्वेक्षण करना शामिल है लेकिन अगर कोई कार्यकर्ता महामारी की चपेट में आ जाए तो विभाग उनके इलाज का मेडिकल बिल भरने के लिए उत्तरदायी नहीं है.

आंगनबाड़ी के कामकाज में विधायकों का हस्तक्षेप

वृषाली का कहना है कि एक अन्य प्रमुख मांग आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कामकाज में विधायकों के हस्तक्षेप की है.

उन्होंने कहा, ‘वे (विधायक) आंगनबाड़ी केंद्रों के कामकाज में हस्तक्षेप करते हैं. हम विधायकों के कर्मचारी नहीं हैं. हम महिला एवं बाल  विकास विभाग के स्वयंसेवक (वॉलेंटियर) हैं इसलिए हम विधायकों को जवाब देने के लिए जवाबदेह नहीं हैं तो ऐसे में इन विधायकों को हमारे कामकाज में इतना हस्तक्षेप करने की मंजूरी कैसे दी जा रही है, अगर ऐसा होता है तो विभाग को कुछ करना चाहिए.’

उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में विधायकों द्वारा इतना हस्तक्षेप नहीं किया जाता.

वृषाली का आरोप है कि ये विधायक हमारा उत्पीड़न कर रहे हैं क्योंकि अगले साल दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव होने जा रहे हैं. वे कर्मचारियों के जरिये आंगनबाड़ी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. हमारी योजनाएं केंद्र और राज्य सरकार दोनों के तहत आती हैं इसलिए हम किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विधायकों और उनके कर्मचारियों द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न को समाप्त करने और उन्हें चुनावी प्रचार में लगाकर उनका शोषण तत्काल रोकने की मांग की है.

22 सूत्रीय मांगें

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संघ ने दिल्ली सरकार के समक्ष 22 मांगें रखी हैं. मांग की गई है कि सहेली समन्वय केंद्र खोलने की नीति और नई शिक्षा नीति 2020 के फैसले को दिल्ली और केंद्र सरकार को वापस लेना चाहिए क्योंकि ये नीतियां आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर करती है.

उन्होंने कहा, ‘बिना अतिरिक्त वेतन के आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ताओं के कामकाजी दिनों को बढ़ाने का फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए.’

बढ़ती महंगाई के मद्देनजर संघ की मांग है कि सरकार को तत्काल प्रभाव से मानदेय बढ़ाना चाहिए और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका के लिए 18,000 रुपये और 12,000 रुपये कामानदये सुनिश्चित करना चाहिए.

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दें

यह भी आग्रह किया गया कि सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाना चाहिए, नियमित किया जाना चाहिए और श्रम कानूनों के तहत लाया जाना चाहिए ताकि उनको रोजगार की गांरटी सुनिश्चित की जा सके.

संघ ने यह भी कहा कि सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ईएसआई, पीएफ,पेंशन और सामाजिक सुरक्षा कार्ड जैसी सुविधाएं दी जानी चाहिए.

संघ ने कहा कि दिल्ली और केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित और एक अक्टूबर 2018 से लागू मानदेय बढ़ोतरी के बकाये का तुरंत भुगतान करना चाहिए.

इसके साथ ही समेकित बाल विकास परियोजना में गैर सरकारी संगठनों के हस्तक्षेप को तत्काल रोकने और एनजीओ द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण को तत्काल रोकने की भी मांग की.

संघ की यह भी मांग है कि ब्लॉक समन्वयक के व्यवहार की भी जांच करनी चाहिए. पोषण आहार के आवंटन की पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जाए, कोविड-19 महामारी के दौरान महिला कामगारों के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था करनी चाहिए और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के कोरोना संक्रमित होने पर इनके उचित इलाज की जिम्मेदारी विभाग द्वारा ली जानी चाहिए.

इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांग है कि उनके काम के लिए बजट बढ़ाया जाना चाहिए और आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता में सुधार करना चाहिए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)